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यज्ञोपवीत संस्कार आत्मशुद्धि आ ज्ञानक मार्ग थिक उत्सव वा स्टेटस सिंबल नहि

यज्ञोपवीत संस्कार मे देखाऊँस सँ बेसी वैदिक रीति अनुरूप संस्कार आवश्यक

यज्ञोपवीत संस्कार ब्रम्ह ज्ञान अर्जित केनिहार कें बिशिष्ट सम्मान स्वरूप गुरु दिसन सँ देल जाइत छल

बड़साइत निष्ठा,भक्ति आ दृढ़ संकल्पक सँ पतिक दीर्घायु लेल करै वला ई पावनि थिक

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यज्ञोपवीत संस्कार आत्मशुद्धि आ ज्ञानक मार्ग थिक उत्सव वा स्टेटस सिंबल नहि

लेख विचार प्रेषित: ममता झा मेधा श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि विषय :- यज्ञोपवीत संस्कार आ आडंबर ******* यज्ञोपवीत संस्कार सनातन धर्मक सोलह संस्कार मे…

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यज्ञोपवीत संस्कार मे देखाऊँस सँ बेसी वैदिक रीति अनुरूप संस्कार आवश्यक

लेख विचार प्रेषित: कीर्ति नारायण झा श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि विषय :- यज्ञोपवीत संस्कार यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार हमर मिथिलाक संस्कृति, परंपरा आ जीवन…

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यज्ञोपवीत संस्कार ब्रम्ह ज्ञान अर्जित केनिहार कें बिशिष्ट सम्मान स्वरूप गुरु दिसन सँ देल जाइत छल

लेख विचार प्रेषित: दिलीप झा ललित श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि विषय :- यज्ञोपवीत संस्कार मे बढ़ैत आडम्बर   यज्ञोपवीत संस्कारमे बढ़ैत आडम्बर :…

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श्रीमद्भागवद्गीता अष्टम् अध्याय

ॐ श्री परमात्मने नमः !! ॥अष्टमोऽध्यायः॥ अर्जुन उवाच । किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम ॥ अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥८-१॥ अर्जुन कहलनि: हे पुरुषोत्तम, ब्रह्म कि थिक, अध्यात्म…

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श्रीमद्भागवद्गीता सप्तम अध्याय

ॐ श्री परमात्मने नमः!! ॥सप्तमोऽध्यायः॥ श्री भगवानुवाच । मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः ॥ असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥७-१॥ भगवान कहलनि: हे पृथापुत्र, हमरा मे मन लगाकय, हमर शरण…

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नेपालक बाढ़ि, आगू खतरा कायमे, सब कियो सचेत रहू

सावधान मानव समाज - प्रलय केर पुनरावृत्तिक तीव्र आशंका आ जोखिम बनले अछि चीन दूतावास द्वारा जारी त्रासदीपूर्ण बाढ़िक मार्ग चित्र मे संलग्न अछि । चीन द्वारा देखायल गेल मार्गचित्र…

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राखीः रक्षा बन्धन – पाबनि एक अर्थ अनेक

संस्कृति-सभ्यता (लेख-विचार) - कुमुद मोहन झा, विराटनगर, नेपाल । रक्षा-बन्धन : एकटा धागामे बान्हल प्रेम, विश्वास आ उत्तरदायित्वक अनन्त कथा श्रावण पूर्णिमाक पावन दिन । चारूकात वर्षाक हरियरी, आकाशमे बादलक…

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श्रीमद्भागवद्गीता षष्ठम् अध्याय

ॐ श्री परमात्मने नमः!! ॥षष्ठोऽध्यायः॥ श्रीभगवानुवाच । अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः ॥ स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥६-१॥ भगवान कहलनि: जे कर्म केर फल केर…

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