“मैथिली जिन्दाबाद” केर ११ वर्ष पूरा
आइ ११ अप्रैल २०२६ केँ “मैथिली जिन्दाबाद” वेब-पत्रिकाक ११ वर्ष पूरा भ’ गेल । एहि ११ वर्ष मे बहुत किछु अनुभव भेटल । मैथिल समाज केँ लिखित आलेख-रचना आदिक मार्फत नजदीक सँ बुझबाक सामग्री भेटल । आबयवला पीढ़ी – वर्तमान युवा पीढ़ी संग-संग ‘गूगल देवता’ सँ अनेकों मैथिली बात-कथा बुझनिहार लेल “मैथिली जिन्दाबाद” सेहो किछु हद तक सहयोग कयलक, कय रहल अछि आ आगुओ करत । आइ-काल्हि “एआई” (आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स) केर चर्चा कतेक बेसी होइछ से किनको सँ छुपल नहि य । एहेन स्थिति मे एआई केँ सेहो वैह सामग्री मदति करैत छैक जे वेब आ क्लाउड मे पहिनहिं सँ हमहीं-अहाँ उपलब्ध करौने छी । तेकरे ओ पोछि-पाछि, चिक्कन-चुनमुन बनाकय विधिवत् ढंग सँ हमरा-अहाँक सोझाँ रखैत अछि । बिल्कुल यैह सपना सब देखिकय मैथिली जिन्दाबाद नाम्ना वेब पत्रिका २०१५ मे आरम्भ कयल गेल छल, आइ ११ वर्ष पूरा भेला पर संस्थापक-परिकल्पक रूप मे हमरा कतेक बेसी प्रसन्नता अछि से शब्द मे कि बयान करू ।
अपन मैथिल समाज मे गपमारी प्रवृत्ति बड विचित्र ढंग सँ समाज केँ मुठ्ठी मे कब्जा कय लेने देखलहुँ एहि ५३ वर्षक अवस्था मे । विद्यालय मे, ट्युशन क्लासेज मे, शहर मे, गाम मे, मार्ग मे, परिवहन मे – हर जगह ‘गपमारा’ समाजक दर्शन होइत रहल, मन-हृदय भीतर सँ कुहकैतो छल आ हँसैतो छल । कुहकय एहि लेल जे हम सब एहि समाजक हिस्सा छी जेकर आदति ९०% गप मारनाय आ १०% मात्र गप अनुसार काजो कयनाय अछि । हँसय एहि लेल जे कोढ़िपनक हद रहितो हम सब गप मारिकय काज भेल से बुझय बहुते वीर लोक सब छी । मन पड़ैत छथि कानपुर प्रवासी अनिल भाइक देल एकटा अविस्मरणीय उदाहरण – बयानचन्द, हुकुमचन्द आ करमचन्द अलंकारिक कथा । ९७% लोक बयानचन्द आ हुकुमचन्द वर्गक अछि अपन मिथिला मे, ३% लोक करमचन्द । प्रत्येक परिवार मे ध्यानपूर्वक देखला सँ ई तीनू भाइक गाथा भेटि जाइत अछि । मिथिला शिथिला हेबाक मूल कारण यैह थिक । आर एकर प्रत्यक्ष उदाहरण ई अछि जे एतेक प्राचीन भाषा मैथिली केर एकहु गोट पत्रिका एहेन नहि जे मैथिल लोक सब ताकि-ताकि कय पढ़य ।
मिथिला दर्शन, मिथिला मिहिर, घर-बाहर, समयसाल, मैथिली दर्पण, मिथिला दर्पण, आदि-आदि नाम संगहि पछातिकाल कतेको रास अनलाइन (वेब) पत्रिका सभक अम्बार अछि मैथिली मे । मुदा एकहु टा ब्रान्ड एहेन नहि जे १००% मैथिलीभाषी समाज लेल कारगर सिद्ध भ’ सकल हो । एहि मे कोनो पत्रिकाक दोष नहि, ई हम मैथिलीभाषी समाजक निजत्व प्रति उदासीनता आ नकारात्मक ऊर्जा स्वयं विकसित कय लेबाक कारण, हिन्दी व अन्य भाषा मे जोश-जागरण भेटबाक कारण, परदेशिया नाच आ दूरक ढोल सोहावन, बारीक पटुआ तीत यथास्थितिक कारण भेल अछि । राज्य द्वारा थोपल गेल हिन्दी माध्यमक शिक्षा पद्धति आ लोकमानस मे अंग्रेजी सँ भेटत रोजी त कियैक पढ़ू मैथिली वला रवैया हावी रहबाक कारण एहेन दुरावस्था भेल कहि सकैत छी । एखनहुँ कतेको लोक मैथिली मातृभाषाक स्थिति सुधारबाक वकालत कम कय केँ हिन्दी मे मैथिलीक बात करय लेल उताहुल छथि – सामाजिक संजाल आ हमर बहुत नजदीकक विचारक वर्गक लोक पर्यन्तक यैह हाल देखैत छी हमहूँ ।
गोटेक वर्ष मात्र भेल छल अपन मैथिली भाषा सँ प्रेम चरम पर पहुँचब । दहेज विरूद्ध युवा संकल्प ओ जागरण सँ होइत साहित्यक प्रांगण मे प्रवेश भेल । फेर मिथिला राज्यक अपरिहार्य आवश्यकता पर ध्यान गेल । अपन जीवनक एक-एक क्षण उपयोग करैत बढ़ैत रहलहुँ आ भारत मे २०१४ सँ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केर अद्भुत विजय प्राप्तिक बाद भरोसा बढ़ि गेल जे ई सरकार अवश्य मिथिला हित करत, से करैतो जा रहल अछि – त हम सब कमजोर पक्ष केँ मजबूत करय दिश लागि जाय । कमजोर पक्ष अछि मैथिली मे ‘संचारकर्म’ । संचारकर्मक इतिहास भले १९०५ ई. जयपुर (राजस्थान) सँ शुरू होइत कोलकाता, काशी, पटना, प्रयाग, गुआहाटी, दिल्ली, जमशेदपुर, राँची, बोकारो, धनबाद, देवघर, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, जनकपुर, काठमांडू, विराटनगर, राजविराज, लहान, वीरगंज, बुटवल आदि कतेको स्थान धरिक यात्रा कयलक; परञ्च प्रिन्ट मीडिया सँ बेसी महत्व वेब मीडियाक होयत आ नव पीढ़ी मोबाइले मे सब किछु पढ़त त ओकरा सब लेल किछु उपक्रम आवश्यक अछि । यैह सोचिकय “मैथिली जिन्दाबाद” काफी जोश-उत्साह सँ समारोहपूर्वक उद्घाटन करैत आरम्भ भेल छल । सम्भवतः कनेक्ट सेहो कयलक लोक सब सँ । तखन त ९७% हुकुमचन्द-बयानचन्द सँ भरल समाज मे ३% करमचन्द लेल ई कतेक रास्ता तय कयलक, एहि पर हमर निजी समीक्षा महत्वहीन होयत । ई काज समय आ निष्पक्ष विचारधारा रखनिहार पर छोड़ि रहल छी ।
११ वर्षक पूर्णता पर स्वयं केँ बधाई दय रहल छी । आत्मरती मनुख हमरा बेतरतीब लगैत अछि, मुदा जे बाजी से कइयो केँ देखाबी, निज-संकल्प अछि । एहि मे कोनो समझौता एहि जीवनकाल मे नहि होयत । जे बाजब से करब आ कयले उपरान्त क्रियमाण-संचित-प्रारब्ध जेहेन त्रिविध कर्म पूर्ण होयत । तदोपरान्त मात्र मुक्तिमार्ग पर अग्रसर होयब आ परमात्माक संग परमानन्द केँ प्राप्त करब । अपने सभक संग ई यात्रा अनवरत चलैत रहत ।
चिन्ता एक्के टा अछि, हम चलि जायब तखन एकरा जिन्दा रखबाक लेल जाय सँ पहिने कोन उपाय कय केँ जाय ? ओतेक विज्ञ नहि छी, लेकिन परमपिता परमेश्वर पर पूरा विश्वास रहल हमेशा हर बात लेल । अहू बात लेल हुनकहि भरोसा अछि । ओ सब किछु नीक कयलनि, त ई काज सेहो वैह नीक करता । विज्ञापनदाता तक नहि भेटैछ, आ मांगब अपन आदत नहि । तैयो साल भरिक खर्च-बर्च निमाहैत ई यात्रा ११ वर्ष जेकाँ अनन्तकाल धरि चलय, स्वयं पराम्बा अवलम्ब थिकथि, रक्षा करैत रहथि ।
नमः पार्वती पतये हर हर महादेव !!
हरिः हरः!!
