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अराजक आन्दोलनक बितन्डा सँ बचय भारत

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भारत मे बितन्डा मचेबाक विदेशी षड्यन्त्र सँ बचय रचनाशील जनता

भारतीय राजनीति मे स्थायी सरकार द्वारा संरचनात्मक विकास आ नित्य बढ़ैत अर्थतंत्र सँ केकरा सब केँ परेशानी बढ़ल छैक ?

भारत सरकार द्वारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद आ ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ नारा सँ छद्म-धर्मनिरपेक्षवादी लोक वास्तव मे सत्ता सँ दूर कय देल गेल अछि । आब एहि बातक करीब १२ वर्ष बीतल । प्राकृतिक न्यायक सूत्र मे बहुसंख्यक हिन्दू समुदायक अगुवाई मे सत्ता निर्धारण सँ देशक विकास कतहु ठमकल नहि, एकर प्रशंसा हेबाक चाही । भले हि कतबो नकारात्मक भाष्य सब विपक्ष द्वारा ठाढ़ कयल गेल, परञ्च विश्वस्तरीय आर्थिक मंच पर भारतक नव सूरज केर चमक सँ सब परिचित अछि ।

स्वतंत्र भारत मे शुरुए मे धर्मक नाम पर देशक विभाजन करब, आ एम्हर धर्मनिरपेक्षता नीति अपनाकय शासन-सूत्र लागू करब, शुरू मे भारतक उदार छवि ठाढ़ कयलक । एहि मे कतहु दुइ मत नहि । जे सब भविष्यद्रष्टा ई नीति सोचलनि से गलत नहि कयलनि । एकर दूरगामी लाभ भारत केँ भेटल । कारण धर्मक नाम पर अलग भेल पाकिस्तानक आर्थिक अबस्था आ विकास दर – जनसुविधा आ समग्र प्रगतिक तुलना मे भारतक स्थिति कतेक बेहतर अछि से सर्वविदिते अछि ।

मुदा वैह धर्मनिरपेक्षता जखन सत्तालोलुपताक माध्यम बनि गेल, फेर भारतीय राजनीति मे बहुसंख्यक हिन्दू केँ अपमानित बोध होबय लागल । एकर कतेको रास उदाहरण स्पष्ट अछि – काश्मीर, अयोध्या, काशी, मथुरा आदि अनेकों ऐतिहासिक भूल केँ समय पर समाधान नहि कयल जायब हमरा बेसी खलैत अछि ।

छद्म धर्मनिरपेक्षताक नाम पर बहुल हिन्दू धर्म पर तरह-तरह के नकेल लगाकय अन्य धर्म केँ अल्पसंख्यक संज्ञा दैत संरक्षण-संवर्धन केर दोयम नीतिक सारा खेल-वेल उजागर भ’ गेलाक बाद हिन्दू समाज मे ध्रुवीकरण भेल अछि । एहि मे कतहु दुइ मत नहि । पश्चिमी शक्ति आ ईस्लामिक देश सब केँ ई बात अखैर रहल छैक । ओ सब पुनः ढकोसलावादी नीति सँ भारत मे हिन्दू धर्म पर नियंत्रण चाहैत अछि ।

धरि, अल्पसंख्य तुष्टिकरण आ वोट बैंक पोलिटिक्स केर भंडाफोड़ सेहो भ’ गेलाक बाद भाजपा नीत एनडीए केर प्रदर्शन संघ आ प्रदेश दुनू ठाम बेहतर होइत चलि गेल छैक । भारतक सर्वथा प्राचीन राजनीतिक दल भारतीय कांग्रेस आइ सिकुड़िकय नाममात्र अस्तित्व मे बचल देखाइत अछि । तेसर मोर्चा या कम्यूनिष्ट सेहो छितरायल अबस्था मे इरले-विरले बचल देखाइछ ।

भारतीय धर्म आ दर्शन सँ शत्रुताक बड पैघ इतिहास छैक । लगभग २५०० वर्षक इतिहास त हमहुँ सब गानि लैत छी । कतेको विधर्मी आक्रान्ताक घात सँ लहुलुहान भेल भारत । ताहि सँ पहिनेक अबस्था कि रहल हेतैक सेहो महाभारत, रामायण व अन्य ऐतिहासिक गाथा वर्णन करयवला शास्त्रक अध्ययन सँ थोड़-बहुत अकानि पबैत छी हम सब ।

एखन एकटा ‘कौकरोच जनता पार्टी’ भारत मे विदेशी एजेन्डा सँ फेर लहुलुहान करबाक लेल आतुरता सँ भरिकय विभिन्न ‘आन्दोलन’ केर नौटंकी ठाढ़ करय चाहि रहल अछि । जनता मे वर्तमान सरकार सँ ओकरा सभक मुताबिक असन्तोष नहि पसरि पेलैक, त कौकरोच जनता केँ हरमुठाई करबाक लेल आन्दोलनक टन्टा ठाढ़ कयल जा रहल अछि । देशक अर्थतंत्र आर छहोंछित भ’ जाउक, सन्तुष्ट जनता सेहो असन्तुष्ट भ’ ओकर बेतरतीब आ नौटंकीपूर्ण अराजक आन्दोलनक हिस्सा बनि जाउ, बस एतबी सँ विदेशी आका सब प्रसन्न भ’ जायत ।

ध्यान रहय रचनाशील जनता, अराजक तांडव केर बितन्डा कहल जाइछ । एहि सँ देश केँ बचाकय राखब ।

हरिः हरः!!

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