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स्वास्थ्य केना नीक रहत ताहि दिश सभक ध्यान रहनाय आवश्यक अछि

17 भ्यूज

स्वास्थ्य – मानव जीवनक जरूरी सरोकार

मानव जीवन मे स्वास्थ्य सम्बन्धी शिक्षा अत्यन्त जरूरी अछि । कहबी छैक न – money is gone, nothing is gone; health is gone, something is gone; character is gone, everything is gone. एतहु स्वास्थ्य केँ सम्पत्ति सँ बेसी महत्वपूर्ण कहल गेल छैक । चरित्र तँ सर्वोपरि अछिये । आजुक समय खानपानक तौर-तरीका, मानव रहन-सहन केर तौर-तरीका, पर्यावरणीय प्रदूषण आदि, खेतीपाती मे अनेकों तरहक बिया (जेनेटिक मोडिफाइड किसिम केर कथित उन्नत बीज), उर्वरक, कीटनाशक, आदिक प्रयोग संगहि अन्न, तेल, मसाला आदिक गुणवत्ता मे विभिन्न मानवीय बौद्धिक प्रयोग सँ प्राकृतिक गुणवत्ता सँ अन्य प्रकारक परिणति सभक कारण मानव स्वास्थ्य पर विभिन्न खतरा देखाइत अछि ।

दोसर बात, जेना-जेना स्वास्थ्य विज्ञानक क्षेत्र मे नया-नया तकनीक सहितक इलाज आ स्वास्थ्य सम्बन्धी शोध व सामान्य स्वास्थ्य बारे जानकारी सब बढ़ैत जा रहल अछि, तहिना-तहिना बीमारी सभक नया-नया वैरिएन्ट्स (किस्म) सभक बारे सेहो पता चलैत जा रहल अछि ।

पहिने साधारण परहेज आ मुंहजबानी दबाइ सँ लोक खराब स्वास्थ्य पर नियंत्रण पाबि जाइत छल, मुदा आजुक समय छोट सन बीमारी वा स्वास्थ्य-समस्या लय केँ अस्पताल जायब त चिकित्सक सब पहिने बीमारी पता करय वास्ते भाँति-भाँति केर रक्त, पिशाब, थूक, खखार, काँची, गुज्जी, मैल, केश, रोइयाँ, मांस, मज्जा आदिक जाँच करता; फेर हुनकर हेल्थ साइंस रिलेटेड हाइ नाउलेज (ज्ञान) काज करतनि ।

फेर दबाइयो सभक निर्माण उपरोक्त जाँच अनुसारे बनायल गेल अछि, त कल्चर टेस्ट सँ पता लगेता जे एहि बुखारक ई वैक्टीरिया छैक, ओकरा कन्ट्रोल करय वास्ते फल्लाँ एन्टी-बायोटिक्स सूट करतनि, हिनका ई दबाइ दियौन, एतेक डोज दियौन, एतेक दिन धरि दियौन, आदि ।

हमर मातृभाषा मैथिली मे बीमारीक लौकिक अर्थ होइछ ‘मोन खराब’ – यानि मन ठीक नहि रहनाय, अस्वस्थ भेनाय, बीमार पड़नाय आदि कहल जाइछ । शारीरिक समस्या सँ मानसिक समस्या होयबाक विशद् अर्थ बुझी एकरा ।

शरीर मे थोड़-बहुत समस्या भेल, लोक बर्दाश्त कयलक, पचा लेलक, एतय धरि स्वास्थ्य बिगड़बाक बात नहि बुझल जाइछ । मुदा जखन मन खराब भ’ गेल त बाकी सब खराब – बीमार बुझैछ लोक । तेँ मिथिला लोकसभ्यता मे बीमार, बीमारी आदि सँ बेसी ‘मन खराब’ कहल जाइछ ।

मन खराबः मन कि थिकैक ?

मन मानव-अस्तित्वक एकटा अदृश्य अंग समान कहल जाइछ । दिमाग सँ काज लियह, हृदय केर भावना बुझू, मोनक बात बुझू – आदि कहैत समय ‘मन’ केर बात होइछ । विचार करयवला एक अदृश्य अंग केँ मन कहल जाइछ । मानसिक विचार, भावना, अनुभव आदि मानव आंगिक कार्य मे ‘मन’ केर गणना होइछ । तेँ मन खराब केर अर्थ भेल जे शरीर आ शारीरिक क्रिया-प्रतिक्रिया अनुकूल आ स्वाभाविक रूप सँ काज नहि कय रहल अछि ।

मन ठीक रखबाक उपाय

सादा आ सदाचार वला जीवन जिनाय, नियमित आहार-विहार कयनाय, समय सारिणी मे बेतरतीब दखल नहि देनाय, जहाँ तक हो – तेल, मसाला, नून, चीनी आदिक सीमित प्रयोग कयनाय, वातावरण केँ स्वच्छ रखनाय, साँस प्रक्रिया आ शारीरिक व्यायाम पर नित्य ध्यान देनाय, कर्मकांडीय आचरण जे वैदिक रीति अनुसार कहल गेल अछि तेकरा पालन कयनाय – ई सब साधारण बात थिक जाहि पर एक-एक व्यक्तिक ध्यान जेबाक चाही । केकरो संग जोर-जबर्दस्ती आ समय संग मजाक करब त एहि जीवन मे सुस्वास्थ्य कहियो नहि भेटत । बस, एतबे ध्यान राखू । बाकी, स्वास्थ्य सम्बन्धी लेख-विचार सब नित्य पढ़ैत रहू । आचरण मे सुधार आनू । बम बम महादेव !!

हम आइ एकटा आर्टिकल पढ़लहुँ –

“दर्द नहीं बल्कि ये 7 दिक्कतें देती हैं किडनी कैंसर का संकेत, जानिए कब डॉक्टर से मिलने में नहीं करनी चाहिए देरी”

ई ‘न्यूज २४’ पर जर्नलिस्ट सीमा ठाकुर केर लेख छल । किडनी आ कैन्सर – हमरा लेल एकटा डरावना टर्म थिक । हालहि अपन सहोदर छोट भाइ केँ असमय गमेलहुँ हम, ओहो किडनी सम्बन्धित बीमारी सँ ग्रसित भ’ गेल छल । तेँ, हम चौंकल लोकक सोझाँ ई आर्टिकल आयल, अपने सब सँ सेहो साझा कय रहल छी ।

Kidney Cancer Ke Lakshan: किडनी का कैंसर होने पर इसके लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है. यहां जानिए कैसे दिखते हैं किडनी कैंसर के लक्षण और इनकी कैसे करें पहचान.

Kidney Cancer Symptoms: किडनी शरीर को वो अंग है जिसमें दिक्कत आने लगे तो पूरे शरीर की सेहत बिगड़ सकती है. ऐसे में किडनी का कैंसर हो जाए तो शुरुआत में ही इसके लक्षण पहचानने जरूरी होते हैं. किडनी के कैंसर के लक्षण (Kidney Cancer Ke Lakshan) आमतौर पर साइलेंट होते हैं यानी जल्दी पहचान नहीं आते. आमतौर पर किडनी के कैंसर की शुरुआत में दर्द नहीं होता और जबतक दर्द होता है तबतक कैंसर कई हद तक बढ़ चुका होता है. ऐसे में यहां जानिए किडनी कैंसर के वो कौन से लक्षण हैं जिन्हें समय रहते पहचानना चाहिए और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

किडनी कैंसर के लक्षण कैसे दिखते हैं

पेशाब में खून नजर आना

पेशाब में खून (Blood In Urine) आना किडनी कैंसर का सबसे आम और साफ लक्षण है. अगर पेशाब का रंग गहरा नजर आता है, लाल दिखता है या कहें पेशाब में खून की बूंदे नजर आती हैं तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए.

लगातार वजन कम होना

अगर वजन बिना वजह कम होने लगता है या लगातार कम होने लगता है तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. कैंसर की सेल्स शरीर की ऊर्जा का इस्तेमाल करने लगती हैं जिससे वजन कम होता है.

भूख ना लगना

भूख में कमी आना या कहें भूख मर जाना कैंसर का लक्षण हो सकता है. किडनी में ट्यूमर होने पर मरीज की भूख मर जाती है.

खून में कमी

किडनी शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने वाले हार्मोन का निर्माण करती है. कैंसर होने पर यह प्रक्रिया बाधित होती है जिससे शरीर में खून की कमी होने लगती है.

पीठ के निचले हिस्से में गांठ

कमर के ठीक ऊपर गांठ बन जाती है और सूजन होने लगती है. यह ट्यूमर का संकेत हो सकता है.

थकान रहना

रात के समय पूरी नींद लेने के बाद भी अगर दिनभर शरीर में थकान रहती है, सुस्ती रहती है और कमजोरी महसूस होती है तो यह ट्यूमर (Kidney Tumor) का संकेत भी हो सकता है.

लगातार बढ़ने वाला बुखार

किडनी के कैंसर में बिना किसी बाहरी दिक्कत के बुखार आ सकता है. अगर लगातार हल्का या तेज बुखार रहने लगा है तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए. किडनी के कैंसर में आमतौर पर बुखार रात के समय आता है.

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

शरीर पर अगर किडनी कैंसर के यहां दिए लक्षण नजर आने लगे हैं तो यूरोलॉजिस्ट से मिलें. यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजीशयन सही जांच से यह कंफर्म कर सकते हैं कि कैंसर है या नहीं. अगर कोई भी दिक्कत 2-3 हफ्ते से ज्यादा बनी रहे तो इग्नोर ना करें.

सभक स्वास्थ्य नीक रहय ताहि शुभकामनाक संग !

हरिः हरः!!

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