सावधान मानव समाज
– प्रलय केर पुनरावृत्तिक तीव्र आशंका आ जोखिम बनले अछि
चीन दूतावास द्वारा जारी त्रासदीपूर्ण बाढ़िक मार्ग चित्र मे संलग्न अछि । चीन द्वारा देखायल गेल मार्गचित्र मे ग्लेशियर आ भूस्खलन सहितक बाढ़ि, ओहि उच्च हिमाद्रि क्षेत्र मे बनि रहल ‘हिमताल’ (प्राकृतिक डैम) संगहि मानव-निर्मित डैम, टनेल, आदिक उपद्रव भविष्य मे केना नहि दोहरायत – ई बुझू एकटा सचेत करयवला घटनाक्रम भेल ।
एखनहुँ धरि विभिन्न हिमताल सभक बारे मे आशंका आ सूचना आबि रहल अछि । एहि सँ आर वीभत्स घटना घटबाक आशंका जतायल जा रहल अछि । एहेन स्थिति मे मानव समाज सचेत रहय, सुरक्षित रहय, सब अपील मात्र कय सकैत अछि । राहत मे लागल लोक सब केँ सेहो फेर सँ नीचाँ भागवला क्षेत्र सँ हंटय लेल कहि देल गेल अछि ।
बाढ़ि क्षण मे क्षणाक कय देलक । बाढ़ि सँ जान बचाकय निकलल प्रत्यक्षभोगी-प्रत्यक्षदर्शी सभक मुंह सँ प्रलयंकारी बाढ़िक विवरण सुनिकय शास्त्र-पुराण मे चर्चा कयल गेल ‘महाप्रलय’ केर संछिप्त दर्शनक काव्य-वर्णन समान लगैत अछि ।
मन सँ उत्साह मानू हरा गेल अछि । तिमुरे, रसुवा, आदि विभिन्न बाजार सब जे कि क्षण भरि मे मट्टीपलीद भ’ गेल, बड़का-बड़का पहाड़ सब बाढ़िक चपेट मे आबि गेल, अनेक विस्फोट आ आकाश कारी रंग मे परिणत भ’ जेबाक, वन-जंगल मे गाछक सहारे अपन जान बचेनिहार गोटेक भाग्यशाली लोक बगल सँ नदीक बेतरतीब धार मे सैकड़ों लाश तैरैत निकलबाक दृश्य, कि दिन, कि राति – संघर्ष करैत कोहुना अपन जान बचेबाक बात सब जे पढ़ैत-सुनैत छी त मन दहैल जाइत अछि । एना बुझि पड़ैछ मानू हमरे आँखिक सोझाँ सँ ई सब दृश्य गुजैर रहल हो ।
हाथ जोड़िकय ईश्वर सँ प्रार्थना करबाक अतिरिक्त ईश्वरक खास दूत बनिकय नेपाली सेना आ देश-विदेशक सारा शक्ति द्वारा लोकक रक्षार्थ कयल जा रहल उपाय पर विश्वास रखैत सभक सुरक्षित हेबाक कामना कय रहल छी ।
बाढ़िक कारण – पूर्वसूचना मे देरी – चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र आदि नदीक मुहान पर ६० गिगावाट केर बिजली परियोजना, नेपाल सरकार द्वारा त्रिशूली नदी पर अनेकों हाइडेल प्रोजेक्ट निर्माण, सड़क-निर्माण आ पहाड़ मे विस्फोट करबैत पर्यटकीय क्षेत्रक विकास आदिक गतिविधि – ई सब किछु लोकमानस मे बड पैघ सवाल बनिकय ठाढ़ भेल अछि ।
ग्लोबल वार्मिंग आ पर्यावरण मैत्री मानव व्यवहार पर विश्व भरिक मानव समुदाय आ अन्तर्राष्ट्रीय शक्ति सभक बीच अनेकों गठबन्धन व सहकार्यक बात-विचार सब खुब सुनैत आबि रहल छी । मुदा एहि बीच कागज मे परिकल्पित घटना – यानि ग्लेशियर ब्लास्ट, भूकम्प-पराकम्प, पहाड़क-पहाड़ केर धराशायी होयब – फ्लैश फ्लड, मड-स्लाइडिंग (भू-स्खलन), वर्फक चट्टान सभक टूटब आ बहब, मानवीय संरचनाक अस्तित्व एहि महाप्रलयक आगाँ ‘शून्य’ होयब – ई सारा बात पहिने आशंका रूप मे पढ़ैत रही । लेकिन ई बाढ़ि एकर प्रत्यक्ष दर्शन करा देलक ।
पहिनेक लोक सब केँ देखी – खपड़ा या चारक घर मे रहैत बेसी जोर बरखा होइ त जोर-जोर सँ भगवान केँ चिकरल करय – “त्राहिमाम् – त्राहिमाम्”, आवाज-यज्ञ रूप मे ई लोकक रक्षा करैत छल ।
सावन मास मे लोक महादेवक विशेष सुमिरन कयल करय । विभिन्न स्थान पर सामुहिक यज्ञक आयोजन सब होइत छल । इन्द्र, वरुण, पवन, अग्निदेव, आदिक स्तोत्रगायनक संग हुनका सब केँ यज्ञ मे हविष्यक आहुति देल जाय । लोकक रक्षा होइक ।
आब देखैत छी जे सब किछु ‘पर्यटन’ आ सबटा देवता ‘टका-पैसा’ भ’ गेल अछि ।
एहेन स्थिति मे कैलाश मानसरोवर केर विशिष्ट क्षेत्र सँ प्रलयंकारी भूकम्प, भू-स्खलन, ग्लेशियर केर टूटब-बहब, पहाड़क-पहाड़ ध्वस्त होयब आ क्षणहि भरि मे गामक-गाम दहा जायब – ई सब किछु त संकेत कय रहल अछि । सावधान मानव समाज !!
हरिः हरः!!
