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चिट चोर विद्वान् हो सावधान – मिथिलाक विद्वत् परम्परा मे कलंकक टिका जुनि बने

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चिट चोर विद्वान् लेल चेतावनी

मिथिला विद्वानक भूमि रहल अछि । अनेकों द्रष्टाक नाम मिथिला इतिहास सँ जुड़ल अछि । मर्यादा पुरुषोत्तम राम आ कृष्ण-बलरामक मिथिलागमनक इतिहास त अछिये ।

सनातनकालीन शास्त्रीय सत्यक अन्वेषण आ वर्णन मे याज्ञवल्क्य, गौतम, अष्टावक्र, जनक, वाचस्पति, मंडन, उदयनाचार्य, भारती, भामती, गार्गी, मैत्रेयी, जानकी, अहल्या, आदिक नाम के नहि जनैछ । हिनका लोकनिक विद्वता मे पूर्णता आ सिद्धिक ओज भरल छल ।

आजुक संसार जखन पेट आ देह पाछाँ लोक बेहाल अछि, दर-दर भटैक रहल अछि, मिथिलाक विद्वान्-विदुषी सब छिड़ियायल अवस्था मे गोटेक बेंगलुरू त गोटेक अहमदाबाद, गोटेक वडोदरा त गोटेक नोएडा-गाजियाबाद, अर्थात् विभिन्न रोजी-रोटीक क्षेत्र मे बिखड़ल तिल जेकाँ भेटल करैत छथि ।

मिथिलाभूमिक माटि-पानि मे विद्वताक स्पर्श ओहिना भेटि गेल करैछ । गामक एकटा किसानो मे, मजदूर मे, पात खरड़यवाली मे, घास छिलयवाली मे… जेकरा-तेकरा मे विद्वताक दरस यथावत् होइत अछि ।

वर्तमान शिक्षा पद्धतिक दोष – चिट चोर विद्वानक लागि गेल अम्बार

वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था – कथित लोकतंत्र – परीक्षा मे चोरी आ गेस पेपर संगहि कोनो पुस्तक या शास्त्रक कपचल ज्ञान, अर्थात् सिलेबस मुताबिक मात्र तैयारी करबाक आ प्रतियोगिता परीक्षा सब पास कय केँ कोहुना नौकरी लय पेट-देह पोसबाक शिक्षा पद्धति सँ के नहि परिचित छी !

एहनो दुराबस्था मे मिथिलाक माटि-पानिक असैर सँ कतेको रास विद्वान् धरातल पर देखाइत छथि । डिग्रीक मोह सँ उपर, नौकरीक पाश सँ परे आ ज्ञान परम्परा पर पुरखाजनक अनुकरण करनिहार लोक देखाइत छथि ।

चिटचोरबा विद्वानक समाज विभाजनकारी कुचाइल बर्दाश्त योग्य नहि अछि

विद्वान् बनबाक आ कहेबाक उजमाइड़ चढ़ल गोटेक चिटचोरबा छात्र सँ दु टा टका कमायवला बुद्धि सँ सम्पन्न गोटेक साहित्यकार १३वीं शताब्दीक विद्वान् मीमांसक गंगेश मिश्रोपाध्यायक १७वीं शताब्दी मे जन्म भेल प्रसिद्ध तंत्र विद्याक साधक एवं मीमांसक मदनोपाध्याय केँ पिता-पुत्र हेबाक कुतथ्य प्रस्तुत करैत बड़का कहबैका विद्वान् हेबाक लौल करय लगैत छथि ।

ई दृश्य बड़ा भयावह अछि । आर त आर, ‘अनुमान’ आ ‘निगमन’ प्रकृया सँ एहि चिट चोर विद्वान् केँ बाप मरलाक ३ वर्ष बाद बेटाक जन्म हेबाक जिकिर मिथिलाक पंजी मे देखा जाइत छन्हि । खच्चर कहीं के ! एहेन-एहेन विद्वान् केँ त सार्वजनिक कार्यक्रम मे जुत्ताक माला पहिरा ई पूछल जाय जे रे खच्चर, तोहर अपन बापक ठेकान पंजी परम्परा सँ पता छौक ? आ विश्वास छौक जे यैह छथुन कि कतहु फेंटफांट भेल छौक ?

एहि तरहक विद्वानक पिठ्ठू विद्वान् सब सावधान होउ

एहेन चिट चोर विद्वान् सभक कृतित्व पर ताली ठोकनिहार गोटेक अन्य चिट चोर विद्वान् सब, जे सब ई देखबैत रहैत अछि जे हमर १० गोट किताब प्रकाशित भ’ गेल, हम एन्ना लिखलहुँ, हम ओना लिखलहुँ… आदि; ओहो सब एहि तरहक दुर्दान्त समाज विभाजकक उपद्रवी सोच केँ बिना बुझने-गनने आ निरीक्षण कएने खाली दुरुत्साहन मात्र जनैत अछि । ई चिट चोर विद्वान् व्यवस्थाक देन बुझू ।

जखन सिस्टमे मे कपचल ज्ञानाधारित पठन-पाठन रहत त फेर कतय सँ अक्षर ब्रह्म आ ईश्वरक अस्तित्व एवं ब्रह्माण्डीय सत्यक पराकाष्ठा पर पहुँचल व्यक्ति गंगेश मिश्रक सही जीवनी ताकि सकत । खैर…. एहेन पेटमधवा सभक पर्दाफाश करब आवश्यक अछि ।

मोन पड़ैत अछि, कोनो सभा मे राजा सलहेशक सन्दर्भक चर्चा मे एहने कुतथ्य भेटल छल, बर्दाश्त नहि भेल त टोकि देने रही ।

निष्कर्षः

यदि खोज अपूर्ण अछि त अपन कमजोरी केँ स्वीकार करैत कोनो दावी कयल करू । आ ई देखू जे अहाँ कोनो कुतर्क आ तथ्य सँ छेड़छाड़ नहि करैत छी । अन्यथा ई चिट चोर पद्धतिक विद्वता सँ मिथिलाक विद्वत् परम्परा बदनाम होयत आ अहाँ कलंकी सिद्ध होयब । सावधान !!

हरिः हरः!!

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