साक्षात्कारः मैलोरंग नई दिल्लीक निर्देशक प्रकाश झा संग मैथिली जिन्दाबाद सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरीक बातचीत
(डा. प्रकाश झा, मैलोरंग (नई दिल्ली) केर निर्देशक तथा दिल्ली मे होमय जा रहल आयोजना “मलंगिया महोत्सव २०२६” केँ अपार सफलता दिएबाक लेल अहर्निश खटनिहार व्यक्तित्व – मैथिलीक प्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया जीक समर्पित शिष्य संगहि मैथिली रंगकर्म केँ भारत संग-संग अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र मे ख्याति दिएनिहार मैथिलीसेवी संग मैथिली जिन्दाबादक सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरी केर बातचीत (साक्षात्कार) प्रकाशित कयल जा रहल अछि ।)
हम त अहाँ केँ अभियानी सेहो बुझैत छी आ अहाँक उपस्थिति-प्रस्तुति विभिन्न स्थान पर देखैत आबि रहल छी । हालहि मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२६ मुम्बइ मे सेहो भेंट भेल रही । अहाँक बात-विचार मे एक तरहक निरपेक्षताक अनुभूति सेहो होइत अछि । मैथिली नाट्यविधाक पुरोधा पुरुष मलंगिया सरक ५०वाँ सक्रिय सेवाक वर्ष केँ रेखांकन करैत मलंगिया फाउन्डेश बहुत विलक्षण प्रारूप तैयार कएने देखाइत अछि ।
विगत मे, २०१८ मे प्रत्यक्ष सहभागी रहैत बहुत नीक जेकाँ आयोजन हमहुँ देखने रही । ऋषि भाइ केर संयोजन सामर्थ्य डिजाइनर आइडियाक सेहो हम काफी प्रशंसक छी । मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशनार्थ अहाँ संग साक्षात्कार लेल हमर किछु सवाल केर उत्तर दी से अपेक्षा राखि रहल छी ।
प्रश्नः एहि बेर अहाँक दृष्टि मे ई आयोजन कतेक सफल होबय जा रहल अछि ?
प्रकाश झाः ई आयोजन एकटा अद्भुत परिकल्पना अछि । आइ तक विश्व मे कोनो एकटा नाटककारक एतेक रास नाटकक मंचन एक संग नहि भेल अछि, सेहो अपना आप मे एकटा विश्व रेकर्ड स्थापित करबाक दिश अग्रसर अछि । संयोग एहेन जे एहि आयोजन मे मात्र नाटकक आदमी नहि, नाटक, संस्कृति, कलाकर्मी आ साहित्य सँ जुड़ल, आ एतबे नहि, देश भरिक २२ भाषाक व्यक्ति एक संग ५ दिन एक कैम्पस मे उपस्थित रहताह । तेँ ई अपना आप मे एकटा अद्भुत योजना अछि । एकटा इहो जे सौंसे भारत मे आ नेपाल मे मैथिली रंगमंचक स्थिति केहेन अछि, तेकर परिचिति एहि आयोजन सँ एकठाम देखबाक अवसर प्राप्त होयत । एहि बेर देश मे मैथिली रंगमंच लेल काज कयनिहार प्रायः सब संस्था एकठाम उपस्थित हेताह आ अपन काज देखेताह, तेकर अवलोकन करबाक अवसर सब केँ भेटत । ई सब एक संग घटित होयत – से पहिल बेर, मैथिलिये मे नहि, ई सम्पूर्ण विश्व मे रंग-जगतक लेल एकटा अद्भुत महोत्सव होयत ।
प्रश्नः मैथिली भाषा-साहित्य मे नाटक केर महत्वपूर्ण इतिहास व स्थान अछि । मलंगिया महोत्सव सँ एहि विधा मे सक्रिय विभिन्न व्यक्ति व समूह केँ कि सब सकारात्मक आ सार्थक पक्ष भेटय जा रहल अछि ?
प्रकाश झाः ठीके कहल अछि जे मैथिली भाषा आ साहित्य मे नाटकक महत्वपूर्ण स्थान आ इतिहास अछि । ई कहबा मे कनियो असोकर्ज नहि जे मैथिली साहित्यक रचनाक जे उपलब्ध ग्रन्थ अछि से सब सँ पहिल ग्रन्थ नाटकके अछि, धूर्त समागम नाटक, ज्योतिरिश्वर जीक लिखल छन्हि, लगभग तेरहवीं शताब्दीक आसपास । तेँ एकर इतिहास तँ सब सँ पुरान अछि, बल्कि ई कहू जे गद्य साहित्य आ पद्य साहित्य मे सेहो नाटके सब सँ पहिल विधाक पुस्तक हमरा सभक बीच उपस्थित अछि । मलंगिया महोत्सव सँ एहि विधा मे सक्रिय विभिन्न व्यक्ति आ समूह केँ सेहो नाटकक प्रति आकर्षण बढ़तनि से निर्विवाद अछि । सकारात्मक पक्ष ई जे देश मे कार्य कयनिहार, मिथिला-मैथिली लेल काज कयनिहार जतेक विभिन्न संस्था अछि, खासकय रंगमंच सँ जुड़ल संस्था से एकठाम मंच पर उपस्थित भ’ रहल छथि । देखबा मे विगत कतेको साल सँ ई आबि रहल अछि जे मिथिला मे कोनो एहेन महोत्सव प्रायः नहि भ’ रहल अछि जाहि मे विभिन्न क्षेत्रक संस्थाक विभिन्न क्षेत्र मे नाटक लेल काज कयनिहार संस्था केँ आमंत्रित कयल जाय आ ओकर एकठाम मंचन होइक । एहेन महोत्सवक संख्या बहुत कम अछि । चेतना समिति वा कि किछु आन-आन महोत्सव एक-दुइ ठाम भ’ रहल अछि मुदा एहि स्तर पर विस्तार सँ प्रायः नहि भ’ रहल अछि । तेँ नाटकक संख्या सेहो कम भ’ रहल छैक । गाम-गाम मे पूजाक अवसर पर त नाटक होइत अछि, मुदा एना कोनो एकटा नाटकहि टाक फेस्टिवल हो, तेना नहि भ’ रहल अछि । त एहि आयोजन मे ओहि सब नाटकक संस्था केँ सेहो एकटा संजीवनी भेटतनि आ भेटलनि अछि एहि महोत्सव मे एबाक लेल । ई एकटा सार्थक पहल छैक जे संस्था सब जिवित भेल अछि जे एहेन संस्था सब तन-मन सँ बहुत दूर छलाह, एहि मलंगिया महोत्सवक बहन्ने एक बेर फेर सँ नाटक मे अग्रसर भेल अछि ।
प्रश्नः रंग विधा मे कलाकारक जीवन हमेशा कष्टमय देखला सँ हमरा सब बहुत बेसी हतोत्साहित रहैत छी । लेकिन एहेन स्तरीय आयोजन त एहि बात केँ गलत सिद्ध कय रहल अछि । मलंगिया सर जेहेन नाटककार केर ५० वर्षक सेवा त कहि रहल अछि जे एहेन बात गलत छैक । कि कहब अहाँ ?
प्रकाश झाः रंगविधा मे कलाकारक जीवन हमेशा कष्टमय देखल जाइत अछि, ई सिद्धान्त या एना कहनाय बहुत अनर्गल प्रलाप हमरा लागल अछि । देखू, कला कोनो होइ, कला हरदम आश्रित रहलैए, चाहे ओ चित्रकला होइ, चाहे ओ नाट्यकला होइ, चाहे ओ संगीतकला होइ – अपने देखैत होयब जे अदौकाल सँ ई कला आश्रित रहलैए, कोनो न कोनो राजा घराना वा प्रश्रय केर आधारे पर ई सब चलैत अछि, रंगविधा या रंगमंच विधा सेहो प्रश्रय सँ चलैत अछि । ई कला थिक, कला केँ जखन हम सब अपन अर्जन केर साधन बनाबय चाहैत छी, तखन बुझाइत अछि जे एहि मे जीवन कष्टमय छैक । कला केँ कला जेना रहक चाही, आ भरण-पोषण आ आर्जनक लेल दोसर विधा मे काज करी तखन अहाँ केँ ई चीज देखय मे नहि आयत । एहेन व्यक्ति जे कला सँ जुड़ल छथि ओ अपन उपार्जन दोसर विधा सँ करैत छथि, तखन कला मे अबैत छथि । कला एकटा समर्पण के चीज छैक – जेना साहित्य लेखन, काव्य लेखन । हमरा नहि लगैत अछि जे मिथिला मे कोनो एहेन लेखक हेता, साहित्यकार वा कवि या गीतकार जे केवल (मात्र) अपन ओही विधा सँ अपन घर अपन सब चीज चलबैत होइथ । सब कियो उपार्जन लेल दोसर काज करैत छथि आ जखन हुनका समय भेटैत छन्हि तखन अपन लक्षित कला या जाहि मे हुनका आकर्षण छन्हि ताहि कला ताहि साहित्य दिश बढैत छथि, त सैह स्थिति रंगमंच मे सेहो छैक । रंगमंच केँ मूल उपार्जनक क्षेत्र बनेनिहार लोकनि के जीवन कष्टमय अहाँ देखि सकैत छी, मुदा से नहि हेबाक चाही । कला त कला छियैक, ओ समर्पण केर चीज छियैक । ओहि सँ उपार्जन के अपेक्षा करनिहार व्यक्ति भ्रम मे रहैत छथि । उपार्जन कोनो आर विधा सँ होइक आ कला केँ अपन सिद्धान्त केर रूप मे, अपन शान्तिक लेल और समाज केँ किछु देबाक दृष्टि सँ जे लैत छथि से नीक सँ रहैत छथि । रहल मलंगिया महोत्सव मे एहेन नाटककार मे मलंगियाजी ५० वर्ष धरि एकर सेवा कयलाह, से ठीके मे बड पैघ बात छैक, मुदा दोसर पक्ष एकर इहो अछि जे मलंगिया जी नेपाल मे एकटा शिक्षकक रूप मे काज करैत छलाह जाहि सँ उपार्जन करैत हुनकर घर चलैत छलन्हि । लेकिन चूँकि ओ नाट्यविधा मे पारंगत छथि, नाट्यविधा मे हुनकर रुचि रहनि, नाट्यविधा मे लगातार ओ काज करैत रहलाह । ताहि द्वारे ई कहिकय दूर होयब जे एहि कला मे अर्थ नहि छैक, या ओकर जीवन कष्टमय होइत छैक, से अनर्गल अछि । एकर अर्थ ई भेल जे तकनीकी ज्ञानक अभावक कारणे लोक एहेन आरोप कोनो कला पर लगबैत छथिन, या लगेथिन । ताहि द्वारे अहाँ उपार्जन जेना मलंगिया जी अपन जीवनयापन शिक्षा विधा सँ कयलथि आ कला मे सक्रिय रहलाह तहिना सब व्यक्ति केँ करक चाही आ सोचक चाही ।
प्रश्नः दिल्ली केँ हम प्रेम सँ दिल्लीक दिलवाली भूमि कहल करैत छी । कारण ओतय सक्रिय बहुते रास संस्था, समूह, गूट, व्यक्ति – सब मे किछु न किछु रगड़धुस्स देखाइत रहल अछि हमरा । दहेज मुक्त मिथिला, मिथिला राज्य निर्माण सेना, मैथिली महायात्रा, मैथिली साहित्य महासभाक स्थापना व संचालन आ हाल धरिक सक्रिय योगदान – सब मे रायसिना हिल वला राजनीति सन्हियाअल भेटैत रहल अछि । मलंगिया महोत्सव २०२६ मे सेहो पोपसाहेब सभक राजनीति त कतहु सक्रिय नहि न अछि ?
प्रकाश झाः दिल्ली त देशक राजधानी थीके, आ से राजनीतिक राजधानी थिक, आर्थिक राजधानी नहि थिक । ई राजनीतिक राजधानी थिक पूरा भारतदेशक । ताहि द्वारे एतय जँ कोनो चीज मे राजनीति होइत छैक त ओकरा सकारात्मके लेल जाय । ई त एतय के, इन्द्रप्रस्थ केर समय सँ एतय रहल अछि जे दिल्ली मे रहनिहार राजनीति मे पारंगत होइत छथि, या राजनीति करैत छथि । आ एहिठाम रायसीना हिल वला राजनीति नहि सन्हियायत सेहो नहि भ’ सकैत अछि । कियैक त बढियें कहलहुँ अछि जे ई राजनीतिक राजधानी थिक भारतदेशक । तेँ राजनीति त रहबे करतय । मलंगिया महोत्सव मे सेहो पोपसाहेब सभक राजनीति कतहु न कतहु सक्रिय त रहबे करतनि, लेकिन हमर सभक लक्ष्य ई अछि जे राजनीति रहय, हर जगह राजनीति रहय, अपना जगह राजनीति रहय – मुदा राजनीति सँ हमर सभक जे कलाक दृष्टि अछि या कलाक लक्ष्य अछि से प्रभावित नहि हुअय । राजनीति के बिना त कोनो काज सम्भव नहि होइत अछि, लेकिन सकारात्मक राजनीति रहय । ताहि मे ई नीक बात अछि जे मलंगिया महोत्सवक कर्ता-धर्ता ऋषि कुमार मलंगिया कोनो राजनीतिक लोक नहि छथि आ न हुनका राजनीति मे कोनो रुचि छन्हि, नहिये ओ कोनो गुटबाजी मे रहैत छथि आ हमहुँ सब वैह प्रयास मे छी जे रंगमंच जे छैक से ओ पोपबाजी कला सँ बचल रहय । इहो आयोजन मे लगय त अछि, हमरो लगय अछि जे राजनीति चलि रहल छैक, अन्दर तक चलि रहल छैक राजनीति ।
प्रश्नः मैलोरंग केर यात्रा सेहो उल्लेखनीय समयान्तराल पूरा कयलक अछि । अपन अतीतक यात्रा, वर्तमान आ भविष्यक योजना बारे मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक लेल किछु जानकारी दी ।
प्रकाश झाः अहाँ सभक आशीर्वाद आ शुभकामना सँ मैलोरंग ठीके उल्लेखनीय काज कयलक अछि । मैलोरंगक लेल एकटा सुखद छैक जे एकर अध्यक्ष स्वयं मलंगिया जी छथिन । आ हुनके सलाह सँ – हुनकहि देखरेख सँ मैलोरंग निरन्तर काज कय रहल अछि । वर्ष २००६ मे मैलोरंगक परिकल्पना हम सब कएने रही, एहिठाम दिल्ली मे १४ फरवरी २००६ केँ प्रथम नाटकक आयोजन श्रीराम सेन्टर मे भेल छल । आ तहिया सँ निरन्तर मैलोरंग निरन्तर काज करैत आबि रहल अछि । मैलोरंग अतीत मे जे सब काज कयलक से योजनाबद्ध तरीका सँ – जेना हम किछु उदाहरण दी, जे प्रथम मैथिली आधुनिक नाटक जीवन झा लिखित ‘सुन्दर संयोग’ केँ मानल गेल छैक । ई १९०५ ई. मे लिखल गेल छलैक । आश्चर्यक बात ई जे एखन तक ओहि नाटकक मंचन नहि भेल छलैक, केवल लिखित नाटक केँ प्रथम मैथिली आधुनिक नाटक मानि लेल गेल छलैक । मैलोरंग ई जिम्मेदारी उठेलक आ ओकर मंचन कयलक । धूर्त समागम नाटक जे ज्योतिरिश्वर द्वारा लिखल गेल अछि, ओना त एकर बहुते बेर मंचन भेल छैक, मुदा मैलोरंग ओकरो मंचन दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राजधानीक हृदयस्थल मंडी हाउसक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालयक प्रांगण मे कयलक । ओकर बाद, अहाँ केँ जनतब अछिये जे विद्यापति केँ कविकोकिलक उपाधि मिथिला मे भेटल छन्हि, मुदा विद्यापति तीन टा नाटक लिखने छथि आ ओकर मंचन आइ तक नहि भेल, मैलोरंग तेकरो भार उठेलक आ मणि-मञ्जरि नाटकक मंचन कयलक । त एहि प्रकारे मैलोरंग लगातार सक्रिय अछि । भारतहि टाक नहि विश्वहि केर सब सँ पैघ नाट्य महोत्सव – प्रतिष्ठित नाट्य महोत्सव भारत रंग महोत्सव मे आइ धरि मैथिलीक एकहु टा नाटकक ओहि मे मंचन नहि भेल छल । मैलोरंग केँ नाटक ‘आब मानि जाउ’ केँ पहिल बेर एहि महोत्सव मे प्रवेश भेटलैक आ एकर मंचन भेलैक । तेकरा बाद ‘धूर्त-समागम’ केर सेहो एहि महोत्सव लेल चयन भेलैक, ओकरो मंचन भेलैक । तेकरा बाद एखनहिं हम सब सीताक जीवन पर आधारित नाटक “जनकनन्दिनी” केर मंच एहि भारंगम महोत्सव मे कयलहुँ । मैलोरंग लगातार सक्रिय अछि आ काज कय रहल अछि । इहो बताबी जे आइ दिल्ली मे बहुत रास संस्था रंगकर्म-रंगमंचक भ’ गेल छैक, प्रायः सब संस्थाक जे प्रमुख छथि ओ व्यक्ति कतहु न कतहु मैलोरंग सँ जुड़ल रहला अछि, ओतहि सँ प्रशिक्षण लेलाह अछि, आ नाटकरत क्षेत्र मे नीक काज सेहो कय रहल छथि । ताहि द्वारे मैथिली भाषा मे प्रथम मैथिली नाटकरत रैपर्टरीक दर्जा सेहो मैलोरंग केँ प्राप्त भेलैक । लगभग सैकड़ों कलाकार एहिठाम सँ प्रशिक्षित भ’ कय अपना-अपना क्षेत्र मे स्थापित छथि, नीक जेकाँ नाटकविधा सँ जुड़ल छथि, आ अपन एकटा अस्तित्व कायम कयलनि अछि । सिनेमा जगत मे सेहो बहुत रास कलाकार मैलोरंग सँ प्रशिक्षण प्राप्त कयलाक बाद नीक काज कय रहल छथि, देखार काज कय रहल छथि । ई हमरा कहैत बहुत खुशी भ’ रहल अछि जे देशक कोनो एहेन नाट्य प्रशिक्षणक संस्था नहि अछि जाहिठाम मैलोरंग मे काज कयनिहार बच्चाक चयन नहि भेल अछि, चाहे ओ फिल्म टेलिविजन सेन्टर पुणे होइ, चाहे हैदराबादक ड्रामा डिपार्टमेन्ट होइ, चाहे नेशनल स्कूल अफ ड्रामा होइ, चाहे भारतीय नाट्य एकेडमी लखनऊ, चाहे त्रिचूर के ड्रामा स्कूल होइ, चाहे मध्यप्रदेशक ड्रामा स्कूल होइ, चाहे मुम्बइ मे ड्रामा सँ जुड़ल संस्थान होइ – मैलोरंग मे काज कयनिहार व्यक्तिक चयन भेल छन्हि आ लगातार प्रशिक्षण लय रहल छथि । त ई उपलब्धि मैलोरंगक रहलैक अछि । एहिना मैलोरंग आगुओ काज करत । एकर आर बहुत रास महात्वाकांक्षी योजना सब छैक । ताहि दिश हम सब सक्रिय छी । लगातार आइ १९ वर्ष सँ मिथिला रंग महोत्सव मैलोरंग करैत अछि, ऐगला वर्ष बीसम साल मे ‘सफरनामा’ नाम सँ आयोज करत । एहि मे मैलोरंग सँ जे सब जुड़ला अछि हुनका सब केँ एकठाम मंच पर आमंत्रित कयल जेतनि, गपशप कयल जेतनि । एहिना एकटा महात्वाकांक्षी नाटक छैक – मिथिला सौर्यगाथा ‘कन्दर्पी घाट’, ओकर मंचनक योजना छैक । प्रकाशन क्षेत्र मे सेहो मैलोरंग बहुत नीक कयलक अछि । अहाँ सभक संग-सहयोग सँ ई आर महत्वपूर्ण काज होइत रहतैक ।
प्रश्नः अन्त मे, मलंगिया महोत्सव केर सफलताक शुभकामना दैत छी । एहि वर्ष हम अनुपस्थित रहब से मोन उदास अछि । मुदा लाइव देखब । ई समस्त मैथिलीभाषी लेल केना-केना देखायल जायत, कोन पेज सँ, से सब किछु जानकारी दी ।
प्रकाश झाः अहाँ त प्रायः सब आयोजन मे महत्वपूर्ण रूप सँ उपस्थित रहैत छी आ ओकर विस्तार मैथिली जिन्दाबाद पर दैत रहैत छियैक, ताहि सँ जे व्यक्ति उपस्थित नहि भ’ पबैत छथि हुनका सब केँ सुनबाक-देखबाक सौभाग्य मैथिली जिन्दाबाद मार्फत सँ भेटैत छन्हि । अहाँ रहितहुँ त हमरा सब केँ आर नीक लगितय, लेकिन कोनो बात नहि, अपन व्यस्तताक कारण नहि आबि रहल छी । लेकिन शुभकामना दियौक । कार्यक्रमक सब प्रस्तुति लाइव जरूर देखब । बाकी आशीर्वाद दियौक जे अहाँक अनुज सब निरन्तर एहिना ऊर्जाशील भ’ कय मैथिलीक काज करैत रहथि ।
उपरोक्त साक्षात्कार सँ स्वतः स्पष्ट अछि जे अपन मिथिलाक एक-एक सपूत मे कतेक गहींर-गम्भीर सोच-सिद्धान्त आ समर्पण अछि । सब अपन क्षेत्र मे उच्च सँ उच्चतर योगदान दैत अछि । प्रकाश झाक निर्भीक स्वर मे सब सवालक जबाब काफी प्रेरणादायक लागल । आशा अछि जे मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक केँ सेहो नीक लगतन्हि आ एहि साक्षात्कार केँ ओ बेसी सँ बेसी लोक धरि प्रेषित – साझा कय केँ मैथिलीक एकटा पुण्य कार्य अवश्य करताह ।
हरिः हरः!!

5 Comments
बहुत बहुत आभार 🙏
नीक इंटरव्यू। ज्ञानवर्धक। ।
बहुत बहुत आभार
सकारात्मक सोचब आ ओकर अनुरूपेँ बिना कोनो भेद-भावक स्पष्टताक संग काज करब, प्रकाश जीक जीवनशैली छनि। अहाँक साक्षात्कार एकरा आर पुष्ट केलक अछि।
ई अनेक विधामे कार्य करैत छथि से विशिष्ट, मुदा नाट्यकलाक ई डॉक्टरे छथि।
पहिलुको महोत्सव सफल रहलनि अछि आ इहो रहतनि, से सभकेँ विश्वास छैक।
अग्रिम शुभकामना।
अहाँ दुनू गोटेक वाद संवाद नीक लागल… मैथिली नाटकक लेल एतेक रास बात अहाँ सभक अंतस सं जगजियार भेल से नीक लागल… मलंगिया जीक नाटक तं मैथिलीक जान थिकबे करी… अहूँ सभक ई संवाद ओहि कार्यक्रमक प्रतिस्थापना मे मदद करत तकर मंगलकामना।
कुमार विक्रमादित्य