साक्षात्कारः अंजनी कुमार चौधरी संग मैथिली जिन्दाबाद सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरीक वार्ता
अंजनी कुमार चौधरी मूल रूप सँ दरभंगा जिलाक हयाघाट प्रखंड अन्तर्गत बसहा मिर्जापुर गामक निवासी छथि । वर्तमान में सिंगापुर में एगो मल्टीनेशनल बैंक में वाईस प्रेसिडेंट केर रूप में कार्यरत छथि । पूज्य पिता श्री माया शंकर चौधरीक संस्कार, साहित्यिक चेतना आ सांस्कृतिक वातावरण सँ प्रेरित अंजनी जी वर्ष 2013 सँ सिंगापुर मे सपरिवार रहि रहल छथि । विदेश मे रहितो मैथिली भाषा, मिथिला संस्कृति आ बिहारी समाज केँ संगठित करबाक दिशा मे निरंतर सक्रिय छथि । “BiJhar”, “Maithili Society Singapore”, “संस्कार भारती बिहार प्रदेश” तथा “अष्टदल फाउंडेशन” सन मंच सभक माध्यम सँ सामाजिक, सांस्कृतिक आ शैक्षणिक गतिविधि मे उल्लेखनीय योगदान दऽ रहल छथि । मिथिला कला, लोकसंस्कृति, मिथिलाक्षर, नव पीढ़ीक सांस्कृतिक जागरण तथा पारिवारिक-सामाजिक मूल्य-मान्यता केँ जिबित रखबाक दिशा मे हुनकर कार्य प्रवासी समाज लेल प्रेरणास्रोत बनि रहल अछि ।
मैथिली जिन्दाबाद वेब पत्रिकाक सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरी आ अंजनी कुमार चौधरी बीच भेल बातचीतक अंशः
1) सब सँ पहिने ई कहू जे अहाँ सिंगापुर मे कतेक वर्ष सँ रहि रहल छी आ एहि तरहक प्रेरणा कतय सँ भेटल जे निजत्वक सेवाकार्य करब हम मानव लेल अत्यन्त जरूरी अछि ?
अंजनीः हम वर्ष 2013 सँ सिंगापुर मे सपरिवार रहि रहल छी । विदेश आबि कऽ जीवनक बहुत नव अनुभव भेल, मुदा एहि दूरी मे अपन माटि, भाषा आ संस्कृतिक प्रति लगाव आर गहींर होइत चलि गेल । हमरा अपन बचपने सँ घरमे साहित्य, संगीत, लोकसंस्कृति आ सामाजिक चेतनाक वातावरण भेटल । पूज्य पिताजी श्री माया शंकर चौधरी आ कक्का जटा शंकर चौधरीक सृजनशीलता, गीत-संगीत आ सांस्कृतिक समर्पण हमरा जीवन पर गहींर प्रभाव छोड़लक ।
ई स्वीकार करय मे कोनो संकोच नहि जे सामाजिक चेतनाक आरम्भिक प्रेरणा अहाँ (आदरणीय प्रवीण नारायण चौधरी जी) सँ सेहो भेटल । हम जखन मैथिली समाज आ सांस्कृतिक गतिविधि सब केँ नजदीक सँ देखनाइ-बूझनाइ शुरू कयलहुँ, तखन अपनेक सक्रियता, समर्पण आ मैथिली लेल सतत संघर्ष हमरा बहुत प्रभावित कयलक । वास्तव मे हम सब जे पाछाँ-पाछाँ चलबाक प्रयास क रहल छी, ताहि पथ केँ प्रशस्त करबाक बहुत पैघ योगदान प्रवीण जी सन लोकक रहल अछि । मैथिली जिन्दाबादक माध्यम सँ ओ वर्षों सँ भाषा, समाज आ संस्कृति लेल जे सतत चेतना जागृत करैत आबि रहल छथि, से निश्चय प्रेरणादायक अछि ।
हमरा सदिखन ई बुझाइत रहल जे मनुष्य जँ केवल अपन व्यक्तिगत सफलता धरि सीमित भऽ जाए, तँ जीवन अधूरा भऽ जाइत छैक । समाज, भाषा आ संस्कृति लेल योगदान देब सेहो मनुष्यक नैतिक दायित्व थिक । एहि भावनासँ प्रेरित भऽ कऽ हम विदेश मे रहितो मैथिली, मिथिला आ बिहारी समाज केँ जोड़बाक प्रयास करैत आबि रहल छी ।
सिंगापुर मे “BiJhar” सँ जुड़बाक अवसर भेटल । “BiJhar” मूलतः बिहार आ झारखंडक लोकसभकेँ एक संयुक्त मंच पर जोड़बाक कार्य करैत अछि । एहि क्रम मे बहुत रास मैथिल परिवार सँ भेंट-घाँट भेल आ ई अनुभूति भेल जे सिंगापुर मे मैथिली समाज बहुत सशक्त संख्या मे उपस्थित अछि, लेकिन संगठित मंचक आवश्यकता अछि । एहि सोच सँ “Maithils in Singapore” केर शुरुआत भेल । हमरा बहुत प्रसन्नता अछि जे आब “Maithils in Singapore” आधिकारिक रूप सँ “Maithili Society (Singapore)” के नाम सँ सिंगापुर मे पंजीकृत सामाजिक संस्था बनि गेल अछि ।
एहि संस्था सभक माध्यम सँ बहुत रास सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक गोष्ठी, पारिवारिक मिलन आ नव पीढ़ी केँ अपन जड़ि सँ जोड़बाक कार्य करबाक अवसर भेटल । हमरा लेल “हम मैथिल छी” केवल एकटा परिचय नहि, बल्कि आत्मिक गर्वक अनुभूति अछि । हम सदिखन मानैत छी जे “मैथिली हमर संस्कृति अछि”, आ जँ भाषा, लिपि, लोकपरंपरा आ सांस्कृतिक मूल्य केँ नव पीढ़ी धरि नहि पहुँचाएब तँ धीरे-धीरे अपन अस्मिता कमजोर भऽ जाएत ।
संगहि “संस्कार भारती बिहार प्रदेश” संग कार्य करबाक अनुभव सेहो अत्यन्त प्रेरणादायक रहल । भारतीय कला, संस्कृति आ लोकपरंपरा केँ समाजक बीच जिबित रखबाक जे व्यापक दृष्टिकोण संस्कार भारतीक अछि, ओ हमरा सोच केँ बहुत प्रभावित कयलक ।
हमर सांस्कृतिक यात्रा मे मिथिलाक्षर अभियान सेहो अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान रखैत अछि । वर्ष 2000 सँ “दूर्वाक्षत” द्वारा चलाओल जा रहल मिथिलाक्षर अभियान, जे आदरणीय पंडित कौशल झा जीक मार्गदर्शन मे निरंतर संचालित भऽ रहल अछि, ओ मिथिलाक सांस्कृतिक पुनर्जागरणक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रयास बुझाइछ । हम स्वयं मिथिलाक्षर मे प्रवीण छी आ एहि लिपिक संरक्षण आ प्रचार-प्रसार लेल निरंतर प्रयासरत छी । सिंगापुर सहित देश-विदेशक अनेको मैथिल आ गैर-मैथिल भाषाभाषी लोक केँ मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान सँ जोड़बाक अवसर भेटल अछि । हमरा विश्वास अछि जे भाषा केवल बोली मात्र सँ जिबित नहि रहि सकैछ, बल्कि ओकर लिपि सेहो ओकर आत्मा होइछ । मिथिलाक्षर केवल लेखन प्रणाली नहि, बल्कि मिथिलाक हजारों वर्षक पुरान ज्ञान, संस्कृति आ परंपराक जिबित धरोहर बुझैत छी ।
2) निजदेश सँ एतेक दूर निजभाषी अथवा निजराज्यक ‘अप्पन लोक’ संग जुड़बाक कि सब लाभ होइछ ?
अंजनीः विदेश मे “अप्पन लोक” केर महत्व बहुत पैघ भऽ जाइत अछि । जखन अपन मूल गाम-ठाम सँ कियो हजारो किलोमीटर दूर रहैछ, तखन अपन भाषा मे बात करब, अपन लोकगीत सुनब, अपन पर्व मनायब – ई सबटा आत्मिक सुख आ शान्ति देल करैछ । ई केवल सांस्कृतिक गतिविधि टा नहि, बल्कि मानसिक आ भावनात्मक आधार सेहो बनि जाइछ ।
“Maithili Society Singapore” आ “BiJhar” केर माध्यम सँ एतय मैथिल आ बिहारी परिवार सभ एक-दोसरक सुख-दुःख मे सहभागी बनैत छथि । विदेश मे केकरो बीमार पड़ला पर, पारिवारिक कठिनाइ आबि गेलापर, बच्चा सभक शिक्षा अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम करय मे, हरेक क्षेत्र मे लोक एक-दोसराक सहयोग लेल तत्पर रहैत छथि । एहि प्रकारक जुड़ाव विदेश मे “विस्तारित परिवार” केर अनुभूति दैत अछि ।
विदेश मे बच्चा सभ बहुत जल्दी वैश्विक संस्कृति सँ प्रभावित भऽ जाइत अछि । एहेन मे जँ हम सब बच्चा सबकेँ अपन भाषा, लोककथा, संगीत, पाबनि, मिथिलाक्षर आ परंपरा सँ नहि जोड़ब, तँ ओ सब धीरे-धीरे अपन जड़ि सँ कटि जायत । एहि कारणे सामूहिक मंच सभक भूमिका बहुत महत्वपूर्ण भऽ जाइत अछि ।
हमरा विशेष प्रसन्नता एहि बातक अछि जे लगभग 12-13 वर्ष पहिने जेकरा सब केँ छोट-छोट बच्चा रूप मे देखैत छलहुँ, आइ ओहि धिया-पुता मे सँ कतेको उच्च शिक्षा अथवा नौकरी मे अछि, मुदा अखनो मैथिल संस्कार नहि छोड़ने अछि । आइयो ओ सब भेंट भेला पर गोर लागिकय प्रणाम करैत अछि, अपन गाम-घरक चर्चा करैत अछि तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम सबमे सक्रिय भूमिका सेहो निभबैत अछि । ई सब देखिकय हमरा बहुत आत्मिक संतोष भेटैत अछि । आश्वस्त होइत छी जे रोपल बिया सुन्दर उपजा दय रहल अछि ।
मैथिली समाजक महिला लोकनि व बच्चा सब जखन आपसमे भेटैत अछि तँ हुनका बीचक आत्मीयता, अपनापन आ सांस्कृतिक संवाद एहि प्रयास सभक सबसँ पैघ उपलब्धि बुझाइत अछि ।
3) सिंगापुर मे अपने प्रवासी लोकनिक गृहिणी एवं धियापुता लेल सेहो एहि तरहक प्रयासक केहेन लाभ भेटैत छन्हि ?
अंजनीः हमरा बुझने एहि प्रयास सभक सबसँ पैघ प्रभाव गृहिणी आ बच्चे सबपर पड़ैत अछि । विदेशक जीवन बहुत व्यस्त आ सीमित दायरा वाला होइत अछि । एहेन स्थिति मे सांस्कृतिक आ सामाजिक आयोजन लोक सब केँ मानसिक, भावनात्मक आ पारिवारिक रूप सँ जोड़ि कऽ रखैत अछि । आइ सिंगापुर मे हमरा सभ संग करीब 80-100 मैथिली परिवार सक्रिय रूप सँ जुड़ल छथि, आ धीरे-धीरे ई एकटा विस्तारित परिवार जेकाँ बनि गेल अछि ।
हमरा सभक प्रयास रहैत अछि जे बच्चा सब केवल पढ़ाइ धरि सीमित नहि रहय, बल्कि अपन भाषा, संस्कृति आ कला सँ सेहो जुड़ल रहय । एहि कारण बच्चा सब मैथिली नाट्य मंचन, मैथिली गीत-संगीत, लोकनृत्य आ सांस्कृतिक कार्यक्रम सबमे सक्रिय सहभागिता करैत अछि । जखन धिया-पुता मंच पर मैथिली मे संवाद बजैत अछि, गीत गबैत अछि अथवा मिथिलाक परम्परा सभक प्रदर्शन-प्रस्तुति दैछ, तँ बहुत आत्मिक संतोष भेटैत अछि । ई सब ओकरा लोकनिक भितरका आत्मविश्वास आ सांस्कृतिक गौरवबोध केँ जगबैत अछि आ जिम्मेदार सन्तति बनबैत अछि ।
महिला लोकनि सेहो एहि सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरणक प्रमुख आधार होइत छथि । वट सावित्री, चौरचन, सामा-चकेबा आदि पारंपरिक पाबनि सबपर महिला लोकनि एकत्रित भेल करैत छथि आ अपन परम्परा केँ जिबित रखैत छथि । एकरा अतिरिक्त एक-दोसराक घर सत्यनारायण पूजा, पारिवारिक मांगलिक कार्यक्रम अथवा छोट-छोट धार्मिक आयोजन सबमे सम्मिलित भेनाय एतय बहुत सामान्य बात अछि । विदेश मे रहितो एहि प्रकारक मेल-मिलाप अपन गाम-घर जेकाँ आत्मीय वातावरण बना दैत अछि ।
हमरा बुझने एहि प्रकारक सामूहिक जुड़ावक सबसँ पैघ उपलब्धि ई अछि जे बच्चा सब केवल “Indian” रूप मे नहि, बल्कि गर्व सँ “हम मैथिल छी” कहब सिखि रहल अछि । ओ सब अपन भाषा, अपन लोकगीत, अपन संस्कार आ अपन जड़ि केँ चिन्हि रहल अछि । महिला सभक आपसी आत्मीयता, बच्चा सभक सांस्कृतिक सहभागिता आ परिवार सभक नियमित मेल-मिलाप, ई सबटा मिलिकय सिंगापुर मे एकटा जिबन्त मैथिली परिवेशक निर्माण कएने अछि ।
4) बहुमंजिली इमारत केर एकान्त जीवनशैली आ सिंगापुर जेहेन अनुशासित शासन प्रणाली वला देशक आम जीवनशैली – केहेन अनुभव भेटि रहल अछि ? अपन देशक याद कतेक अबैत अछि ?
अंजनीः सिंगापुर अत्यन्त अनुशासित, स्वच्छ आ व्यवस्थित देश अछि । एतय समय, नियम आ नागरिक जिम्मेदारी केँ बहुत महत्व देल जाइत अछि । सार्वजनिक जीवन मे अनुशासन, स्वच्छता, ट्रैफिक व्यवस्था, समयक पालन आ नागरिक कर्तव्यक प्रति सजगता वास्तव मे प्रशंसनीय अछि । एतय रहि कऽ बहुत सकारात्मक बात सीखबाक अवसर भेटैत अछि ।
सिंगापुरक एकटा विशेषता ई सेहो अछि जे एतय बहुसांस्कृतिक (Multi-cultural) आ बहुभाषिक (Multi-lingual) समाज अत्यन्त संतुलित रूप सँ संगहि रहैत अछि । अलग-अलग भाषा, धर्म आ संस्कृति सँ जुड़ल लोक सभ आपसी सम्मान आ अनुशासनक संग जीवन व्यतीत करैत छथि । एहि प्रकारक सामाजिक समावेश आ सामूहिक जिम्मेदारी देखिकऽ बहुत प्रेरणा भेटैत अछि ।
एतुका समाज केवल सरकार पर निर्भर नहि रहैत अछि, बल्कि प्रत्येक नागरिक अपन दायित्व बुझैत अछि, चाहे ओ साफ-सफाई हो, सार्वजनिक सम्पत्तिक संरक्षण, समयक सम्मान अथवा सामाजिक अनुशासन । एतय रहि कऽ बेर-बेर मोन मे ई विचार अबैत अछि जे जँ हमरा देश आ समाजक लोक सेहो एहि प्रकारक अनुशासन, स्वच्छता आ नागरिक जिम्मेदारी केँ अपन जीवनशैलीक हिस्सा बना लेत, तँ भारतक विकासक गति आर तीव्र भऽ सकैत अछि । ई अनुभव हमरा भीतर निरंतर प्रेरणा जगबैत अछि जे समाजक प्रगति लेल केवल सरकार नहि, बल्कि प्रत्येक नागरिकक जागरूकता आवश्यक अछि । जँ हम सब छोट-छोट नियम आ सामाजिक अनुशासन केँ अपन जीवन मे स्थान दी, तँ देश अवश्य प्रगतिक मजबूत पथ पर आगाँ बढ़त ।
लेकिन विदेशक जीवन मे एक प्रकारक एकान्तता सेहो अछि । बहुमंजिली इमारतक जीवन मे ओ सहज आत्मीयता कम भेटैत अछि जे अपन गाम-घर मे स्वाभाविक रूप सँ होइत अछि । गामक चौपाल, खेत-खरिहान, बिना सूचना ककरो घर पहुँचि जाएब, पाबनि मे सामूहिक उत्साह, लोकक अपनपन, ई सभ बहुत याद अबैत अछि ।
विदेश मे रहि कऽ अपन देशक माटिक महत्व और गहिराइ सेहो बुझाइत अछि । मैथिली गप-सप्प, विवाह गीत, सामा-चकेबा, छैठ पूजा, मिथिलाक भोजन, ई सब केवल परंपरा नहि, बल्कि भावनात्मक पहचान अछि । एहि कारण विदेश मे रहितो मन सदिखन अपन गाम, अपन लोक आ अपन संस्कृति सँ जुड़ल रहैत अछि ।
5) मिथिलाक पाबनि आ बिहारी समाज द्वारा आर कोन-कोन अवसर पर ‘गेट-टुगेदर’ करय जाइ छी ओतय ?
अंजनीः सिंगापुर मे बिहारी आ मैथिली समाज बहुत सक्रिय अछि । “BiJhar” द्वारा मकर संक्रांति (तिला संक्रांति), होली, दीपावली, छैठ पूजा आदि पर्व सामूहिक रूप सँ मनाओल जाइत अछि । पाछिला दू वर्ष सँ “BiJhar Cultural Confluence” केर आयोजन सेहो कयल जा रहल अछि, जाहि मे सम्पूर्ण बिहार आ झारखंडक सांस्कृतिक विरासत केँ एक मंच पर प्रस्तुत करबाक प्रयास होइत अछि । एहि कार्यक्रमक उद्देश्य केवल प्रवासी समाज नहि, बल्कि सम्पूर्ण सिंगापुर समाज केँ बिहार-झारखंडक समृद्ध लोकसंस्कृति सँ परिचित करेनाइ अछि ।
“Maithili Society Singapore” द्वारा पाछिला तीन वर्ष सँ माता जानकीक प्राकट्योत्सव “जानकी नवमी महोत्सव” रूपेँ मनाओल जा रहल अछि । संगहि बाबा विद्यापतिक पुण्यतिथि पर “विद्यापति समारोह” सेहो आयोजित होइत अछि । एहि वर्ष सँ “मैथिली महोत्सव” केर व्यापक आयोजन करबाक योजना पर कार्य चलि रहल अछि ।
एहि अतिरिक्त मैथिली परिवार सभ अपन विशुद्ध पारंपरिक पर्व-त्योहार, जेना बरसाइत, सामा-चकेबा, मुंडन, जनेऊ, ब्राह्मण भोजन आदि सेहो सामूहिक रूप सँ करैत छथि । सुख-दुःखक अवसर पर सेहो मैथिल समाज एक-दोसराक सहयोग लेल तत्पर रहैत छथि । एहि प्रकारक आत्मीयता विदेश मे अपन संस्कृति केँ जीवित रखबाक सबसँ पैघ शक्ति थिक ।
6) गाम मे सेहो अहाँ प्रत्येक वर्ष किछु न किछु कार्य करिते टा छी । सक्रिय जीवनशैलीक लाभ अहाँ केँ बुझल अछि एना लागि रहल अछि हमरा । संगहि बीच-बीच मे पूज्य पिताजीक सृजनशीलता केँ सेहो विभिन्न ढंग सँ प्रकाशन-प्रचार-प्रसार करब अपन उद्देश्य बनबैत देखेलहुँ अहाँ केँ । अपन निजी जीवन आ मैथिल संस्कार बीच तादात्म्य बैसेबाक सन्दर्भ मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक लेल आर कि सब कहय चाहब ?
अंजनीः हमरा लेल जीवनक अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहि, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कार, संस्कृति आ सृजनशीलता केँ आगाँ बढ़ेनाइ सेहो अछि । हमरा सदिखन ई अनुभव होइत रहल अछि जे जँ मनुष्य अपन जड़ि सँ जुड़ल रहैत अछि, तँ ओकर जीवनक दिशा सेहो संतुलित रहैत छैक । एहि कारण विदेश मे रहितो मन सदिखन अपन गाम, समाज आ सांस्कृतिक आधार सँ जुड़ल रहबाक प्रयास करैत रहल अछि ।
पूज्य पिताजी श्री माया शंकर चौधरीक गीत-संगीत, साहित्य आ सांस्कृतिक योगदान हमरा लेल धरोहर समान अछि । हुनकर गाओल गीत सभ केँ “अनुगूँज” माध्यम सँ लोकक बीच पहुँचेबाक प्रयास कयल जा रहल अछि, जाहिसँ नव पीढ़ी सेहो ओहि सृजनशील विरासत सँ परिचित भऽ सकय । हमरा बुझने सांस्कृतिक धरोहर केवल पुस्तक अथवा स्मृति धरि सीमित नहि रहबाक चाही, बल्कि ओ समाजक बीच जीवित रहबाक चाही ।
संगहि अपन दादाजी स्वर्गीय हरि चौधरी आ स्वर्गीय चतुर्भुज चौधरी द्वारा नाटक आ रामलीला क्षेत्र मे कयल गेल योगदान केँ सेहो समाजक बीच अनबाक प्रयास चलि रहल अछि । हमरा दादाजी सब 1940 सँ 1960 केर दशक मे “सत्यनारायण नाटक कम्पनी” केर माध्यम सँ भारतक विभिन्न क्षेत्र मे घूमि-घूमि रामलीला आ नाटकक मंचन करैत छलाह । ओहि समय मे एहि प्रकारक सांस्कृतिक यात्रा बहुत कठिन छलैक, लेकिन समाज मे कला आ संस्कृति लेल हुनक समर्पण अद्भुत छल । स्वर्गीय चतुर्भुज चौधरी स्वयं अत्यन्त समृद्ध हारमोनियम वादक छलाह । शायद हुनके कृपा आ संस्कार अछि जे आइयो हमरा सभक परिवार कला, संगीत, साहित्य आ संस्कृति सँ निरंतर जुड़ल रहैत अछि आ स्वाभाविक रूप सँ ओहि दिशा मे आकर्षित होइत अछि ।
हमर पूरा परिवार एहि सांस्कृतिक यात्रा मे सहभागी अछि । पुत्र अभिनव भारतीय शास्त्रीय संगीत, गायन आ हारमोनियम वादन माध्यम सँ अपन प्रतिभा केँ निखारि रहल छथि । पुत्री आन्या चित्रकला आ सितार वादन मे रुचि राखैत छथि । पत्नी तनुजा मिथिला चित्रकला सहित विभिन्न कला क्षेत्र मे अपन योगदान दऽ रहल छथि । हमरा बुझने परिवारे संस्कृति केर पहिल विद्यालय होइत अछि । जँ घर मे भाषा, संगीत, साहित्य आ संस्कार जीवित रहत, तँ समाज स्वतः मजबूत रहत ।
पैछला किछु वर्ष मे हमरा भीतर ई भावना आर प्रबल भेल जे विदेश मे संस्कृति जागरणक प्रयास अपेक्षाकृत सरल भऽ रहल अछि, कारण ओतय लोक अपन जड़ि सँ जुड़बाक लेल स्वतः उत्सुक रहैत छथि । लेकिन अपन मूल समाज, गाम आ स्थानीय परिवेश मे धीरे-धीरे सामाजिक आ सांस्कृतिक बिखराव बढ़ैत जा रहल बुझाइछ । लोक आधुनिकता मे आगाँ बढ़ि रहल अछि, जे आवश्यक सेहो छैक, मुदा संगहि-संग अपन जड़ि कमजोर भेल जा रहल छैक से चिन्ताक विषय लगैछ । हमरा बेर-बेर ई अनुभूति भेल जे जँ जड़िये कमजोर भऽ जायत, तँ चाहे हम विदेश अथवा भारतक अन्य क्षेत्र मे कतबो कार्य किऐक न करी, अन्ततः मूल पहिचान कमजोर पड़ि जायत । से नहि हेबाक चाही ।
एहि भावनाक संग “अष्टदल फाउंडेशन” केर स्थापना वर्ष 2024 मे कयल गेल । अष्टदलक मूल उद्देश्य केवल कार्यक्रम करब नहि, बल्कि बच्चा सब, युवा पीढ़ी आ परिवार सबकेँ कला, संस्कृति, साहित्य, संगीत आ संस्कार सँ जोड़नाइ अछि । वर्तमान मे लगभग 200 बच्चा केँ विभिन्न कला विधा मे निःशुल्क प्रशिक्षण देबाक प्रयास चलि रहल अछि । संगीत, गायन, चित्रकला, अभिनय, लोकसंस्कृति, श्लोक, मंच संचालन आदि माध्यम सँ बच्चा सभ केँ आत्मविश्वास आ सांस्कृतिक चेतना सँ जोड़बाक प्रयास भऽ रहल अछि ।
एहि क्रम मे “मिथिला कला उत्सव” केर परिकल्पना सेहो बहुत महत्वपूर्ण रहल अछि । लगातार दू वर्ष सँ एहि उत्सवक सफल आयोजन संस्कार भारती बिहार प्रदेश द्वारा कयल जा रहल अछि । एहि मंचक उद्देश्य मिथिलाक लोककला, संगीत, नृत्य, साहित्य आ सांस्कृतिक विरासत केँ समाजक बीच पुनः जीवित रूपेँ स्थापित करब अछि । हम सब कुटुंब प्रबोधन केर पंच प्रण केर संग समाज निर्माणक काज मे आगाँ बढ़ि रहल छी, एहि उत्सव मे केवल कलाकारक प्रस्तुति नहि होइत अछि, बल्कि बच्चा, महिला, युवा आ पूरा परिवार एक संग जुड़ैत अछि । हमरा लेल ई केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहि, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरणक एक प्रयास अछि ।
संगहि सार्वजनिक स्तर पर श्रीमद्भागवत कथा, धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन, लोकसंस्कृति आधारित कार्यक्रम, बाल-संस्कार गतिविधि आदि माध्यम सँ सेहो समाज केँ जोड़बाक प्रयास निरंतर चलि रहल अछि । हमरा विश्वास अछि जे संस्कृति केवल मंचीय प्रस्तुति सँ जीवित नहि रहैत अछि, बल्कि सामूहिक सहभागिता, संस्कार आ पारिवारिक वातावरण सँ जीवित रहैत अछि ।
अन्त मे हम अपन “Maithili Society”, “BiJhar” आ समस्त सामाजिक-सांस्कृतिक परिवारक सदस्य सभ केँ हृदय सँ धन्यवाद दियय चाहब । हुनका सभक सहयोग, समर्पण आ आत्मीय सहभागिता बिना एहि प्रकारक कोनो प्रयास संभव नहि भऽ सकैत अछि । हम जानि-बुझि किनको विशेष नाम नहि लऽ रहल छी, कारण ई सम्पूर्ण समाजक सामूहिक यात्रा छी । समाज निर्माणक एहि श्रृंखला मे जे-जे लोक अपन समय, श्रम, भावना आ सहयोग दैत छथि, वास्तविक सम्मानक अधिकारी ओ सब गोटे छथि ।
मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक सब सँ हम एतबे कहय चाहब जे आधुनिकता अवश्य अपनाउ, दुनिया घूमू, सफलता प्राप्त करू, लेकिन अपन मातृभाषा, संस्कृति आ जड़ि केँ नहि छोड़ू । “हम मैथिल छी” ई केवल परिचय नहि, बल्कि गर्व, संस्कार आ आत्मिक चेतनाक उद्घोष अछि । “मैथिली हमर संस्कृति अछि” ई भाव जँ नव पीढ़ी धरि जिबित रहत, तँ निश्चित रूप सँ मिथिलाक आत्मा सदिखन जिबित रहत ।
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अंजनी जी संग ई साक्षात्कार अपने केँ केहेन लागल, अपन प्रतिक्रिया कमेन्ट बौक्स मे अवश्य राखब । धन्यवाद !! मैथिली जिन्दाबाद पर अपन साक्षात्कार प्रकाशित करबेबाक लेल व्हाट्सअप नम्बर +9779801722981 पर सम्पर्क करी । अंजनी जी समान प्रेरणादायक व्यक्तित्व – कोनो क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान कयनिहारक स्वागत । – मैथिली जिन्दाबाद!!

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मुंबई मैथिली साहित्य अयोजन के लेल मैथिली भाषा प्रेमी विनोद सरकार जीओर प्रभु मिश्रा जी के बहुत बहुत धन्यवाद सबसे बड़का खुशी के बात अछि जे मिथिला स 2000 किलो मिटर मुम्बई में मैथिली साहित्य के लेल उत्सुक् छी हमसब गोटे मिलकर 30 महिने अयोजन भो रहल अछि अहि के लेल कहा सब मैथिली साहित्य कवि लोकनिओर श्रोतागण ढेर सारी बधाई शुभ कामनाएं