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मुंबई साहित्यिक बैसारक सार्वजनिक काव्यगोष्ठी (त्रिंशम्) सफलतापूर्वक सम्पन्न

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मुम्बई, १४ जून २०२६ । मैथिली जिन्दाबाद!!

 
मुंबई साहित्यिक बैसारक तत्वावधानमे आयोजित सार्वजनिक काव्यगोष्ठी (त्रिंशम्) अत्यन्त गरिमामय, उत्साहपूर्ण आ सफल वातावरणमे सम्पन्न भेल। एहि अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ तथा नवोदित कवि-रचनाकार सभ अपन-अपन उत्कृष्ट रचनाक प्रस्तुति दऽ श्रोतागणक मन मोहि लेलनि।

कविता, गीत, गजल, हास्य-व्यंग्य तथा विभिन्न साहित्यिक विधाक माध्यम सँ मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृतिक चेतनाक अनुपम अभिव्यक्ति देखबाक अवसर भेटल। कार्यक्रममे साहित्यिक विमर्श, भाषिक चेतना आ सांस्कृतिक सरोकारक विषय पर सेहो सार्थक संवाद सम्पन्न भेल।

एहि सफल आयोजन लेल हम सभ आदरणीय श्री विनोद जी सरकार, समस्त मुंबई साहित्यिक बैसार परिवार, सहभागी कविगण, साहित्यप्रेमी सज्जन तथा उपस्थित श्रोतृवृन्दक प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापन करैत छी। अहाँ सभक सक्रिय सहभागिता, सहयोग आ उत्साहे एहि कार्यक्रम केँ अविस्मरणीय सफलताक शिखर धरि पहुँचेबाक कार्य कएलक।

मातृभाषा केवल संवादक माध्यम नहि, बल्कि अपन संस्कृति, परम्परा, इतिहास, लोकजीवन आ अस्मिताक मूल आधार होइत अछि। जे समाज अपन मातृभाषाक सम्मान करैत अछि, ओ अपन सांस्कृतिक जड़िसँ सदिखन जुड़ल रहैत अछि।

आइ आवश्यकता अछि जे हम सभ अपन सन्तति आ नवपीढ़ी केँ मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृतिक धरोहरसँ परिचित कराबी। घर-परिवारमे मैथिली भाषाक व्यवहार बढ़ाबी, बाल-बच्चा सभ केँ मैथिली पढ़बाक, लिखबाक आ बजबाक लेल प्रेरित करी। एहि प्रयाससँ हम सभ अपन अमूल्य भाषिक आ सांस्कृतिक सम्पदाक संरक्षण कऽ सकब।

मुंबईक कर्मभूमिमे रहितो मिथिलाक भाषा, साहित्य आ संस्कृतिक संरक्षण तथा संवर्द्धन लेल जे निरन्तर प्रयास भऽ रहल अछि, से निश्चयहि प्रशंसनीय अछि। आशा करैत छी जे भविष्यतमे सेहो एहन साहित्यिक आयोजनक माध्यम सँ मैथिलीक ज्योति आओर प्रखर रूपेँ प्रज्वलित होइत रहत।

एहि सफल आयोजनमे सहभागी समस्त कविगण, साहित्यकार, आयोजक तथा श्रोतागण केँ पुनः हार्दिक बधाई, शुभकामना आ साधुवाद।

मातृभाषाक संरक्षण मात्र कर्तव्य नहि, बल्कि अपन अस्मिता, अपन पहचान आ अपन सांस्कृतिक विरासत प्रति श्रद्धाक प्रतीक अछि। आउ, हम सभ मिलिकऽ मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार आ संवर्द्धन लेल संकल्पित होई, जाहिसँ आगामी पीढ़ी अपन जड़ि आ संस्कृतिसँ सदैव जुड़ल रहय।

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