लेख विचार
प्रेषित: अंजू झा आर्या
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय: #बरसाइत_पावनि: मिथिला मे एकर महत्व ओ विशेषता
मिथिलाक सांस्कृतिक ओ आध्यात्मिक परंपराक एकटा अनुपम धरोहरि आ विशेष पावनि थीक बरसाइत। ई धार्मिक अनुष्ठाने मात्र नै अपितु मिथिलाक स्त्री लोकनिक के अपन कुल-परंपरा आ संस्कार सं जोड़ि के रखबाक एकटा माध्यम सेहो छी बरसाइत पावनि।
ज्येष्ठ मासक अमावस्या तिथि के सम्पूर्ण मिथिला मे खूब आनंद ओ उल्लास सं एहि पावनि के स्त्री लोकनि मनबैत छथि।
नव विवाहिता लेल इ पावनि कोनो उत्सव सं कम नै!नव साड़ी-लहठी आ गहना-गुरिया सं सजल-धजल हुनकर मुखराविन्द देखबा जोग रहै’ए। पतिक उत्तम स्वास्थ्य ओ दीर्घायुक संग अटूट सुखद दांपत्यक कामना लेल बड़’क गाछ मे सूत बान्हि ओकरा बियै’न होंकै छथि।ब’रक गाछ मे शीतल जल ढारि ओकरा सिंचित करै छथि।
कथा अनुसारे सती सावित्री आ सत्यवान क अटूट प्रेम ओ निष्ठा सं जुड़ल अछि बरसाइत पावनि। अपन वाक-चातुर्य ओ दृढ़ संकल्प सँ अपन पति,सत्यवानक आयु यमराज सँ मांगि लेलनि। कहल जाइ’ए यैह ब’रक गाछ त’र ठाढ़ भए सत्यवानक प्राण के रक्षा केलैन। एहि दिन सभ अहिबाती स्त्री लेल ब’रक गाछ के पूजा करबाक विधान अछि।
- वस्तुतः दीर्घायु,विस्तृत, सब सँ बेशी प्राण’वायु देनिहार इ ब’रक गाछ अद्भुत,अनूप आ महान अछि।पताल धरि पैसल जड़ि ओ हरियर पात प्रकृतिक ई अनुपम वरदान ब’रक गाछ के पूजा एकर अक्षयता के दरशाबैत अछि।मैथिल ललनाक सोहाग के ओहिना अटल आ भरल-पुरल रखबाक प्रतीक छी।
बरसाइत पावनि अखनहु मिथिलाक परंपरा आ संस्कृति के जीवन्त रखने अछि। स्त्री लोकनि मे अपन निष्ठा,भक्ति आ दृढ़ संकल्प सँ अनेको दुख बाधा के परास्त करबाक अद्भुत क्षमता छन्हि। पति- पत्नी अगाध, अटूट प्रेमक इ बरसाइत पावनि सोहागक संग संग प्रकृतिक अनमोल धरोहरि गाछ-बिरिछक संरक्षण करबाक सेहो संदेश दै’त अछि।
