लेखक: अशोक कुमार दास, वसुहाम, बहेड़ा, दरभंगा ।
महान् शिक्षा विद् डा० लक्ष्मण झा जी क जीवनी प्रस्तुत कय रहल छी ।
महान् शिक्षा विद् , हिन्दी , मैथिली , अंग्रेजी क साहित्यकार आ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी डा० लक्ष्मण झा जी क जन्म बिहार राज्य क दरभंगा जिला क किरतपुर प्रखण्ड अन्तर्गत ” रसियारी ” गाम में ऐगो कुलीन ब्राह्मण परिवार में 05.09.1916 ई० में भेल छलैन्हि ।
हिनकर बचपन क नाम ” लखन ” आ ” चन्द्र नारायण झा ” छलैन्हि । हिनक पिताजी क नाम “कारी झा “आ माता जी क नाम ” कीर्ति देवी ” छलैन्हि ।
डा0 लक्ष्मण झा क प्रारम्भिक शिक्षा अपन गाम में प्रसिद्ध विद्वान पंडित रमानाथ झा जी क सानिध्य में भेल छलैन्हि । सन् 1937 ई० में मधेपुर उच्च विद्यालय , मधेपुर सँ एंट्रेस (मैट्रिक) आ सन् 1939 ई० में टी० एन० बी ० कॉलेज , भागलपुर सँ इन्टरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण भेलाह । सन् 1941 ई० में पटना कॉलेज , पटना सँ स्नातक (संस्कृत ऑनर्स ) प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कय ” स्वर्ण पदक ” प्राप्त कयलन्हि । आ ओकरा बाद आगाँ क पढ़ाई हेतु लंदन चलि गेलाह आ सन् 1949 ई० लंदन विश्वविद्यालय अन्तर्गत स्कूल ऑफ ऑरिएंटल एण्ड अफ्रीकन स्टडीज सँ ” मिथिला आ मगध (सन् 700- 1100 ई० धरि ) ” विषय पर अपन शोध (पी० एच० डी० ) क मानध उपाधि प्राप्त कयलन्हि ।
अपनें पढ़ाई में एतेक उत्कृष्ट छलाह जे कि हुनका प्राच्य (पूर्वी) आ पाश्चात (पश्चिमी) दूनू विद्या क प्रकाण्ड विद्वान मानल जाईत छलैन्हि । अपनें ऐगो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर क प्रतिष्ठित विद्वान छलाह ।
सन् 1942 ई० क आन्दोलन क कारणें हिनक स्नातकोत्तर क पढ़ाई बाधित भय गेल छलैन्हि ।
डा० लक्ष्मण झा जी महज 11 वर्ष क आयु में ही स्वतंत्रता आन्दोलन में कुदि पड़लाह आ सन् 1942 ई० क भारत छोड़ो आंदोलन में अपनें सक्रिय आ अग्रणी भूमिका निभौलन्हि , जाहि लेल हुनका जेलो जाय पड़लैन्हि , जाहि कारणें हुनक स्नातकोत्तर क पढ़ाई सेहो बाधित भय गेलैन्हि ।
बिहार में तँ एम०ए० में नामांकन तँ भेल छलैन्हि, मुदा एम०ए० कम्प्लीट नहि भेल छलैन्हि । सन् 1947 ई० में इंगलैण्ड गेला क बाद सीधे पी०एच०डी० करबा लेल अनुमति मांगलैन्हि , बिना एम० ए० वाला छात्र क लेल इन्टरव्यू हेतु पैनल बनाओल गेल तकरा बाद ” डा0 केनेथ केडिंगश ” के निर्देशन पर सन् 1949 ई० में अपनें ” मिथिला आ मगध ” विषय पर शोध पूरा कयलन्हि ।
डा० लक्ष्मण झा बचपनें सँ ही सांसारिक आ भौतिक चीज सँ विरक्त छलाह , बावजूदो सन् 1927 ई० में जखन अपनें मात्र 11 वर्ष क छलाह हिनक परिवार क दबाव पर विवाह क लेल जाईत छलाह तँ आधा रास्ता में मौका देखि हाथी क पीठ पर सँ कुदि कय भागि गेलाह आ आजीवन अविवाहित रहलाह ।
डा० लक्ष्मण झा जी आजादी क बाद अपनें ऐगो सक्रिय जन-आंदोलनकारी क रूप में अपन पहिचान बनौलैन्हि आ सन् 1952 ई० में ऐगो अलग ” मिथिला राज्य क स्थापना ” क लेल ब्यापक आन्दोलन क नेतृत्व कयने छलाह । अपनें मैथिली भाषा , साहित्य आ संस्कृति क पहिचान क बढ़ावा दय क लेल जीवन भरि काम कयलन्हि ।
सन् 1942 ई० क आन्दोलन में जखन डा0 राजेन्द्र र्कें गिरफ्तार कय लेल गेल छलैन्हि तँ अगस्त क्रांति क नेतृत्व क लेल डा० लक्ष्मण झा कें बिहार प्रदेश आंदोलन कमिटि क महासचिव बनाओल गेल छलैन्हि । हिनक नेतृत्व में सचिवालय पर झंडा फहरेबाक घटना आ एहि में पुलिस फायरिंग सँ सात छात्र क मौत क बाद पूरा बिहार अगस्त क्रांति में कुदि पड़ल । झंडा फहरावय में हिनको नाम छलैन्हि मुदा संयोग वश सचिवालय पर झंडा फहरेबाक नियारल दिन हिनका अचानक बहुत तेज बुखार सँ शरीर तपैत रहबाक कारणें ओ स्वयं ओहि अभियान में भागि नहि लय सकलाह आ बाल- बाल बचि गेलाह । ओकरा बाद हिनका मलेरिया बुखार भय गेलैन्हि आ गाम आवय पड़लैन्हि आ गामो में बैसल नहि रहलाह आ ब्रिटिश सरकार सँ टक्कर लैत रहलाह अन्ततः ब्रिटिश सेना ओहि ठाम सँ निकलि गेल आ ब्रिटिश सेना क गेलाक बाद डा० लक्ष्मण झा स्वतंत्र जनता राज क घोषणा कय देलैन्हि आ एक मास धरि विरौल क्षेत्र में ब्रिटिश राज पूर्ण तरहें खत्म भय जनता राज कायम रहल जकर देखरेख स्वयं करैत छलाह । बाद में पुनः ब्रिटिश सत्ता क पुर्नस्थापित भय गेल जाहि कारणें गिरफ्तार होय क कारणें नेपाल चलि गेलाह मुदा मुखबिरी क कारणें हुनका नेपाल सँ गिरफ्तार कय भागलपुर जेल भेजि देल गेलैन्हि । आ स्वतंत्रता प्राप्ति क बाद वो जेल सँ छुटलाह आ सरकार क छात्रवृत्ति पर सन् 1947 ई० में आगू पढ़य वास्ते इंगलैंड चलि गेलाह ।
सन् 1949 ई० में भारत वापस अयला पर सन् 1949 ई० सँ सन् 1952 ई० धरि तक पटना क काशी प्रसाद जयसवाल शोध संस्थान में ” उप निदेशक ” क पद पर कार्य कयलन्हि । डा0 लक्ष्मण झा महान् समाजवादी मिथिला सोसलिस्ट पार्टी क संस्थापक सेहो छलाह । सन् 1952 ई० में समाजवादी दल क टिकट पर चुनाव लड़लाह मुदा पार्टी क नेता सभक षडयन्त्र आ कुटिल चालि कें कारण हारि गेलाह । ओकरा बाद राजनीति सँ सन्यास लय लेलाह । आ जीवन क लम्बा समय तक एकांत मौन साधना आ ग्रन्थ क रचना में बितौलैन्हि ।
अपनें जीवन भरि ब्रह्मचारी रहलाह आ ऐगो अपरिग्रही संत क सादा जीवन व्यतीत कयलन्हि । ओकरा बाद सी० एम० कॉलेज में सन् 1952 ई० सँ सन् 1954 ई० धरि व्याख्याता क पद कार्य कयलन्हि संगहि ” मिथिला ” साप्ताहिक पत्रिका क प्रकाशन सेहो आरंभ केलाह । एकटा प्रखर लेखक क तौर पर नेता सभक ऐतैक आलोचना कयलन्हि जे हिनका नौकरी सँ निकालि देल गेलैन्हि ।
डा० लक्ष्मण झा यैह चाहितो छलाह । आ ओहि समय क प्रमुख अखबार ” द इण्डियन नेशन ” में सन् 1963 सँ सन् 1972 ई० धरि हुनक 130 लेख छपल , मुदा अखबार कें कांग्रेसी रझान क कारण करार टुटि गेल ।
गाम में हिनका लगभग 43 बीघा जमीन रहितो अपन लेखि छापि अपन गुजर-बसर करैत छलाह । सन् 1977 ई० में जरवन कर्पूरी ठाकुर बिहार क मुख्यमंत्री बनलाह तखन डा० लक्ष्मण झा कें मिथिला विश्वविद्यालय क कुलपति बनय क आग्रह कयलन्हि । हिनक आग्रह पर डा0 लक्ष्मण झा कुलपति बनय हेतु अपन किछु अकल्पनीय शर्त रखलैन्हि जे हम वेतन नहि लेब , आ नहि सरकारी आवास वा सरकारी गाड़ी क उपयोग नहि करब आ अपन नित्य संध्या- वंदन आ धार्मिक क कर्मानुसार कार्यालय में समय देब । आ वो एहि शर्त पर सन् 1977 ई० सँ सन् 1978 ई० धरि मिथिला विश्वविद्यालय क कुलपति क पद पर आसीन रहलाह आ अपनें विश्वविद्यालय में अनुशासन कायम कयलन्हि संगहि वर्ग नहि लय वाला शिक्षक कें वेतन रोकि दैत छलाह । वाद में ओतुका दूषित राजनीति आ शिक्षक क असहयोग क कारणें क्षुब्द भय अपन पद सँ त्यागपत्र दय देलैन्हि ।
डा० लक्ष्मण झा जी हिन्दी , मैथिली , संस्कृत आ अंग्रेजी भाषा में 50 सँ अधिक पुस्तक क रचना कयलन्हि जे निम्नवत अछि । यथा, हिन्दी भाषा में रचित पुस्तक निम्न अछि । *लंदन , हिन्दी , ब्रह्म और ब्राह्मण , दुर्दशा , स्वराज्य और भारत , मुसलमान कालीय मिथिला , कोशी , दोष और दुःख , ब्रह्मपाद , भारत क्या करे , दोषी कौन , दिल्ली कथा , संकट , पृथ्वी माता ।
मैथिली भाषा में रचित पुस्तक निम्न अछि ।
मिथिला , मिथिलाक इतिहास , भारत क रक्षा , सज्जन चरित , लोक ओ वेद , प्राचीन कथा , धर्म कथा ।
संस्कृत भाषा में रचित पुस्तक (जे अप्रकाशित ग्रंथ अछि ) * भाववेदः , लोक वृत्तम , अर्थ सिद्धि : , राजनीति , ब्रह्म विहारः , काल कथाः ।
अंग्रेजी भाषा में रचित पुस्तक निम्न अछि ।
* Mithila And Magadha , Home And world. , Poltics. , Philosophy. , Economics , World on Fire. , God And Man. , Man And Nature , Democratic Dictatorship. , Man And God , Life And Times. , Politics And Problems. , Wilderness And Light. , Bred For Bedlam. , War On Life. , Heven is Here. , Where To Go? , Work And Wages. , Price of Prosperity , Good Bye. , Freedom :- Roots And Faces. , Time to Die. , Fear of Life. , Cry Help. , The Wild , Heroes And Lime light. , Grapes And Sour , No Nonsense Rhyme. , Thoughts & Comments , The Brahmana .
अपनें कौटिल्य चाणक्य क ” अर्थशास्त्र ” क तर्ज पर ” अर्थ सिद्धि ” नामक प्रसिद्ध ग्रंथ सेहो लिखलैन्हि छथि । सन् 1950 ई० सँ 1952 ई० क दौरान हिनक आठ पुस्तक में नेहरू प्रशासन क आ अंग्रेज क नीति क आलोचना छल जाहि कारणें तत्कालीन सरकार (नेहरू जी द्वारा )द्वारा हिनक पुस्तक कें प्रतिबंधित कय देने छल ।
डा० लक्ष्मण झा जी कें जे सम्मान मिलल अछि निम्न प्रकार अछि ।
(1) सन् 1941 ई० में पटना कॉलेज, पटना सँ स्नातक (संस्कृत प्रतिष्ठा) परीक्षा में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कयने छलाह आहिनका प्रतिष्ठित सम्मान ” स्वर्ण पदक ” प्रदान कयल गेल छलैन्हि ।
(2 ) अपनें बिना एम० ए० कयने अपन विलक्षण प्रतिभा क बल पर लंदन विश्वविद्यालय क ” स्कूल ऑफ ऑरियन्टल एण्ड अफ्रीकन स्टडीज ” सँ सीधे पी०एच० डी० क मानद अकादमिक योग्यता आ उपाधि हासिल कयने छलाह ।
(3 ) आधुनिक युग क गिनल – चुनल विद्वान में शामिल होयक कारणें हिनक पुरातत्व संबंधी शोध व्याख्यान क कतेको वेरि ” बी० बी ० सी० ” लंदन द्वारा प्रसारित कय सम्मान कयने छल ।
(4 ) हिनक “सादा जीवन, उच्च विचार ” ब्रह्मचर्य आ अद्वितीय त्याग पूर्ण जीवन शैली क कारणें जनता आ विद्वान हिनका ” मिथिला क गाँधी ” क मानद उपाधि सँ विभूषित कयने छथि ।
(5) हिनक स्मृति कें जीवंत राखय क वास्ते ” डा0 लक्ष्मण आ फाउंडेशन ” द्वारा एहि सम्मान क शुरुआत कयल गेल अछि । ई सम्मान क तहत शिक्षा आ बच्चा क कल्याण क क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करय वाला शिक्षक आ संस्था (जेना पोथी घर फाउंडेशन ) कें सम्मानित कयल जाईत अछि ।
(6) हिनक जयंती आ विभिन्न समारोह क अवसर पर देशक प्रवुद्ध शिक्षा विद् द्वारा भारत सरकार सँ डा० लक्ष्मण झा जी कें मरणोपरान्त ” पद्म श्री सम्मान ” दय केरि पुरजोर मांग लगातार कयल जा रहल अछि ।
डा० लक्ष्मण झा जी क निधन अपन पैतृक गाम रसियारी में 83 वर्ष क आयु में 22.01.2000 ई० कय भय गेलैन्हि । ऐहेन महान् शिक्षाविद् , महान् साहित्यकार आ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी कें हमर कोटि-कोटि प्रणाम, वंदन आ नमन करैत छियैन्हि ।
हिनका विषय में हमरा जे जानकारी छल प्रस्तुत कयलहुँ अछि । अपनें लोकनि सँ आग्रह जे अपन सुझाव अवश्य देव जाहि सँगलती वा त्रुटि कें सुधारि सकी । एहीक संग अपनेंक शुभेच्छुक , अशोक कुमार दास , ग्राम- बसुहाम, पो० – बहेड़ा , जि०- दरभंगा (बिहार ) मो० नं० –6201973668
डा लक्ष्मण झा जीवनी
6 भ्यूज
