Search

स्वतंत्रता दिवस सभ भारतीयक हृदय मे गर्व आ सम्मानक भावना जागृत करैत अछि

1009 भ्यूज

लेखनीकेँ धार –

लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- राखी : रक्षा सूत्र केर बन्हन

स्वतंत्रता दिवस – समस्त भारतीय लेल गरिमामय दिवस

15 अगस्त हमर राष्ट्रकेँ इतिहासक सबसँ महत्वपूर्ण आ गौरवपूर्ण दिन छी। 1947 मे एहि दिन भारतकें दीर्घ संघर्ष, अनगिनत बलिदान आ अथक प्रयासक बाद विदेशी शासन सँ मुक्ति भेटल। ई मात्र राजनीतिक आजादीक क्षण नहि छल, बल्कि ई हमर आत्मसम्मान, अपन पहचान आ अधिकारक पुनर्स्थापना केर प्रतीक छी।

स्वतंत्रता दिवस सभ भारतीयक हृदय मे गर्व आ सम्मानक भावना जागृत करैत अछि। ई दिन हमरा सभकें ओ महान स्वतंत्रता सेनानीक साहस आ त्यागक याद दियबैत अछि—चाहे ओ महात्मा गांधीक अहिंसात्मक आंदोलन हो, नेताजी सुभाषचंद्र बोसक “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” केर उद्घोष हो, अथवा भगत सिंह, राजगुरु आ सुखदेवक बलिदान। रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बिपिन चंद्र पाल, सरदार पटेल आ अनेक अनाम नायक अपन जीवन देशकें समर्पित कएलनि, ताकि हमसभ स्वतंत्र भारतक सपना देखि सकी।

एहि गरिमामयी अवसर पर प्रतिवर्ष प्रधानमंत्री लाल किला केर प्राचीर सँ तिरंगा फहरबैत छथि आ राष्ट्रकें संबोधित करैत छथि। तिरंगाक लहरेनाइ मात्र औपचारिकता नहि, बल्कि ई संदेश अछि जे हमर सभक राष्ट्र स्वतंत्र, अखंड आ आत्मनिर्भर अछि। एहि दिन देशक विद्यालय, महाविद्यालय, सरकारी संस्थान आ सामाजिक संगठन सभमे देशभक्ति सँ ओतप्रोत कार्यक्रम होइत अछि—गीत, नृत्य, कविता आ नाटक जे स्वतंत्रता केर महत्वकें जीवंत करैत अछि।

स्वतंत्रता दिवस मात्र अतीतकें स्मरण करबाक दिन नहि, बल्कि भविष्य लेल संकल्प लेबाक अवसर सेहो अछि। आजादीक अर्थ तखने पूर्ण होयत, जखन देशक प्रत्येक नागरिक समान अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य आ सम्मान पाबि सकत। गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार आ सामाजिक भेदभाव सँ मुक्ति लेल निरंतर प्रयास आवश्यक अछि।

आजुक समयमे चुनौती सभ बदलि गेल अछि। आब आर्थिक आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी प्रगति आ वैश्विक प्रतिस्पर्धा मे अपन पहचान बना क’ रखनाइ जरूरी अछि। डिजिटल युगमे सूचना सुरक्षा आ सांस्कृतिक मूल्यक रक्षा सेहो हमर जिम्मेदारी अछि। स्वतंत्रता केर रक्षा लेल एकजुटता, अनुशासन आ राष्ट्रीय एकता अपरिहार्य अछि।

तिरंगाक तीन रंग निरंतर प्रेरणा दैत अछि—केसरिया साहस आ बलिदानक, श्वेत शांति आ सत्यक, आ हरियर समृद्धि आ प्रगतिकेँ प्रतीक अछि। अशोक चक्रक नीला रंग गतिशीलता आ न्यायक मार्ग देखबैत अछि।

अंततः, 15 अगस्तक ई दिवस हमरा सभकें स्मरण करबैत अछि जे स्वतंत्रता मात्र उपहार नहि, बल्कि जिम्मेदारी अछि, जे भविष्यक पीढ़ीक लेल संरक्षित आ सुदृढ़ करब जरूरी अछि। ई दिवस प्रत्येक भारतीय लेल गर्व, प्रेरणा आ राष्ट्र निर्माणक संकल्पक दिन अछि—ओ संकल्प जे भारतकें विश्वमे एक आदर्श राष्ट्रक रूपमे स्थापित करी। जय मिथिला, जय मैथिली।

स्वाधीनताक दीप सदिखन जरैत रहै,
नव पीढ़ि मे भारतक गौरव पलैत रहै।
एकता-सद्भाव रहय अपन शान,
विश्वमे चमकय जननीक नाम।
जय हिंद 🇮🇳

Related Articles