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नेपाल मे आब की ?

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पुरना राजनीतिक दल दुःखी आ चिन्तित नहि भ’ राष्ट्रनिर्माण मे सहयोगी बनय

नेपालक प्रतिनिधिसभा निर्वाचन २०८२ मे पुरना कहायवला नेता आ दल – सभक पत्ता साफ भ’ गेलैक । बड़का-बड़का विश्लेषक आ अनुमान लगेनिहारक सर्वे सेहो फेल भ’ गेलैक । नेपालक जनता एकतरफा मत केवल एक दल – राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी केँ देलकैक । मधेशी जनता त आर उलटिकय ‘अबकी बार – बालेन सरकार’ केँ जितेलकैक ।
ई कोनो विश्लेषक नहि सोचने रहय जे परिणाम एना एकतरफा आओत
नेपालक इतिहास मे ई पहिल बेर सम्भव भेलैक अछि जे कोनो एक दल केँ एहि तरहें प्रचण्ड आ पूर्ण बहुमत भेटलैक । कि नेपाली कांग्रेस, कि एमाले, कि माओवादी, कि राप्रपा, कि मधेशवादी – सभक दम्भ केँ नेपाली जनता पहिल बेर चूर-चूर कय देलकैक ।
सच इहो छैक जे पुराना दलक सोच आ ईमानदारीक संग ओकर कयल पूर्वक अनेकों उपलब्धिमूलक काज ओकरा जिविते रखतैक, ओकर सोच अपना जगह यथावते रहतैक । लेकिन जेन-जी आन्दोलन सँ जे मांग राखल गेलैक, ताहि प्रति पुराना दल केर सोच मे कोनो खास परिवर्तन एलैक ई बात चुनाव कालक प्रचार मे जनता लग नहि जा सकलैक ।
कहल जाइछ जे नेपाली जनता भेंड़ा होइत छैक । से भेंड़ा वला बात तखन सिद्ध भेलैक जखन मतदान केन्द्र पर मत खसबैत काल लोकक मोनक बात सुनला सँ पता लागल । लोक कहैक – के ठाढ़ अछि से नहि पता, अबकी बार बालेन सरकार । मधेशिया प्रधानमंत्री बनय जा रहल अछि पहिल बेर । ई बात विराटनगरक महेन्द्र मोरंग कैम्पस के छी ।
आनो-आनोठाम लोकक मन मे परिवर्तन रहैक । लोक परिवर्तन लेल पुराना दल केँ नकारलक हँ एहि बेर । एकर माने पुराना दल आ नेता साफ भ’ गेल से एकदम गलत होयत । पुराना दल पर जिम्मेदारी बढ़ि गेलैक । आब ओ सब एहि नवका जनप्रतिनिधि सब पर ढंग सँ ‘वाच’ राखय । जरूरत मे नीक सँ गाइडलाइन दैक । नेपालक प्रगति तखने होयत ।
असहयोग, असहिष्णुता, अनावश्यक खींचातानी, अराजक कुतर्क, आमलोक मे खोखला राष्ट्रवादक प्रचार-प्रसार आदि पर नियंत्रण जरूरी अछि । संगहि, नया शक्ति द्वारा परिपक्व राजनीति करब सेहो आवश्यक अछि । परिवर्तन लेल केवल कथनी टा नहि करनी सेहो जरूरी अछि ।

हरिः हरः!!

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