लेख विचार
प्रेषित: गीता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
बिषय- चैत्र नवरात्रि के महत्व
अपन देश हिन्दू समाज मे नवरात्रि के बहुत
मान्यता अछि। माँ भगवती के नौ दिन बहुत नियम निष्ठा सँ पुजन होइ अछि।
नवरात्र साल मे चारि टा मानल जाइत अछि। लेकिन आश्विन व चैत्र के नवरात्र
पुजन व्रत प्रायः सब करैत छैथ। चैत्र नवरात्र माँ गौरी के अराधना पुजा होयत अछि। माँ गौरी नौ दिन नौ गौरी के रूप मे पुजल जाइत छैथ। माँ दुर्गा के गौरी रुप बहुत विशिष्ट छनि । शिव शक्ति रुपा माता गौरी केर
मिथला वासी सदा शक्ति के उपासक छथ।
देवी अराधना बहुत मोन सँ करैत छथि।
चैती नवरात्र चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा सँ आरंभ होइत अछि। जाहि दिन हिन्दू नववर्षक सुप्रारंभ्भ होइत अछि। कलश स्थापना क’ आम के पल्लव राखि लाल सालुक मे नारियल लपेट माता रानी के अराधना कएल जायत अछि।
धुप दीप, फुल माला आ अपन इच्छा अनुसार विभिन्न प्रकार के प्रसाद माता रानी के भोग अर्पित क सब मैया के मोन सँ शुद्ध भ’
पुजन -पाठ करैत छथि। नौ दिन माता के नौ रुप के पुजन होइत छनि। शक्ति रुपा माता
सबके कष्ट सेहो दुर करैत छथि। चैत्र मास के आरंभ गर्मी के शुरू आत रहैत अछि, लेकिन भगवती क कृपा मात्र सँ गरमी के प्रकोप के सामान्य बनेने रहैत छथि। पानि आंधी तुफान
सँ मौसम मे धीरे -धीरे गर्माहट आबैत अछि आ बिमारी के प्रकोप सेहो कम रहैत अछि।
नौ दिन माता रानी के अराधना सबके लेल
मंगलमय हुए।
