Search

कि मिथिलावाद ओरा गेल ?

102 भ्यूज

कतय हेरायल मिथिलावाद ?

काल्हि २२ मार्च २०२६ – जहाँ-तहाँ ‘बिहार दिवस’ केर धूम देखय मे आयल । बुराड़ी (नई दिल्ली) मे सांसद मनोज बाजपेयी जी केँ मंच पर गबैत-गबाबैत देखलहुँ फेसबुक लाइव मे । बड़ा राजनीतिक युग्म मिलबैत अपन मनभावन सुर-ताल मे गाबि-गाबिकय लोकक मन रिझा रहल छलथि । उत्तराखंडक लोक आ बिहारक लोक हुनकर वोटर्स मे पड़ैत छन्हि, उपलक्ष्य बिहार दिवस केर, प्रशंसा बिहारक मूलवासी सभक, मुदा बिहारक लोक केँ ‘प्यार करनेवाले’ आरो सभक जयगान करैत माननीय सांसद अपन राजनीतिक हितसाधना करैत दिवस विशेषक शुभकामना आदान-प्रदान कय रहल छलथि ।

ओम्हर गुआहाटी मे मैथिली-मिथिलाक चिरसारथि प्रेमकान्त चौधरी भाइसाहब सेहो बहुत महत्वपूर्ण आयोजन कय केँ आसाम मे बिहार दिवस मनेबाक अकझके दृश्य कतहु देखलहुँ । बिहारी अस्मिता प्रति आसाम मे जिम्मेदारी निभायब सेहो पैघ मुद्दा रहल छैक । इतिहासो बड़ा विशद् आ गम्भीर रहल छैक । ओनाहू प्रेमकान्त भाइसाहबक सिद्धान्त मे खोखला मैथिली-मिथिलाक प्रशंसा किन्नहुं आ कहियो नहि रहलनि । ओ हमेशा एकटा ठोस रोड मैप केर वकालत करैत आबि रहल छथि ।

पटना मे काल्हि बड़ा भारी आयोजन ‘चेतना समिति’ केर अगुवाई मे कयल गेल । दिवस भले बिहारक हो, परन्तु चेतना समितिक कोर सब्जेक्ट मे ‘मैथिली व मिथिला केर हित’ निहित छल । तेँ मैथिली-मिथिला सँ जुड़ल विभिन्न संस्था-व्यक्ति आदि केँ आमंत्रित करैत सत्रवार चर्चा कयल गेल । जनगणना मे मैथिली प्रति सजग रहबाक एकटा ठोस मुद्दा सहभागी कोनो व्यक्ति चर्चा कएने रहथि । सम्पूर्ण व्योरा मैथिली संचार किंवा हिन्दी संचार मे पढ़य-बुझय लेल शेष अछि । प्राथमिक तथ्यांक संग्रह सेहो समयाभाव मे नहि कय सकल छी । मुदा बिहार दिवस पर मौलिक चिन्तन करबाक सोच केँ हमर नमन आ समर्थन अछि । मिथिला जागरण यात्राक चिन्तन – सब केँ आपस मे निजत्वक सूत्र मे बन्हबाक चिन्तन बहुत जरूरी बुझायल । जानकी कल्याण करथि, योजना क्रियान्वय मे परिणति पाबय से कामना ।

एम्हर पीरा गंजी, केसरिया गंजी आ हरियरका-ललका गंजी पहिरि-पहिरि ‘मिथिलावाद’ केर नारा सँ आकाश गुंजायमान करयवला छौंड़ा सब बिहार विधानसभा चुनाव मे प्रशान्त किशोरक अटल विश्वास आ प्रखर प्रदर्शन देखि मिथिलावादी पार्टी छोड़िकय जनसुराज मे चलि जेबाक खबरि भेटल । आब जेकरा शुरुए मे बिजलोता जेकाँ छिटकैत आ अस्थिर मानस मे ओझरायल देखि लेने रही, ओकर पाला बदलब हमरा उपर कोनो खास प्रभाव नहि छोड़लक । वानरक स्वभाव होइत छैक एहि डार्हि सँ ओहि डार्हि पर कूदफान । धरि जे पार्टी संस्थापक सब रहथि, ओ लोकनि हाल धरि मौसमी नेता मात्र बनता त मिथिलावाद कय डेग आगू बढ़त ? चिन्तनक विषय ई अछि ।

एम्हर हम सब जे सेना बनेने रही तेकर कमान्डर साहेब हिन्दू राष्ट्रवादक मौलिक चिन्तन मे विशेष व्यस्त भ’ गेलाह, २०२१ मे जागरण उपरान्त २०२५ केर चुनाव वला टारगेट मिस करैत ओ अपन राष्ट्रसेवा मे लागि गेलथि । बिहार मे रिलिजियस डेमोग्राफी परिवर्तन आदिक गहींर विषय सब मे आ घुसपैठिया सब सँ भारत भूमि केँ निजात दियेबाक काज बड पैघ अर्थपूर्ण छैक, तेँ आब कतय मिथिला कि मिथिलावाद ? संगठन यदि माटि नहि पकड़य त केहनो बलगर सेना कियैक न हो, ओ एहिना बिनु बरखे मौसमक बाढ़ि मे दहा जायत । सैह भेल । मिथिलावाद एतहु सँ हरा गेल ।

जानि फेर कहियो कोन समर्पित पुत्र उत्पन्न लेत जे मिथिलावादक पृष्ठपोषण बल पाओत ! तत्काल ‘हाँ हम बिहारी हैं जी, बड़े संस्कारी हैं जी’ गाबि-गाबिकय बिहारवादक हित करय जाउ, मिथिला एहि भीतर अछि । वर्तमान सरकार विकासक रेल ठीके-ठाक चला रहल देखाइछ, अहाँ सब सेहो चलैत रहू ।

हरिः हरः!!

Related Articles