लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- स्त्री चौकठि सँ चान धरि
मैथिल समाज मे स्त्रीक भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहल अछि, मुदा समयक चक्रक संग ओकर स्वरूप बदलि गेलैक अछि।
प्राचीन काल सँ मिथिला विदुषी महिला सभक जन्मस्थली रहल अछि, मुदा मध्यकालक किछु कुरीति सभक कारणेँ स्त्रीक पैर मे ‘चौकठि’ क बेड़ी लागि गेल छलैन्ह।
चौकठिक मर्यादा आ सीमा ओहि समय छल जखन मैथिलानीक परिचय मात्र ‘घरक लक्ष्मी’ धरि सीमित छलैन्ह । भानस-भात, कोहबरक चित्रकारी, आ घरक संस्कार बचाबय धरि हुनकर दुनिया मानल जाइत छल। चौकठिक भीतर रहब हुनकर सुरक्षा आ मर्यादाक प्रतीक छल। मुदा एहि सीमाक भीतर सेहो मिथिलानी सभ अपन कला जेना मधुबनी पेंटिंग आ मिथिलाक लोकगीतक माध्यम सँ अपन अभिव्यक्ति जीवित रखलनि।
समय बदलल आ शिक्षाक प्रचार प्रसार भेलैक आ जखन मैथिलानी सभक हाथ मे कलम अयलैन्ह, तखन ओ चौकठि पार कऽ विद्यालय आ विश्वविद्यालय धरि पहुँचलीह। गार्गी आ मैत्रेयी क परम्परा केँ आधुनिक मैथिलानी आगू बढ़ाओलनि आ आइ साहित्य होइ वा राजनीति, प्रशासन होइक वा विज्ञान—कोनो एहन क्षेत्र नै अछि जतय मिथिलाक बेटी अपन नाम नै रोशन कऽ रहल छैथि।
’चान धरि पहुँचब’ मात्र एकटा मुहावरा नहिं , बल्कि मिथिलानी अदम्य साहसक परिचायक अछि। आइ मिथिलाक कतेको बेटी वैज्ञानिक बनि कऽ अंतरिक्ष संस्थान (ISRO/NASA) मे काज कऽ रहल छैथि। ओ आब मात्र कोहबर मे चान-सूरज नै बनाबैत छैथि, अपितु असलियत मे ओहि चानक गुत्थी सुलझाबय लेल सक्षम छथि।
चौकठि सँ चान धरिक ई यात्रा संघर्ष, धैर्य आ स्वावलंबनक यात्रा थिक। ई सिद्ध करैत अछि जे जखन स्त्री केँ समान अवसर आ सम्मान भेटैत छैन्ह, तखन ओ घरक संस्कार सेहो बचाबैत छैथि आ आकाशक ऊँचाई सेहो नापि लैत छैथि।
”आब ओ अबला नै, सबला छैथि—जे अपन संस्कारक जड़ि सँ जुड़ल रहि कऽ आकाश छुबय क सामर्थ्य रखैत छैथि।”
