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नेपाल फेर बनत एकमात्र ‘हिन्दूराष्ट्र’

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नेपाल मे नया सरकारक शपथग्रहण मादे मैथिली विचार

नेपाल मे काल्हि नव सरकारक शपथ-ग्रहण समारोह होयत । राष्ट्रपति भवन मे शपथ लेबाक सब व्यवस्था सुनिश्चित कय लेल गेल अछि । एहि शपथ समारोह मे हिन्दू धार्मिक परम्पराक संग बौद्ध धार्मिक परम्परा मुताबिक प्रस्तुति समेटल जेबाक बात अछि । संगहि देश मे पहिल बेर मधेशी पहिचानक अत्यन्त लोकप्रिय युवा नेता बालेन प्रधानमंत्री पद केर शपथ ग्रहण करता ई सेहो अत्यन्त विशेष बात अछि ।

सुनबा मे आबि रहल अछि शपथ ग्रहण समारोह मे ७ गोट ब्राह्मण शंखघोष करता, १०८ गोट बटुक ब्राह्मण द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण – स्वस्ति वाचन आदि कयल जायत, आर तहिना १०८ गोट बौद्ध गुरु द्वारा बुद्ध साहित्य-साधना अनुरूप धार्मिक सुक्त आदिक वाचन करैत नेपालदेशक नया सरकार गठन होयत ।

सनातन वैदिक परम्पराक प्रदर्शन कि संकेत करैत अछि ?

नेपाल मे विद्यमान मुख्य राजनीतिक दल सब नेपाली जनताक इच्छा विपरीत देशक संविधान मे ‘धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र’ केर बात जोड़ि देलक । २०१५ ई. मे घोषित नव संविधानक आर कतेको बात सँ लोक बड प्रसन्न भेल, मुदा ई धर्मनिरपेक्षताक चोला ओढ़ने भारतक छद्म-धर्मनिरपेक्षता आ राजनीतिक गोटी रूप मे धर्मक नाम पर वर्चस्व व तुष्टिकरणक खेल-वेल देखि नेपालक लोक एहि सँ एकदम अप्रसन्न रहल । एहि राजनीतिक निर्णयक विरूद्ध पुरना सारा दल केँ २०२६ ई. (२०८२ वि.सं. साल) केर चुनाव बहारि-झाड़ि बाहर कय देलक ।

अतः नया राजनीतिक विकल्प रूप मे उदीयमान राष्ट्रीय राजनीतिक शक्तिक सरकार पुनः हिन्दू राष्ट्र नेपाल दिश उन्मुख अछि ई तेकर स्पष्ट संकेत थिक ।

सनातन वेदक रीति एवं बौद्धि परम्पराक अनुकरण सँ विश्व समुदाय केँ एक विशेष सन्देश देबाक सुझबुझ कहल जा सकैछ एहि शपथ ग्रहण समारोहक योजना-प्रारूप केँ ।

नेपाल आ सनातन हिन्दू धर्मक अन्योन्याश्रय सम्बन्ध

नेपाल हिमालयक कोरा मे स्थित एक शान्तिपूर्ण राष्ट्र रूप मे सुपरिचित अछि किंवा रहि आयल अछि अथवा विगत मे रहय । गोटेक दशक सँ एहि देश सँ शान्ति मानू छिना गेल हो ! अगबे मुक्तिगामी क्रान्ति, लेकिन क्रान्ति उपरान्त नेता सभक अराजकता आ अशान्ति सँ देश आक्रान्त भेल अछि ।

बुद्धक देश नेपाल

एहि नेपालक लुम्बिनी अंचलक कपिलवस्तु मे जन्म लेनिहार अवतारी महापुरुष गौतम बुद्ध भेलाह । शाक्यवंशी राजा शुद्धोदनक पुत्र रहथि सिद्धार्थ जे ज्ञान प्राप्तिक बाद कहेलाह बुद्ध ।

सिद्धार्थ जन्म लेलनि नेपाल मे, राजपाट छोड़ि ज्ञान ओ परमशान्तिक खोज हेतु तप-साधना कयलाह मिथिला मे, ज्ञान प्राप्त कय बुद्ध बनलाह मगधक्षेत्रक महान तीर्थस्थल गया मे जेकरा आइ बोधगया नाम्ना नव परिचय भेटल अछि, निर्वाण प्राप्त कयलनि कुशीनगर (उत्तरप्रदेश) मे, कतेको अनुयायी केँ उपदेश देलनि सारनाथ आदि विभिन्न क्षेत्र मे – आर हुनक अनुयायी लोकनि बौद्ध धर्म केँ पहुँचा देलनि सौंसे संसार मे ।

ऋषि-मुनि आ पशुपतिनाथक देश नेपाल

अति प्राचीनकाल सँ ऋषि-मुनि ओ वेद-मंत्र-द्रष्टा अनेकों महर्षि लोकनिक प्रादुर्भाव स्थल हिमलाय रहल सेहो सर्वविदिते अछि । महाभारतकाल केर पांडव लोकनि द्वारा महादेवक खोज आ अन्त मे देवाधिदेव महादेव ‘पशुपतिनाथ’ केर रूप मे भेटलखिन, से अछि नेपाल मे । स्वयं पशुपतिनाथक अवस्थितिक कारण नेपाल केँ पशुपतिनाथक देश सेहो कहल जाइछ ।

जनक-जानकी आ मिथिलाक देश नेपाल

मिथिला जेहेन वेद-पुराण वर्णित सभ्यताक भूगोल सेहो पड़ैछ वर्तमान नेपाल मे । मध्यकालीन इतिहासक सिमरौनगढ़ सँ काठमांडू धरि, काठमांडू होइत तिब्बत ओ चीन धरि – सौंसे पहुँचल अछि मिथिला सभ्यता आ निस्सन्देह वैदिक ओ बौद्धिक धर्मक पद्धति, ज्ञान आ विज्ञान संग उद्यम-व्यवसाय आ तकनीक ।

विदेहराज जनकक राजधानी जनकपुर सँ लैत स्वयं मैथिली (जानकी) केर भूमि थिक नेपाल । हिमालय सँ निकसि गंगा मे मिलयवला कोसी, बागमती, गंडकी, आदि सैकड़ों छोट-पैघ नदी सँ पखारल विशुद्ध हिन्दू समाजक देश रहल अछि नेपाल ।

भारतवर्षीय दर्शन – वैदिक एवं बौद्ध दर्शनक विस्तार आ नेपाल

‘तिब्बत’ जे हिमालयक उत्तरी भागक कोरा मे अवस्थित अछि ओतय बहुल्यजन बौद्ध छथि । चीन, जापान, कोरिया, थाईलैन्ड, आदि विभिन्न देश धरि प्रसारित भेल अछि बौद्ध धर्म । तहिना मिथिलाक इतिहास मे दावी कयल गेल अछि जे मिथिलाक ज्ञान परम्परा चीन धरि पहुँचल ।

धर्म आ ज्ञानक संग-संग व्यवसायक मार्ग सेहो एहि सब राष्ट्र बीच बनल-बढ़ल । भारत, नेपाल, तिब्बत, चीन आदिक संग अन्यान्य राष्ट्र सब एहि मार्ग मे पड़ैत अछि । एकर जिबन्त इतिहास सर्वविदिते अछि ।

निष्कर्षः

वर्तमान सरकार गठनक पहिल औपचारिक समारोह यानि शपथ ग्रहण समारोह केर सन्देश स्पष्ट अछि – नेपाल एकमात्र हिन्दूराष्ट्र वला यूएसपी पुनः हासिल करत ।

बीच मे बहुते रास ‘वाद’ केर चमत्कार आ कतेको आन्तरिक जनसंघर्ष-जनयुद्ध सब भेलाक बाद अचानक नेपाल धर्मनिरपेक्ष बना विश्वक एकमात्र हिन्दूराष्ट्र वला विशिष्ट परिचितिक परित्याग कय देने छल से पुनः हासिल करत एहि मे दुइ मत नहि ।

मैथिली जिन्दाबाद केर तरफ सँ हार्दिक बधाई आ अपार सफलताक शुभकामना !!

हरिः हरः!!

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