लेख विचार
प्रेषित: सुशीला ठाकुर
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- महिला—चौखट स चाँद तक पहुँचली
सही बात अछि जखन ओ चारदीवारी मे रहैत छली, त’ हुनकर गुण के कोनो मोल नहि छल। मुदा जखन मौका भेटलनि, तऽ ओ अपन गुण कें घर सँ बाहर धरि पसारि देली। अपन क्षमता के पंख लगाक ओ उड़ी गेली । बरका फाइटर प्लेन जेकाँ। शासन-प्रशासन जेहन बरका जिम्मेदारी के सम्हारि देली आ देखौलनि कि जीवन के असली परिभाषा की अछि।
आब लोक सोचए लागल—महिला के मौका भेटल त ओ जीवन के नब ऊँचाई पर पहुँचाबैत ओ चाँद तक पहुँच गेली।
वैज्ञानिक लोकनि के सेहो बुझा देली कि किएक आ कोना कक्षा (ऑर्बिट) बदलैत अछि। ओ दुनिया के बदैल देली। जे किछु नहि बुझैत छल, हुनका सेहो बुझबाक रास्ता देखौने इतिहास रचि देली।
ओ एकटा शब्द नहि—माँ, चाची, दीदी, बहिन, भौजी—सबहक रूप छी। हर जगह अपन गुण सँ सफलता प्राप्त कयली। एक गृहणी होइतहुँ, अपन माटि सन सुगंधित व्यवहार सँ सभकेँ प्रभावित कयली।
ओ सिखौलनि कोना चंदा मामा धरि पहुँचल जाए आ कोना नव संसार बसाओल जाए। हर महान वैज्ञानिक, इतिहासकार आ डॉक्टर—सभ एकटा महिला के कोखि सँ जन्म लेल अछि। महिला गुण के खान छी।
छोट-छोट बात सिखबैत छथि । खाय-पिबय के तरीका सँ ल क’ जीवन के मूल बात धरि। चाय पीबाक संस्कृति सेहो विकसित भेल—जे समाज के जोड़ैत अछि। ओ संस्कृति, संस्कार आ प्रकृति सभकेँ समेटिक गृहस्थी के सुंदर बनबैत छथि।
महिला कें शक्ति, बुद्धि, विद्या आ धन के प्रतीक मानल गेल अछि। आदिकाल सँ हुनका भक्ति आ शक्ति के वरदान भेटल अछि । आ ओ सबटा आइ प्रमाणित कयली।
ओ घोघ तानि गायिका बन सकैत छथि, तीर उठा क सीता बनि सकैत छथि। रामायण केर आदर्श कें जीवन मे उतारि क गृहस्थी के गूढ़ रहस्य सिखबैत छथि।
चारि अक्षर सँ “परिवार” बनैत अछि—आ ओहि परिवार के सम्हारब महिला के हाथ मे अछि। समय के संग राम-सीता जेकाँ आदर्श जीवन बनैत रहत।
महिला संस्कार सँ भरल परिवार के एकजुट रखैत छथि। नैतिक शिक्षा सँ समाज के मजबूत बनबैत छथि। बजरंगबली जेकाँ तत्परता सँ कार्य करब सिखबैत छथि।
जीव-जंतु सँ ल क’ प्रकृति तक सभकेँ संग ल कऽ कार्य करब, ई गुण महिला सिखबैत छथि।
इ सब गुण के पंख एकटा महिला देली अछि। चौकठि सँ चान धरि झंडा फहरौलि अछि।
