“अनुगूँज” शृंखलाक पाँचम और अंतिम प्रस्तुति!
भोजपुरी पारंपरिक लोकगीत “मोरा जोगिया” औघरदानी, देवक देव महादेव कें समर्पित एक भावपूर्ण भजन अछि । ई सिर्फ एक गीत नहि, बल्कि अपन पारिवारिक विरासतक अभिन्न अंग अछि । एक परंपरा जे पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होइत रहल अछि आ आइयो अपन हृदय में गुंजि रहल अछि ।
अंजनी कुमार चौधरी कहैत छथि जे दादाजी स्वर्गीय हरि चौधरी और स्वर्गीय चतुर्भुज चौधरी लोकसंगीत और लोककलाक संरक्षण हेतु जे बीज बॉग कयला, तेकरा हमर पूज्य पिताजी श्री माया शंकर चौधरी और हमर दिवंगत चाचा स्वर्गीय जटा शंकर चौधरी, स्वर्गीय उमा शंकर चौधरी, स्वर्गीय शिव शंकर चौधरी और स्वर्गीय राम शंकर चौधरी अपन सामर्थ्य अनुसार सींचलनि और पुष्पित कयलनि । आब, तेसर पीढ़ी रूप मे हम भाइ-बहिन एहि अनुपम धरोहर कें संरक्षण और प्रवर्धनक हरसंभव प्रयास कय रहल छी । हमरा विश्वास अछि जे चारिम पीढ़ीक बच्cचा सेहो पूर्वज एवं शुभेच्छु लोकनिक आशीर्वाद और प्रेरणा स एहि सांस्कृतिक धरोहर कें नया ऊँचाइ तक लय जेबाक संकल्प लेलहुँ ।
अंजनी कुमार आगू जानकारी देलनि जे “मोरा जोगिया” हुनकर गाम के कीर्तन मे सदैव गूँजयवला एक लोकप्रिय भजन रहल अछि । ई बचपन स अपन पिताजीक कंठ स सुनलहुँ आ आइ ओहि पावन स्वर के प्रतिध्वनि हमर गामक मंदिर प्रांगण स निकलि अहाँ सब तक पहुंच रहल अछि ।
