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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः रावण केँ फेरो मन्दोदरी द्वारा बुझेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण केँ फेरो मन्दोदरी द्वारा बुझेनाय १. अंगद श्री रामजीक दूत बनि आयल छलाह, रावण केँ खूब नीक सँ ओकर असल ओकादि देखाकय निडर-निःशंक भ’ रणभूमि मे रावण केँ देखि लेबाक चुनौती दैत वापस गेलाह। एम्हर रावण अपन सभा सँ सन्ध्या भेल बुझैत काफी उदास भ’ महल मे रामचरितमानस मोतीः रावण केँ फेरो मन्दोदरी द्वारा बुझेनाय

अहुँ केँ एना समस्या होइत अछि की?

आत्ममंथन – आत्मसमीक्षा सब दिन पढ़लियैक हिन्दी। अखबार, पत्रिका, उपन्यास, कथा, कविता आदि विभिन्न बात विद्यालय सँ आम जनजीवन धरि हिन्दी के भरमार रहलैक। मैथिली सेहो पढ़लियैक लेकिन मात्र परीक्षा मे नीक मार्क्स सँ पास हेबाक लेल आ अत्यधिक सहज विषय बोध करैत बहुत कम समय खर्च करबाक कय टा बात पहिनहि सँ मोन मे अहुँ केँ एना समस्या होइत अछि की?

मैथिली फिल्म – विशेष रूप सँ लघु फिल्म पर प्रवीण दृष्टि

मैथिली लघुफिल्म मानवीय स्वभाव मे मनोरंजन के बड पैघ महत्व सर्वविदिते अछि। अदौकाल सँ रंगकर्म आ विभिन्न लोकनाच लोकरंजना लेल प्रयोग मे रहल अछि। आइ मानवीय समाज लेल मनोरंजनक संग-संग जीवन लेल सर्वाधिक जरूरी पक्ष जीवनोपयोगी शिक्षा लेल फिल्म बड पैघ भूमिका निभा रहल अछि। मानव सभ्यता सँ जुड़ल विभिन्न कथानक पर आधारित फिल्म वास्तव मैथिली फिल्म – विशेष रूप सँ लघु फिल्म पर प्रवीण दृष्टि

मैथिली लेखन क्रान्ति – नवप्रवेशी लेखक-लेखिका लेल विशेष

तेना लिखू जे लोक के कल्याण हो   लेख लिखनाय एकटा कला होइत छैक। बच्चे सँ लेख (१०० शब्द, २०० शब्द, ५०० शब्द, १००० शब्द) लिखबाक अभ्यास करायल जाइत अछि। लेखनी लोक तखनहि उत्कृष्ट स्तर के कय सकैत अछि जखन लेखकक दिमाग तेजी सँ लेख के सब ओर-छोर पकड़ैत छैक आ दिमागी आँखि सँ पाठकक मैथिली लेखन क्रान्ति – नवप्रवेशी लेखक-लेखिका लेल विशेष

प्रवीण दृष्टिः ब्राह्मण आ ब्रह्मणत्व

ब्राह्मण आ ब्रह्मणत्व   (निजी अनुभव पर आधारित किछु विचार)   ब्राह्मणक परिवार मे जन्म भेलाक बाद हमरा ई बुझय मे आयल जे हमर कर्म-कर्तव्य ब्राह्मण संस्कार मुताबिक होयब आवश्यक अछि। हालांकि सच कहय मे कोनो हर्ज नहि जे ई सब ज्ञान हमरा सही समय पर एकदम नहि भ’ सकल छल।   बच्चा सँ सब प्रवीण दृष्टिः ब्राह्मण आ ब्रह्मणत्व

रामचरितमानस मोतीः अंगदजीक लंका गेनाय आर रावणक सभा मे अंगद-रावण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अंगदजीक लंका गेनाय आर रावणक सभा मे अंगद-रावण संवाद १. एम्हर सुबेल पर्वत पर प्रातःकाल श्री रघुनाथजी जगलाह आर ओ सब मंत्री लोकनि केँ बजाकय सलाह पुछलनि जे आब जल्दी कहय जाउ कि कोन उपाय करबाक चाही? जाम्बवान्‌ श्री रामजीक चरण मे सिर नमवैत कहलखिन – हे सर्वज्ञ रामचरितमानस मोतीः अंगदजीक लंका गेनाय आर रावणक सभा मे अंगद-रावण संवाद

दरभंगाक लदारी गाम आ दुर्गा पूजाक इतिहास

माँ भगवती स्थान लदारी (दरभंगा) दरभंगा जिला मुख्यालय सँ केवटी – विस्फी होइत जनकपुर आ सीतामढ़ी केँ जोड़यवला मार्ग पर स्थित अछि लदारी गाम। एहि गाम मे आइ कतेको दशक सँ जगज्जननी दुर्गा माताक पूजा-पाठ बड़ा भव्यता सँ ग्रामीण आ आसपासक लाखों श्रद्धालु लोकनि द्वारा मनायल जाइत अछि। माँ दुर्गाक महिमा अपरंपार मानल जाइत छन्हि दरभंगाक लदारी गाम आ दुर्गा पूजाक इतिहास

पढ़नाय आ लिखनाय दुनू बहुत जरूरी छैक

पढ़ाइ-लिखाइ करियौक   नीक-नीक किताब पढ़ल करू। जीवन मे किताबक सन्देश बहुत पैघ मार्गदर्शक सिद्ध होइत छैक। पढ़ाइ-लिखाइ के ई बड पैघ महत्व होइत छैक। अधजल गगरी छलकत जाय – ई कहावत अपन मिथिला मे बहुत बेसी प्रसिद्ध छैक। कियैक? कियैक त लोक अपन पढाइ पूरा कएने बिना दावी एतेक पैघ-पैघ करत मानू जेना ओ पढ़नाय आ लिखनाय दुनू बहुत जरूरी छैक

ओ ग्रेजुएट पुतोहु

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी ओ ग्रेजुएट पुतोहु   बहुत पैघ पदाधिकारी अपन एक उच्च पदाधिकारी पुत्र केर विवाह अत्यन्त उच्च खानदान मे कयलनि। ताहि दिन टका-पैसाक बड महत्व रहैक। हुनका ताहि समय १ लाख टका दहेज भेटलनि। सौंसे गाम गनगना गेल। दहेज जतेक भेटय ताहि हिसाबे गाम के लोक-समाज ई बुझय जे लड़का कतेक ओ ग्रेजुएट पुतोहु

रामचरितमानस मोतीः मन्दोदरी द्वारा रावण केँ फेरो बुझेनाय, रामजीक महिमा सुनेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मन्दोदरी द्वारा रावण केँ फेरो बुझेनाय, रामजीक महिमा सुनेनाय रावणक रभस-रासलीला मे श्री रामजी द्वारा चलायल गेल बाण सँ रावणक मुकुट आ मन्दोदरीक कर्णफूल कटिकय खसि पड़लाक बाद सभा मे अफरातफरीक माहौल आ सब केँ डरायल देखि रावण बनावटी हँसी हँसैत सब केँ पोल्हबैत कहैत अछि जे जेकर रामचरितमानस मोतीः मन्दोदरी द्वारा रावण केँ फेरो बुझेनाय, रामजीक महिमा सुनेनाय