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स्त्री संस्कृति आ परंपरा केर संवाहक होइत छथि

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लेख विचार
प्रेषित: निजी कान्त पाठक
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- स्त्रीगण आ पावैन – तिहार

परंपरा, श्रद्धा आ समर्पणक अनुपम कथा
पावैन – तिहार भारतीय संस्कृति मे केवल एक पावनि नहि, बल्कि आस्था, परंपरा आ सामाजिक समरसता के जीवंत प्रतीक अछि। एहि पावन अवसर पर स्त्रीगणक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण आ प्रेरणादायक रहैत अछि। चाहे घरक व्यवस्था हो, पूजा-पाठक तैयारी हो, या पारिवारिक एकता के संजोगि रखबाक केर कार्य—हर क्षेत्र मे स्त्रीगण अपन अद्भुत योगदान दैत छथि।
पावैन – तिहार के दिन सबेरे-सकाल  स्त्रीगण उठि क घर-आंगन के साफ-सफाई सँ अपन दिनक शुरुआत करैत छथि। ई साफ-सफाई केवल बाहरी रूप सँ नहि, बल्कि एक प्रकार सँ आत्मिक शुद्धिकरण सेहो मानल जाइत अछि। स्त्रीगण अपन घर के एहन सुन्दर सजाऽ दैत छथि जेना कोनो पवित्र स्थान बनि गेल हो। दीप,  रंग -बिरंगक अहिपन, फूल आ सुगंधित धूप सँ पूरा वातावरण भक्तिमय भ’ जाइत अछि।
एहि पावनि तिहार  पर स्त्रीगण व्रत-उपवास सेहो रखैत छथि । जेकर उद्देश्य केवल धार्मिक पालन नहि, बल्कि परिवारक सुख-शांति आ समृद्धिक कामना करब होइत अछि। अपन भूख-प्यास के सहि क’ ओ सब दिन भरि पूजा-पाठ मे लीन रहैत छथि। ई त्याग आ समर्पण स्त्रीगणक अद्वितीय शक्ति के दर्शाबैत अछि।
पावैन – तिहारक अवसर पर स्त्रीगण परंपरागत गीत सेहो गबैत छथि। एहि गीत मे न केवल धार्मिक भाव रहैत अछि, बल्कि जीवनक अनुभव, सामाजिक संबंध आ सांस्कृतिक विरासत सेहो झलकैत अछि। गीत गबैत समय ओ सब एक दोसर सँ जुड़ैत छथि, अपन सुख-दुःख साझा करैत छथि, आ एक प्रकार सँ सामूहिक ऊर्जा के निर्माण करैत छथि।
एहि दिन विशेष पकवान बनाबय के परंपरा सेहो अछि। स्त्रीगण अपन हाथ सँ स्वादिष्ट भोजन तैयार करैत छथि—जाहि मे परंपरागत व्यंजनक खास स्थान रहैत अछि। ई भोजन केवल स्वाद लेल नहि, बल्कि प्रेम आ स्नेह के प्रतीक होइत अछि। परिवारक सब सदस्य एक संग बैसि कऽ भोजन करैत छथि, जाहि सँ पारिवारिक एकता मजगुत होइत अछि।
पावैन- तिहार स्त्रीगण लेल आत्म-अभिव्यक्ति के सेहो एकटा अवसर होइत अछि। ओ सब अपन परंपरागत वेशभूषा—साड़ी, गहना आ सिंदूर सँ सजि-धजि क अपन सांस्कृतिक पहिचान कें जीवित रखैत छथि। एहि साज-सज्जा मे केवल सुंदरता नहि, बल्कि गौरव आ आत्म-सम्मान सेहो झलकैत अछि।
आधुनिक समय मे भले जीवनशैली बदलि रहल अछि, लेकिन स्त्रीगण आइयो पावैन तिहारक परंपराक संरक्षण मे अग्रणी भूमिका निभा रहल छथि। नौकरी, शिक्षा आ अन्य जिम्मेदारियक बीच सेहो ओ सब अपन संस्कृति सँ जुड़ल रहैत छथि आ अगिला पीढ़ी के सेहो एहि परंपरा सँ परिचित करबैत छथि।
एहि प्रकारे, पावैनतिहार केवल एक धार्मिक आयोजन नहि, बल्कि स्त्रीगणक समर्पण, धैर्य आ सांस्कृतिक चेतनाक जीवंत उदाहरण अछि। ओ सब अपन कर्म, श्रद्धा आ प्रेम सँ एहि पर्व के सफल बनबैत छथि। वास्तव में, स्त्रीगण बिना पावैनतिहारक कल्पना अधूरी अछि।
अंत में कहल जा सकैत अछि जे स्त्रीगण पावैनतिहार के आत्मा छथि। हुनकर योगदान, त्याग आ समर्पण न केवल परिवार, बल्कि संपूर्ण समाज के दिशा दैत अछि। एहि पर्व पर हुनका सभ के सम्मान आ कृतज्ञता व्यक्त करब हम सब के कर्तव्य अछि।

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