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पावनि -तिहार केर नामे समाज कें एक सूत्रमे बान्हिकें रखबाक श्रेय मात्र स्त्रीगण केँ जाइ छनि

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लेख विचार
प्रेषित: निखिलेश कुमार झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :-  स्त्रीगण आ पावनि – तिहार

वास्तव मे मिथिलाक सामाजिक आ सांस्कृतिक जीवन मे अनेकानेक एहन उत्सव आ पावनि  लौकिक आओर वैदिक रीतिऍं विभिन्न अवसर पर विधिवत् व्यावहारिक रूप सॅं मनाओल जाइत अछि आ सभ पावनिक मूल मे घरक स्त्रीगण सभहिक मुख्य भूमिका रहैत छन्हि। एना कहल जा सकैत अछि जे पावनि आ स्त्रीगण परस्पर पर्याय जकॉ  छथि। तैं बिनु हिनके कोनो प्रकारक पावनि तिहार किंवा उत्सवक कल्पना नहि कैल जा सकैत अछि। बच्चाक जन्म स ल क विआहदान धरि कतेको विध व्यवहार मैथिल समाज मे उत्सवक माहौल बना दैत छैक। डा०श्री लोकनाथ झा जीक लिखल हुनक पुस्तकाकार शोधप्रबंध “मैथिली मे व्यवहार गीत”मे बच्चा आ बच्ची स संबंधित विभिन्न प्रकारक पावनि तिहार आ व्उयवहार कऽ उल्लेख कैल गेल अछि। एकर अतिरिक्त किछु सामयिक पावनिक उल्लेख सेहो अछि। यदि देखल जाए त प्रत्येक विध व्यवहारक सामाजिक सांस्कृतिक महत्व छैक तैं तदनुकूल मैथिल समाज ओकरा पावनिक रूप मे मनबैत छथि। जातकर्म,मूड़न उपनयन के संगे तुषारी,पंचमी,मधुश्रावणी,बरिसाइत,चौरचन,तीज,जितिया, अनंत पूजा,कोजागरा,के अतिरिक्त दुर्गापूजा,राखी, झूलन,कृष्णाष्टमी, धन्वंतरि पूजा, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भ्रातृद्वितीया,छठि, गोपाष्टमी,सामा, कार्तिक पूर्णिमा, विवाह पंचमी,तिलासंक्रांति, सरस्वती पूजा,माघी सप्तमी,होली, रामनवमी,जूड़िशीतल, गंगा दशहरा,आर्द्रा, देवोत्थान एकादशी, शिवरात्रि, नरक निवारण चतुर्दशी,हरिवासरव्रत, प्रभृति आओरो बहुत रास पावनिक रूप मैथिल समाज मे देखबा मे अबैत अछि।अहि पावनि सभक आयोजन मे मुख्य भूमिका स्त्रीगणेक रहैत छन्हि। घरक दैनिक कार्यक अतिरिक्त सभ आयोजनक भार ओएह उठौने रहैत छथि जे श्रमसाध्य होइत छै, मुदा बिना कोनो अशौकर्य के सभ काज करैत छथि। तैं हमरा जानतबे स्त्रीक बिना कोनो प्रकारक पावनि तिहार के कल्पना नहि कैल जा सकैछ।अहि क्रम मे पुरुष वर्गक सहयोग सेहो रहैत छन्हि मुदा असल मे देखल जाए त स्त्रीगणक योगदान अपरिमित रहैत छन्हि।
अंत मे ई उचित बुझना जाइत अछि जे पावनि तिहार व्यक्ति ,परिवार,समाज सभ के एकसूत्र मे बान्हि क रखैत छैक जाहि मे स्त्रीक भूमिका सर्वोपरि होइत छैक।  हिनके सभक समर्पण आ कल्याण भावक फलस्वरूप पुरुष पात दलान पर बैसि मोछ ओमठैत छथि।

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