लेख विचार
प्रेषित: चन्दा वर्मा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय:- आमक मास आ गाम
आमक गाछी सभ मंजर भेल, गामक वातावरण सुन्दर सुगंधित भेल।
मंजर सँ मरूआ जकां टिकुला नव नव कलश पुलकित होइ छइ।
दोसर मास मे गाछ बिरीछ पर भूत प्रेत सब के देखाइत छैक, मुदा आम मे मंजर देखि कऽ मन हर्षित भऽ जाइत छैक तऽ भूत प्रेत सबहक डर सेहो भागि जाइत छैक ।
गर्मी के छुट्टी आमक गाछी आ गाम बहुत मस्ती के समय बितैत छल,आब याद आबि रहल अछि ओ दिन। आमक गाछ मे झुला झुलैत कतेक नीक लगैत छल।
आमक गाछी मे मचान बनैत छैक, ऊपर सँ खोपड़ी आओर देखभाल करै लेल ओगरबाह रहैत छैक।
घैल मे पाइन भरल आओर राइत मे एक लालटेन जरैत रहैत छैक।
राही बटोही रास्ता बिसरि जाइत छलैक तँ ओगरबाह आम खुआ कऽ अपना लग सुता कऽ भोर मे ओ कुटुंब कऽ ओहि आंगन पहुँचा दैत छल।
कड़कड़ौवा रौद सँ परेशान राही बटोही आमक गाछ तर छाहड़ि मे विश्राम करैत छैक।ओहि समय यदि गाछक पाकल आम खसि पड़ैत छैक तँ उठा कऽ खा लैत अछि ।ओ पाकल आम खा’कऽ तृप्त भऽ जाइत अछि, तखन आगू बढ़ैत अछि।
ई तीन महिना,मई,जून,जुलाई,
गाम मे किनको बेटी या बेटा के ब्याह होइत छलैक तँ बाहर बाला आमक गाछी मे बैस कऽ खूब मजा सँ आम खाइत छल।
आओर वो ब्याह के हमेशा याद राखैत छल।
शुद्ध सुरम्य वातावरण,सुन्दर दृश्य,सुगंधित हवा बहैत सब रंग कऽ चिड़ियां पंख पसारि कऽ एहि डारि सँ ओहि डारि करैत रसदार आम क खोदि खोदि खाइत अपन गीतक स्वर सुनबैत अछि।
कोइली कू कू केर मीठगर तान सुनि कऽ ओकर संग हमहूँ सब कू कू करै लगैत छलहुँ।मोन अत्यन्त प्रफूल्लित रहैत छल।
आंधी बिहारि आबैत छल तँ झोरा बोरा लऽ आमक गाछी दौड़ैत छलहुँ आओर आम बिछि बिछि आंगन मे राखैत छलहुँ।
कांच आमक आमील,कसौनी, अचार आमझोड़ा,खटमिट्टी इत्यादि बनैत छल।
भरि दिन माँ आंगन मे काज करैत छल।
पाकल आमक पाल पर राखि कऽ उलट फेर करैत छल, आओर अमट बनाबैत छल।
हमर गाम मे बहुत पैघ आमक गाछी छल।
पांच टा गाछ मालदह, दू गाछ कलकतिया,दू गाछ सड़ही,दू गाछ कृष्ण भोग, मम्बई, जामुन बैर इत्यादि हमरा आमक छल। कच्चा आम गाछ सँ फोड़ि कऽ खाइत छलहुँ। गाछक पाकल आम बुढ़ बच्चा सभ चुसी चुसी कऽ चोभा मारि कऽ खाइत छलहुँ, कतेक आम के खेलकै तकर हिसाब नहि रहैत छल।
हम सासुर गेलहु तँ आम देखि कऽ दंग भऽ गेलहु।
गे दाइ माइ कतरा काटल आम सेहो राइत मे खायब कारण दिन मे बड़का मांछी धबाक सँ गिर जाइत छैक से सुनि अबाक भऽ गेलहु।
