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आब ने ओ गाम बचल ने बिरहिन्नी आम रहल

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लेख विचार
प्रेषित: ममता झा मेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- आमक_मास_मे_गाम
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आमक नाम सुनिते मुह मे पाइन आबि गेल। कतेक शोभनीय लगैत छल पहिने आमक मास। आब नहि ओ नगरी नहि ओ ठाम। कारवाइट सं पकैल खरीद खूब खाइत छी शहर मे आम। गच्छ पक्कू आमक स्वादे अलग। तहनो आम मास आ गामक संबंध एक जीवंत मंथन अछि। सब परदेशी अपन देश आम खाइके वास्ते अबैत छथि। ई अछि असली आमक मजा। बच्चा सबके गरमी छुट्टी भेल नय कि आमक चर्चा शुरू।
आमक मास मे हम सब गाछि मे भरि दुपहरिया खेलबो करि,पढ़बो करि आ आमक ओगरवाही करैत रही गाछी मे धिया पूता सखी सहेली मिलि कय आम बिछैत रही। टिकुला बिछवाक लेल केकरो मनाहि नहि रहैत छलै। सब धिया पूता टिकला आनय आर घर मे मां काकी सोहि सोहि के आमिल बनावय लागथि। फेर कने पैघ आम भेल त कलमे मे मचान बनय । दिन भरि आम खाय वास्ते लोग आबिते रहै। जिनका घर मे ओगरवाह नहि रहनि ओ रखवार राखथि। मचान लग घैल मे पाइन राखल रहैत छल।
फेर सब के अंगने अंगने आचार बनय लागय। सब के आंगना गम गमाय लागय अचार के गमक सँ।अचारो बहुत प्रकार के बनैत छल। कुच्चा, फारा, कुटबि, खटमिठ्ठी, छिलका लागल, सोहुआ , नारायण भट्टी । भरि दिन सब काकी माय दादी आमक पाछू लागल रहैत छली।
सबसँ पहिने बंम्बई, फेर सरहि, फेर,मालदह, आर ओकर बाद त घर मे आमक बाढ़ि आबि जाय। कृष्ण भोग, सिंनुरिया, मिश्री भोग,आर अनेको तरहक आम सब तोराय लगै।

जखनि आम तोरा क आबय आ बेसि पाकि जाय ओकर अम्मट बना कय तैयार कयल जाय। सूप मे, पिरही पर , बरका चौकी पर सेहो अम्मट पारल जाईत छल। अमट लेल आम के गारा बनैत छल आर बरका कठौत मे गारा राखल रहैत छल । भरि दिन अमोट के गारा देल जाईत रहै । सब मां काकी सब अचार अमोट बनवय मे भरि सीजन बेहाल रहैत छलि। ओना गाम मे लोक बारहो महिना बेहाल रहैत अछि। गाम मे सब दिन काज लागले रहैत अछि। कतउ उपनयन,कतउ मूड़न, विवाह, सालो भरि के पाबैन तिहार,श्राद्ध, इ सब गाम मे होइते रहैत अछि।
आमक मास मे गाम बहुत सोहाओन रहैत अछि। सब घुमनिहार के आमे सँ स्वागत होइत छल। सबके सनेस आमे भेटैत छल। धिया पूता सब भरि ईच्छा आम खाइत छल।भरि बाल्टी आम मुठी काटि कय राखल जाइत छल , सब चोभा लगा लगा कऽ खाइत छल।
गाछी एखनो अछि मुदा उजरल उपटल सन भ गेल। आब गामक माहौल पहिले जेकां कहाँ रहल। आम त खाइते छी मुदा ओ आनंद आब कतए।

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