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प्रवीण नारायण चौधरी

ज्ञानप्राप्तिक सर्वोत्कृष्ट मार्गः आत्मचिन्तन

ज्ञानप्राप्तिक सर्वोत्कृष्ट मार्ग – आत्मचिन्तन ब्रह्माण्ड रचयिता द्वारा पृथ्वीक रचना आ ताहि पर जीव रचना व प्रकृति परिकल्पनाक अद्भुत स्वरूप सँ भला के नहि परिचित होयब! अपन रचना पर निरन्तर चिन्तन सेहो करिते होयब। मायक कोखि सँ जन्म भेल, फल्लाँ हमर पिता भेलाह, फल्लाँ-फल्लाँ हमर सर-कुटुम्ब-परिजन-पुरजन भेलाह, आदि। ई सोचनाइये बहुत पैघ चिन्तन भेलय। आत्मचिन्तन ज्ञानप्राप्तिक सर्वोत्कृष्ट मार्गः आत्मचिन्तन

सत्याग्रह व्यक्ति विरूद्ध नहि प्रवृत्ति विरूद्ध होइत छैक

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सत्याग्रह व्यक्ति विरूद्ध नहि प्रवृत्ति विरूद्ध होइत छैक भारत मे हालहि ९ जनवरी २०२४ केँ ‘प्रवासी दिवस’ मनायल गेल। ई ओ ऐतिहासिक तारीख थिक जहिया दक्षिण अफ्रीका सँ महात्मा गाँधी स्वदेश भारत वापस आयल छलाह। अपोलो बन्दरगाह, बम्बई (आब मुम्बई) पर भारतीय कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता हुनकर जोरदार स्वागत कएने सत्याग्रह व्यक्ति विरूद्ध नहि प्रवृत्ति विरूद्ध होइत छैक

चिन्ता नहि, चिन्तन करूः पठनीय-विचारनीय लेख

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी चिन्तन करू – चिन्ता नहि करू चित्त मे जाहि बातक उच्चारण बेर-बेर होइत रहैछ, वैह सहज भाषा मे चिन्तन थिक। आ चित्त मे शंका-अविश्वासक चलते जे डर होइछ से चिन्ता छी। चिन्तन सदैव सुन्दर सोच-विचार आ सकारात्मकता प्रदान करैछ, तेँ सुख-शान्तिक घर छी। चिन्ता सदैव भय-दुविधा आ नकारात्मकता उत्पन्न करैछ, चिन्ता नहि, चिन्तन करूः पठनीय-विचारनीय लेख

पुरुषसुक्तः – सहस्रशीर्षा पुरुषः (अत्यन्त मननीय पाठ मैथिली-अंग्रेजी भावानुवाद सहित)

आजुक स्वाध्याय – सहस्रशीर्षा पुरुष पर मन्थन (पुरुषसुक्तम् – सहस्रशीर्षा पुरुषः – अत्यन्त रोचक आ बेर-बेर मननीय पाठ) (मूल स्रोतः ऋग्वेद, मंडल १०, सुक्त ९०) आइ भोरे-भोर माँ शारदाक दर्शन भेल। ओना त माता सरस्वतीक बीणा सदिखन बजिते रहैत अछि, तेँ हम सब विद्या-अविद्या बीच भेद करैत अपन कर्तव्य-कर्म उचित ढंग सँ कय पबैत छी, पुरुषसुक्तः – सहस्रशीर्षा पुरुषः (अत्यन्त मननीय पाठ मैथिली-अंग्रेजी भावानुवाद सहित)

मैथिली फिल्म ‘लेबर’ के तैयारी जोर पर

मैथिली फिल्म ‘लेबर’ – जबरदस्त तैयारी संग टीम निर्माण भ’ रहल अछि मैथिली फिल्म जगत सँ एकटा आर बड पैघ खुशखबरी अछि। कौलीवुड (काठमांडू) सँ फिल्म निर्देशक पूर्णेन्दु के. झा द्वारा ‘लेबर’ सिनेमाक आधारभूत तैयारी लगभग पूरा कय लेल जेबाक जनतब भेटल अछि। बहुत जल्द पात्र चयन लेल अडिसन आ सूटिंग सब आरम्भ होयत। तदनुसार मैथिली फिल्म ‘लेबर’ के तैयारी जोर पर

प्रिया मल्लिक – चर्चित मैथिली गायिका

पोस्ट साभार फेसबुकः श्री अनूप नारायण सिंह जीक वाल सँ (हिन्दी सँ मैथिली मे रूपान्तरित – प्रवीण नारायण चौधरी) #मिलिए_पटना_की_फुलझड़ी_प्रिया_मल्लिक_से – मूल शीर्षक मे प्रकाशित ई लेख अत्यन्त आकर्षक आ गर्वबोध करबयवला लागल, तेँ साभार फेसबुक एकर मैथिली रूपान्तरण एतय राखि रहल छी। खनक आ मखमली आवाज केर मल्लिका प्रिया मल्लिक आइ के तारीख मे प्रिया मल्लिक – चर्चित मैथिली गायिका

किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)   गीताक तेसर अध्याय मे भगवान् कृष्ण मनुष्य द्वारा कर्म केना-केना कयल जाइछ, ताहि पर विशद चर्चा कएने छथि। आइ हम बड़ा संछेप मे एहि अध्यायक समग्रता पर चर्चा करैत किछु बात राखय चाहैत छी –   अध्याय २ मे भगवान् कृष्ण किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)

मैथिली फिल्म केर सफलताक नव सूत्रः लोकसाहित्य

मैथिली फिल्म – सफलताक नया सूत्र भेटि गेल? (तीरभूक्ति पत्रिका मे प्रकाशनार्थ) – प्रवीण नारायण चौधरी बहुल्यजन मे भाषिक चेतनाक प्रसार संगहि मैथिली फिल्म केर सफलताक नव इतिहास लिखाय लागत। ‘राजा सलहेश’ लोकदेवताक रूप मे पूज्य छथि। लगभग-लगभग प्रत्येक गाम मे राजा सलहेश प्रति आस्था रखनिहार बहुजन समाज भेटिये टा जायत। वोटबैंक केर राजनीति भले मैथिली फिल्म केर सफलताक नव सूत्रः लोकसाहित्य

राजा सलहेश फिल्मक किछु मसाला गीत पर उपदेश देबाक पोंगापन्थ

देख रहल छी सबटा….. सन्दर्भ मैथिली फिल्म “राजा सलहेश” जेकरा मैथिली भाषा-साहित्य, संचार, फिल्म आदि सँ सब दिन घृणे रहल, जेकर फेसबुक के पोस्ट पर्यन्त अपन मातृभाषा मैथिली मे कहियो नहि भेल, सेहो आइ ‘राजा सलहेश’ फिल्म रिलीज भेलाक बाद अपन मातृभाषा मैथिली, ताहि मे रिलीज भेल सिनेमा, मिथिलाक लोकदेव राजा सलहेश, हुनक पवित्र श्रुति राजा सलहेश फिल्मक किछु मसाला गीत पर उपदेश देबाक पोंगापन्थ

दहेज प्रथा या कुप्रथा?

दहेज प्रथा कि कुप्रथा   “निश्चित बेटीक माय-बापक हाथ छनि दहेज कै बढ़ावा देबा मे। बेटी केँ दहेजक बलि-वेदी पर चढ़ेबा मे सेहो कतहु न कतहु हमहीं सभ दोषी छी, कियैकि सामर्थ्य सँ बेसी दहेज दऽ कय सरकारी नौकरीबला वर आनि गौरवान्वित महसूस करैत छी। हमरा बूझने जौं ओ सामर्थ्य हम सब अपन बेटी केँ दहेज प्रथा या कुप्रथा?