विद्यापति गीत (नखशिख) – सजनी, अपरुब पेखल रामा
विद्यापति गीत (नखशिख) सजनी, अपरुब पेखल रामा ॥१॥ कनकलता अबलम्बन ऊअल हरिन – हीन हिमधामा ॥२॥ सजनी…. नयन-नलिनि दओ अंजन रंजइ भौंह बिभंग – बिलासा ॥३॥ चकित चकोर-जोर बिधि बाँधल केवल काजर पासा ॥४॥ सजनी….. गिरिबर-गरुअ पयोधर-परसित गिम गज – मोतिक हारा ॥५॥ काम कम्बु भरि कनक-सम्भु परि ढारत सुरसरि-धारा ॥६॥ सजनी…. पएसि पयाग जाग … विद्यापति गीत (नखशिख) – सजनी, अपरुब पेखल रामा









