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विद्यापति गीत (नखशिख) – सजनी, अपरुब पेखल रामा

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विद्यापति गीत
(नखशिख)

सजनी, अपरुब पेखल रामा ॥१॥

कनकलता अबलम्बन ऊअल
हरिन – हीन हिमधामा ॥२॥

सजनी….

नयन-नलिनि दओ अंजन रंजइ
भौंह बिभंग – बिलासा ॥३॥
चकित चकोर-जोर बिधि बाँधल
केवल काजर पासा ॥४॥

सजनी…..

गिरिबर-गरुअ पयोधर-परसित
गिम गज – मोतिक हारा ॥५॥
काम कम्बु भरि कनक-सम्भु परि
ढारत सुरसरि-धारा ॥६॥

सजनी….

पएसि पयाग जाग सत जागइ
सोइ पाबए बहुभागी ॥७॥
विद्यापति कह गोकुल-नायक
गोपी जन अनुरागी ॥८॥

सजनी, अपरुब पेखल रामा !!

शब्दार्थः

अपरुबः अपूर्व, पेखलः देखल, रामाः सुन्दरी, कनकलताः सोनाक लत्ती समान (देह), ऊअलः उदित भेल, हरिन-हीन हिमधामाः निष्कलंक चन्द्र (मुख) ।

नलिनिः कमलिनी, दओः दुइ, अंजनः आँखि, रंजइः सुशोभित अछि, भौंह बिभंग बिलासाः कुटिल कटीला भौंह – भौं केर भाव भंगिमा, चकित चकोर – चौंकैत चकोर, जोर – जोड़ा, बिधि – विधाता (ब्रह्मा), बाँधल – बान्हल, केवल काजर पासा – केवल कारी डोरी सँ ।

गिरिबर-गरुअ – उन्नत पर्वत, पयोधरः स्तन (कुच), परसितः स्पर्श करैत, गिम – कण्ठ, गज-मोतिक हाराः गजमुक्ताक माला, काम कम्बु भरिः कामदेव शंख मे भरिकय, कनक-सम्भु परिः सोनाक महादेव पर, ढारत सुरसरि धाराः गंगाक धारा ढारि रहल होइथ ।

पएसिः पैसिकय, पयागः प्रयाग मे, जागः यज्ञ, सत जागइः सैकड़ों यज्ञ कय रहल हो
सोइ पाबए बहुभागीः से बहुभागी (अत्यन्त सौभाग्यशाली) टा पाबैछ, विद्यापति कह गोकुल-नायकः विद्यापति कहैत छथि जे ई भाव गोकुल-नायक (कृष्ण), गोपी जन अनुरागीः गोपी आ अनुरागी लोक सँ कहि रहल छथि ।

भावार्थः

हे सखी ! आइ हम एक अपूर्व सुन्दरी केँ देखलहुँ जिनकर मुखमण्डल मानू कोनो स्वर्णलता (सोनाक लत्ती) मे उदित भेल निष्कलंकित चन्द्रमाक समान लागि रहल छल ।

हुनक कमलिनी समान दुइ आँखिक शोभा बीच भौंहक बिलास (टेढ़-गति – भाव भंगिमा) एहेन छल जेना चकित चकोर (चौंकैत चकोर) केर जोड़ा केँ विधाता खाली कारी डोरी सँ बान्हि रखने होइथ ।

उन्नत पर्वत समान हुनक पयोधर (स्तन, कुच) केँ स्पर्श करैत कण्ठ मे पहिरल गज-मोतीक हार (गजमुक्ताक माला) एहेन लगैत छल मानू कामदेव कम्बु (शंख) मे भरने सुरसरि (गंगाजल) केर धार कनक-सम्भु (सोनाक महादेव) पर ढारि रहल होइथ ।

प्रयाग मे पैसिकय जे सैकड़ों यज्ञ करैत अछि से बड़भागी टा एहेन सुन्दरि प्राप्त करैत अछि । विद्यापति कवि कहैत छथि जे गोकुल-नायक ‘श्रीकृष्ण’ गोपी लोकनिक अनुरागी (प्रेमी) छथि ।

हरिः हरः!!

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