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मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल एक क्रान्तिकारी डेगः प्रत्यक्ष प्रमाण मुम्बइ साहित्यिक बैसार

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प्रत्यक्षं किं प्रमाणम् – एमएलएफ सँ मुम्बइ-मैथिल-क्रान्ति

प्रत्यक्षहि जँ आँखिक सोझें मे सत्य देखब त प्रमाणक कोनो आवश्यकता नहि रहत । कतेक लोक भगवानक माया देखि पबैत छथि, कतेक लोक अबूझ रहि भगवान हेबाक नहि हेबाक भ्रम मे रहैत छथि । मिथिला मे बहुते एहेन मीमांसक सब भेलाह जे अप्रत्यक्ष भगवान् केँ प्रत्यक्ष विश्वास करबाक लेल कोनो तर्क नहि देलनि, बल्कि जीवनक आचार-विचार आ गुण-अवगुण सभक सुन्दर समीक्षा करैत एकटा समय आओत जे अहाँ अप्रत्यक्ष भगवानक प्रत्यक्ष अनुभूति कय सकैत छी तेकर वकालत कयलनि । ओ लोकनि मानव जीवन, घर-गृहस्थी, कर्म-कर्तव्य आ उचित-अनुचितक स्वयं निर्णय सँ आदर्श जीवन जिबैत ‘आत्मा-परमात्मा तत्त्व’ केँ आत्मसात करबाक विषय-सन्दर्भ एवं शिक्षा-संस्कार पर जोर दैत रहलाह । एहने मीमांसक मे भेल छथि “मण्डन मिश्र” ।

आब एकटा उदाहरण दैत छी । एमएलएफ यानि “मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल” – जेकर छठम् संस्करण हालहि ३-५ अप्रैल मुम्बइ-मलाड केर मडगाँव मे भेल । एहि सँ पूर्व २०२३ मे सेहो एहि स्थान मे भेल छल । मैथिली भाषा-साहित्यक संग कला, रंगकर्म, फिल्म आ सखी-बहिनपाक सम्मिश्रण मे ई आयोजन ‘रूपवीर बंगला’ मे भेल छल, जे बंगला एहि वर्ष कोनो आरे लोकक हाथे बिका गेल ध्वस्त अबस्था मे नजरि पड़ल । मुदा रूपवीर हेरा गेल त कि भेलैक, मडगाँव मे बनब-टूटब सामान्य बात भेल, जेना फिल्म केर सूटिंग लेल सेट केँ बनब-टूटब । काज भेल, बात खतम । खिस्सा खतम – पैसा हजम वाली बात । एहि वर्ष रूपवीरबा ‘बीबी’ मे परिणत भ’ ‘बीबी हाउस’ मे ई सुन्दर-शानदार आ महत्वपूर्ण आयोजन फेर भेल आ से पहिने सँ आर बेसी नीक आ जबरदस्त भेल । कारण पुछू केना ?

मुम्बइ मे मैथिल सब बहुते समय सँ रहैत आबि रहल छथि । मुदा निजत्वक मूल अपन भाषा आ साहित्य सँ मानू ‘खारा समुद्री पानिक खारापन मे सुखाड़’ लागल छलन्हि । २०२३ मे एक बेर ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ केर जादू चलल, मुम्बइ मैथिल जागि गेलाह । भाषा-साहित्य प्रति सचेतना आ सकारात्मक दृष्टि पबिते २०२६ मे हुनका लोकनिक सहभागिता आ प्रस्तुति मे जे उत्कर्ष देखायल ताहि पर एकटा पोथी लिख देब तैयो नहि पूरत । चूँकि मैथिली पोथी किनयवलाक एखनहुँ कमी अछि, तेँ पोथी लिखबाक हिम्मत एखन नहि अछि हमरा । बस छोट-छोट पोस्टे टा लिखिकय कोहुना पाठक सब केँ जोड़िकय रखनाइये हमरा सन-सन अदना मनुख लेल काफी अछि ।

त कहय चाहब – मुम्बइ केर लगभग ३०-४० लाख मैथिल जनसंख्या मे २०० लोकक आसपास एहि बेर प्रत्यक्ष सहभागिता देलनि आ हुनका सब मे रहल साहित्यिक सामर्थ्य केँ एकटा विशेष सत्र केर माध्यम सँ प्रस्तुत कयलनि । ताहि पर पहिने वर्णन कय चुकल छी – नाम सहित । साहित्य मे, फिल्म मे, मैथिली संगहि अन्य भारतीय भाषाक तुलनात्मक विवेचना मे, डहकन मे, गीत-गजल मे, कवि सम्मेलन मे, सत्र समन्वय मे, विमर्शक वक्ता मे, भोजनभात आ अतिथि सभक रहवास मे आ हमरा सन-सन दुइ-चारि बहकलाल सब लेल बिच पर, रिसौर्ट मे, रेस्तराँ मे, बीबी हाउस के प्राइवेट हौल मे, ग्रीन रूम मे, अगल-बगल सौंसे मुम्बई मैथिल्स केर जोरदार सहभागिता रहल से ‘प्रत्यक्ष प्रमाण’ छल जे एमएलएफ कोन रूपे क्रान्ति आ नया ऊर्जा उत्पन्न करैछ मैथिलीभाषी समुदाय लेल ।

आइ ई देखि मन आह्लादित अछि जे भास्करानन्द झा भास्कर केर सम्पादन मे मुम्बइ साहित्यिक बैसार मे प्रस्तुत काव्य-रचना सँ लैत किछु आर अतिरिक्त विषय-सन्दर्भ सहितक पुस्तक प्रकाशित कयल गेल अछि । एहि पुस्तक पर वरिष्ठ साहित्यकार-समालोचक केदार कानन द्वारा समीक्षा पढ़ल । बहुत प्रसन्नता भेटल । ओनाहू आइ एमएलएफ संयोजक विनोद कुमार झा सरकार सँ दूरभाष पर एक घन्टा बतियायल रही – पोस्ट एमएलएफ २०२६ सन्दर्भक विभिन्न बात । आब एखन बेसी समय नहि लेब – सीधे प्रस्तुति अछि आदरणीय कानन सर केर समीक्षाः प्रत्यक्ष केँ कोनो प्रमाणक आवश्यकता नहि ।

‘मुम्बइ साहित्यिक बैसार’ पर आधारित पुस्तक ‘गामसं गेट-वे धरि’ पर केदार कानन केर समीक्षा

गामसं‌ गेट-वे‌ धरि‌

मुम्ब‌इ‌ साहित्योत्सवमे‌ अनेक‌ सार्थक‌ प्रयास‌ भेल‌, जाहिमे‌ एक‌ सझिया‌ कविता‌ संकलनक‌ प्रकाशन‌ सेहो‌ थिक‌।ई‌ मुम्ब‌इ‌ साहित्यिक‌ बैसारक‌ प्रस्तुति‌ थिक‌ । एहि‌ पोथीक‌ सम्पादन‌ भास्करानन्द‌ झा‌ भास्कर‌ कयलनि‌ अछि‌ । भास्करजी‌ अपन‌ भूमिकामे‌ साहित्यिक‌ बैसारक‌ इतिहास‌ आ‌ तकर‌ सार्थकताक‌ गप‌ करैत‌ लिखैत‌ छथि‌ जे‌ सझिया‌ काव्य‌ संग्रहक‌ सभसं‌ सुन्दर‌ पक्ष‌ ई‌ होइत‌ अछि‌ जे‌ एतय‌ अनेक‌ स्वर‌ एक‌ संग‌ सुनाइ‌ पडैत‌ अछि‌ । प्रत्येक‌ रचनाकार‌ अपन‌ दृष्टिकोणसं‌ जीवनकें‌ देखैत‌ अछि‌ आ‌ ओहि‌ अनुभवकें‌ शब्द‌ दैत‌ अछि‌ । परिणामस्वरूप‌‌ पाठककें‌ एक‌ बहुआयामी‌ साहित्यिक‌ संसार‌ भेटैत‌ अछि‌ ।

संशय‌ नहि‌ जे‌ एहि‌ पोथीमे‌ एहन‌ संसार‌ उपलब्ध‌ अछि‌ । विभिन्न‌ कवि‌, विभिन्न‌ राग‌, विभिन्न‌ रंग‌ । अपन‌ अनुभवक‌ संसारसं‌ बहुआयामी‌ आ‌ बहुरंगी‌ चित्रक‌ अभिव्यक्ति‌ एहि‌ संग्रहमे‌ भेल‌ अछि‌ । प्रवासमे‌ बसल‌ कविलोकनिककें‌ मिथिला‌ आ‌ मैथिली‌ सदैव‌ मोन‌ रहैत‌ छनि‌, से‌ एक‌ सुखद‌ प्रतीति‌ थिक‌ । संकलनक‌ आधा‌ कविता‌ मिथिलामय‌ अछि‌ ।

किछु‌ वरिष्ठ‌ आ‌ स्थापित‌ कवि‌/कवयित्री‌ जेना‌ विभारानी‌, विनोद‌ कुमार‌ झा, सदरे‌ आलम‌ गौहर, दीपिका‌ झा, भास्करानन्द‌ भास्करक‌ अतिरिक्त‌ ‌ कृष्ण‌ कुमार‌ झा‌ अन्वेषक‌, दीपक‌ कुमार‌ झा‌, पंकज‌ कुमार‌ झा‌, पंकज‌ पाठक‌, प्रज्ञा‌ मिश्र‌, प्रतिभा‌ झा‌ उन्मेषा‌, माला‌ झा‌, राजीव‌ सिंह‌, रामेश्वर‌ झा‌ आदिक‌ कविता‌ आकर्षित‌ करैत‌ अछि‌ ।

अम्बिका‌ जीक‌ कविताक‌ भाव‌ तं‌ नीक‌ मुदा‌ हिन्दीक‌ अनेक‌ शब्दक‌ प्रयोग‌ अबस्स‌ खटकैत‌ अछि‌ । ई‌ सम्पादक‌ महोदयक‌ दायित्व‌ छलनि‌‌ । अरविन्द‌ झा‌ आ‌ अर्चना झा‌ मे‌ अर्चना‌ जीक‌ कविता‌ बेसी‌ अर्थगर्भ‌ बुझायल‌ । दयानन्द‌ जी‌ अपन‌ कवितामे‌ व्यंग्यकें‌ प्रधानता‌ देलनि‌ अछि‌, जे‌ नीक‌ लगैत‌ अछि‌ । तहिना‌ धर्मेन्द्र‌ कुमार‌ झा‌ आ‌ प्रभुकान्त‌‌ मिश्रा, मनीष‌ झा‌, राजेश‌ कुमार‌ राय‌, श्याम‌ कुमार‌ झा‌, संतोष‌ खान‌क‌ कविता‌ सभमे‌ शब्दक‌ चयन‌, कहबाक‌ भंगिमा‌ नीक‌ लगैत‌ अछि‌ मुदा‌ थोडेक‌ आरो‌ मेहनतिक‌ आवश्यकता‌ बुझाइत‌ अछि‌ । निस्संदेह‌ ई‌ लोकनि‌ मैथिली‌ कविताक‌ निस्सन‌ डेग‌ छथि‌ । मुदा‌ अध्ययन‌ आ‌ अभ्यास‌ सभक‌ लेल‌ जरूरी‌ होइत‌ छैक‌‌ ।

डा‌ ममता‌ झाक‌ पांच‌ गोट‌ लघुकथा‌ सेहो‌ एहि‌ पोथीमे‌ सम्मिलित‌ छनि‌ आ‌ नीक‌ लघुकथा‌ छनि‌ । मार्मिक‌ । सघन‌ संवेदनासं‌ भरल‌ ।

ई‌ पोथी‌ एक‌ सार्थक‌ प्रयास‌ थिक‌ आ‌ ई‌ प्रमाणित‌ करैत‌ अछि‌ जे‌ संभावनाक‌ समस्त‌ द्वार‌ खुजल‌ रहैत‌ अछि‌ । निरन्तर‌ होइत‌ साहित्यिक‌ बैसारमे‌ अग्रजक‌ दायित्व‌ थिक‌ जे‌ कविता‌ सभ‌ पर‌ बहस‌ हो‌, कविलोकनिकें‌ प्रशिक्षित‌ कयल‌ जानि‌, गंभीरतासं‌ कविताक‌ आलोचना‌ हो‌ तखन‌ एक‌ विशिष्ट‌ उपलब्धि‌ सोझां‌ आबि‌ सकैत‌ अछि‌ ।

विनोद‌ सरकार‌ भाइ‌, विभाजी‌, सदरे‌ आलम‌ गौहर‌ जीकें‌ एहन‌ भार‌ उठयबाक‌ हम‌ अनुरोध‌ करबनि‌ । भास्कर‌ जी‌ सचढ‌ साहित्यिक‌ छथि‌, हुनको‌सं‌ यैह‌ अनुरोध‌ ।

नवारम्भसं‌ प्रकाशित‌ एहि‌ पोथीक‌ स्वागत‌ आ‌ अभिनन्दन‌ । अगिला‌ बरख‌ एहूसं‌ निस्सन‌ संग्रह‌ प्रकाशित‌ हो‌, तकर‌ कामना‌ करैत‌ एहि‌ संग्रहमे‌ सम्मिलित‌ सभ‌ कविकें‌ हार्दिक‌ बधाइ‌ आ‌ शुभकामना‌ ।

– केदार कानन

उपरोक्त समीक्षा पढ़िकय विश्वास बढ़ल जे ई पुस्तक प्रत्येक मुम्बइया मैथिल्स केर घर धरि अभियान चलाकय पहुँचायल जाय । कविभाव केर सम्प्रेषण घर-घर पाठक धरि पहुँचय ई हमर कामना अछि ।

हरिः हरः!!

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