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प्रवीण नारायण चौधरी

दुलरा दयाल आ बहुरा गोरहिन के कथा

लेखक: निशिकांत ठाकुर, जाले संकलन: अनिल झा बिसरैत लोकगाथा ************** नृत्य चलि रहल छल। किशोरवय राजकुमार पूर्णतया नृत्य में मग्न। नर्तक आ नृत्य दू नहि छलै एकाकार भ गेल रहै। अंग संचालनक गति देख दर्शक मंत्रमुग्ध आ विस्मित छलाह। हवा – बसात, लता-गुल्म, गाछ-बिरिछ सब संग द रहल छलै। चिड़ै-चुनमुन्नी सेहो निमग्न भ कलरव बिसरि दुलरा दयाल आ बहुरा गोरहिन के कथा

मिथिलाक प्रसिद्ध प्रेमी जोड़ा के सब भेलाह?

मिथिलाक प्रसिद्ध प्रेमी जोड़ा के सब भेलाह? संचारकर्मी मित्र (भाइ) नवीन कर्ण फोन कयलनि आ पुछलनि जे मिथिलाक प्रसिद्ध युगल प्रेमीक किछु नाम हमर नजरि मे हो तँ हुनका एक गीति-रचना वास्ते सुझाव रूप मे कहल जाय। हम अकबका गेलहुँ। न ओतेक अध्ययन आ न तेहेन कोनो चट् दय कहयवला नाम अभरल। कनी सोचिकय सलहेश-कुसुमाक मिथिलाक प्रसिद्ध प्रेमी जोड़ा के सब भेलाह?

रामचरितमानस मोतीः भरत विरह एवं भरत-हनुमान् मिलन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरत विरह एवं भरत-हनुमान् मिलन  १. श्री रामजीक वनवास सँ वापस अयबाक अवधि केर एकटा दिन बचि गेल छल, अतएव नगर भरिक लोक खूब आतुर भ’ रहल छथि। रामक वियोग मे दुब्बर भेल स्त्री-पुरुष जतय-ततय विचार कय रहल छथि जे कि बात छैक, श्री राम एखन धरि कियैक रामचरितमानस मोतीः भरत विरह एवं भरत-हनुमान् मिलन

रामचरितमानस मोतीः उत्तरकाण्ड मंगलाचरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सप्तम सोपान-मंगलाचरण श्लोक : केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं शोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा सुप्रसन्नम्‌। पाणौ नाराचचापं कपिनिकरयुतं बन्धुना सेव्यमानं। नौमीड्यं जानकीशं रघुवरमनिशं पुष्पकारूढरामम्‌॥१। मोर केर कण्ठक आभा जेहेन (हरिताभ) नीलवर्ण, देवता लोकनि मे श्रेष्ठ, ब्राह्मण (भृगुजी) केर चरणकमल केर चिह्न सँ सुशोभित, शोभा सँ पूर्ण, पीताम्बरधारी, कमल नेत्र, सदा परम प्रसन्न, रामचरितमानस मोतीः उत्तरकाण्ड मंगलाचरण

रामचरितमानस मोतीः पुष्पक विमान पर चढ़िकय श्री सीता-रामजीक अवध लेल प्रस्थान, श्री रामचरित्र केर महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती पुष्पक विमान पर चढ़िकय श्री सीता-रामजीक अवध लेल प्रस्थान, श्री रामचरित्र केर महिमा प्रभु श्री रामजी द्वारा रीछ-बानर सब केँ अपन-अपन स्थान पर जेबाक आज्ञा आ सब केँ कृपा-आशीष प्रदान करबाक बाद… १. सब रीछ-बानर अपन घर घुरबाक आज्ञा पाबि घर जेबाक खुशी त पबैत अछि लेकिन प्रभुक रामचरितमानस मोतीः पुष्पक विमान पर चढ़िकय श्री सीता-रामजीक अवध लेल प्रस्थान, श्री रामचरित्र केर महिमा

रामचरितमानस मोतीः विभीषण द्वारा वस्त्राभूषण बरसेनाय आर बानर-भालु द्वारा से पहिरनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विभीषण द्वारा वस्त्राभूषण बरसेनाय आर बानर-भालु द्वारा से पहिरनाय १. प्रभु श्री रामजी सँ आशीर्वाद पाबि विभीषणजी महल गेलाह आ ओ मणिक समूह (रत्न) सब सँ आ वस्त्र सब सँ विमान केँ भरि देलनि। फेर ओहि पुष्पक विमान केँ आनिकय प्रभुक सोझाँ राखि देलनि। कृपासागर श्री रामजी हँसिकय रामचरितमानस मोतीः विभीषण द्वारा वस्त्राभूषण बरसेनाय आर बानर-भालु द्वारा से पहिरनाय

गरीब (आत्मकथा)

संस्मरण-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी गरीब   गरीब शब्दक अर्थ होइछ – दीन, हीन, दरिद्र, निर्धन, अकिंचन, कंगाल संग एकटा अर्थ ‘नम्र’ सेहो कहल गेल अछि। आरो कतिपय पर्यायवाची शब्द सब गरीब लेल प्रयोग/व्यवहार मे अबिते अछि। अभावग्रस्त, विपन्न, कमजोर, बेसहारा, असहाय, आदि। भगवान् केँ सेहो दीनक नाथ ‘दीनानाथ’, गरीबक नाथ ‘गरीबनाथ’ आदिक भाव मे गरीब (आत्मकथा)

रामचरितमानस मोतीः विभीषणजीक प्रार्थना, श्री रामजी द्वारा भरतजीक प्रेमदशाक वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचबाक अनुरोध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विभीषणजीक प्रार्थना, श्री रामजी द्वारा भरतजीक प्रेमदशाक वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचबाक अनुरोध देवता, इन्द्र, ब्रह्मा आ शिवजी द्वारा श्री रामजीक स्तुति उपरान्त – १. जखन शिवजी विनती कयकेँ चलि गेलाह, तखन विभीषणजी प्रभु लग अयलाह आ चरण मे मस्तक नमाकय कोमल स्वर मे बजलाह – हे शार्गं धनुष रामचरितमानस मोतीः विभीषणजीक प्रार्थना, श्री रामजी द्वारा भरतजीक प्रेमदशाक वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचबाक अनुरोध

रामचरितमानस मोतीः देवता लोकनिक स्तुति, इंद्र केर अमृत वर्षा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती देवता लोकनिक स्तुति, इंद्र केर अमृत वर्षा पराम्बा जानकीक अग्नि परीक्षा उपरान्त…. १. देवता सब हर्षित भ’ कय फूल बरसाबय लगलाह। आकाश मे डंका बाजय लागल। किन्नर सब गीत गाबय लागल। विमान सब पर चढ़ल अप्सरा लोकनि नाचय लगलीह। जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार। देखि भालु कपि रामचरितमानस मोतीः देवता लोकनिक स्तुति, इंद्र केर अमृत वर्षा

गम्भीरता सँ काज करैत रहू

हिसाब सँ देखल जाय त मैथिली आ मिथिलाक स्थिति मे क्रान्तिकारी परिवर्तन आबि चुकल छैक। सामाजिक संजाल केर अद्भुत सहयोग सँ विकासक परिदृश्य स्पष्ट देखि सकैत अछि सब कियो। एहि जागरणक सुखद परिणाम ई छैक जे अधिकाधिक लोक अपन मौलिक सन्दर्भ लेल मुखर भ’ काज कय रहल अछि। लोकक टिका-टिप्पणी सब दिनके बात थिकैक, प्रोत्साहित गम्भीरता सँ काज करैत रहू