सन्तान आ जनक – एक छोट परञ्च महत्वपूर्ण दर्शन
सन्तान आ जनक जखन-जखन चिन्तन करब आ स्वयं पर केन्द्रित होयब त पता लागत जे हम-अहाँ वास्तव मे के छी। के छी हम-अहाँ? हम प्रवीण, हम वन्दना, हम पंकज, हम कल्पना, हम रूबी त हम रंजना… ई ‘हम आ विभिन्न नाम’ यथार्थतः एहि सुन्दर संसारक सुन्दर सन्तान सब छी। सन्तान जँ अपन कर्तव्य बुझि … सन्तान आ जनक – एक छोट परञ्च महत्वपूर्ण दर्शन






