मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड पाँचम अध्याय – रामजीक किष्किन्धा मे चतुर्मास एवं विरह-वर्णन
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – पाँचम अध्याय रामजीक किष्किन्धा मे चतुर्मास एवं विरह-वर्णन ।चौपाइ। एक समय तहि गिरिमणि-सानु । विरही राम चरण-गिरि भानु ॥१॥ असह विरह लक्ष्मण काँ कहल । सीता हरलक राक्षस रहल ॥२॥ छथि वा नहि जिबयित के जान । हृदय हमर थिक कुलिश समान … मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड पाँचम अध्याय – रामजीक किष्किन्धा मे चतुर्मास एवं विरह-वर्णन





