आध्यात्मिक चिन्तन
– प्रवीण नारायण चौधरी
स्वाध्याय सँ भेटल ‘अर्धनारीश्वर’ प्रति ई वाक्यांश
ब्रह्माजी सृष्टि निर्माण कयलनि, परञ्च सृजित जीव केर आयु समाप्ति पछाति बेर-बेर हमरे सृजन करय पड़त से सोचि सोचमग्न भ’ गेलाह। कतबो विचार कयलनि कोनो बाट नहि सुझेलनि। तखन ओ महादेवक आराधना कय एहि ओझरायल गुत्थी केँ सोझरेबाक यत्न कयलनि। ताहि समय शिव अपन ‘अर्धनारीश्वर’ स्वरूप प्रकट कय केँ शिव ओ शक्तिक संयुक्त रूप सँ सृष्टि अनवरत चलबाक सन्देश देलनि। यैह ‘अर्धनारीश्वर’ रूप मे ब्रह्माजी केँ प्रजननशील जीव निर्माणक संकेत कयलनि। तत्पश्चात् सृष्टि मे पुरुष ओ नारी (पूल्लिंग आ स्त्रीलिंग) केर संयोग सँ सृष्टि अनवरत चलि रहल अछि।
तदोपरान्त ऋषि-मुनि व देवता सहित अनेकों सृष्टि-समाज अर्धनारीश्वर प्रति स्तुतिगान आ अन्यान्य विभिन्न महिमा गायन कएने छथि।
किछु तथ्य जे हमरा बहुत प्रेरित कयलकः
शिव आर शक्ति केर सम्बन्ध
शक्ति शिव केर अभिभाज्य अंग छथि। शिव नर केर द्योतक छथि तँ शक्ति नारी केर। ओ एक दोसरक पूरक छथि। शिव केर बिना शक्तिक अथवा शक्तिक बिना शिव केर कोनो अस्तित्व नहि अछि। शिव अकर्ता छथि। ओ संकल्प मात्र करैत छथि; शक्ति संकल्प सिद्धी करैत छथि।
शिव कारण छथि; शक्ति कारक।
शिव संकल्प करैत छथि; शक्ति संकल्प सिद्धी।
शक्ति जागृत अवस्था छथि; शिव सुसुप्तावस्था।
शक्ति मस्तिष्क छथि; शिव हृदय।
शिव ब्रह्मा छथि; शक्ति सरस्वती।
शिव विष्णु छथि; शक्त्ति लक्ष्मी।
शिव महादेव छथि; शक्ति पार्वती।
शिव रुद्र छथि; शक्ति महाकाली।
शिव सागर केर जल समान छथि, शक्ति सागर केर लहर छथि।
शिव सागर केर जल समान छथि तथा शक्ति लहरक समान छथि – लहर थिक जल केर वेग। जल बिना लहरक कोन अस्तित्व अछि? आर वेग बिना सागर अथवा ओकर जल केर? यैह थिक शिव व हुनक शक्ति केर सम्बन्ध!
– स्रोतः विकिपिडिया
अपने सब सेहो अलग-अलग स्थान पर जे किछु महत्वपूर्ण पढ़ने होइ तेकर योग चाही।
हरिः हरः!!
