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मिथिलाक्षेत्रक कन्याशिक्षा आ तत्सम्बन्धी सामाजिक विमर्श

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विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाक्षेत्रक कन्याशिक्षा आ तत्सम्बन्धी सामाजिक विमर्श
 
अपन मिथिला मे कन्या शिक्षाक प्रयास बहुतो दशक सँ होइत आबि रहल अछि। लेकिन उल्लेखनीय सफलता १९८० केर दशक बादे भेटब शुरू भेल कहि सकैत छी। महिला साक्षरताक तथ्यांक अपन-अपन स्थानक देखब त ओहि सँ ई स्पष्ट भ’ जायत। आइ २०२४ ई. धरि स्थिति यैह अछि जे विरले कियो कन्या केँ अनपढ़-अशिक्षित रखैत अछि। हमर अनुमान-अध्ययन अनुसार वर्तमान मिथिला समाज मे कन्याशिक्षा माध्यमिक स्तर (मैट्रिक) अथवा मध्य विद्यालय (मिडिल स्कूल) धरिक पढ़ाइ मुताबिक साक्षरता १००% भ’ गेल कहि सकैत छी।
 
बेसी लोक रोजीरोटी लेल प्रवास क्षेत्र सेहो गेल मिथिला सँ। तहिना कतेको सम्पत्तिशाली लोक सेहो अपन मूल ग्राम छोड़ि शहरी परिवेशक जीवन पसिन करैत प्रवासी बनि गेल अछि। एहि प्रवासी मैथिल सभक परिवारक आँकड़ा देखब त साक्षरता दर बेसी नीक देखायत। सक्षम-सम्भ्रान्त वर्गक साक्षरता दर सब दिने नीक रहल, ताहि तरहें १००% साक्षरता कन्या वर्ग मे सेहो स्वाभाविक सत्य थिक।
 
प्रवासक संसार मे मैथिल श्रमिक वर्गक बाल-बच्चा शहर मे बिलटैत देखाइछ। बहुतो संघर्षशील आ मेहनती श्रमिक अपन बाल-बच्चा केँ अपना सँ बेहतर परवरिश (लालन-पालन) देबाक यत्न करैत अछि। मुदा अधिकांश बोनिहार अत्यल्प बोइन सँ शिक्षाक सपना पूरा नहि कय पबैछ। अत्यन्त अभाव मे जिबय लेल बाध्य परिवारक बच्चा सभक हाल नीक नहि भ’ पबैछ। ओकरा सभक समुचित रेख-देख सीमित आमदनी सँ माय-बाप नहि कय पबैछ। त, ओ धियापुता सब स्कूल जेबाक बदला सड़क पर छिड़ियायल अबस्था मे संघर्ष करैत देखाइछ।
 
गरीबी मे कतेको बाल मजदूर बनिकय, कतेको भीख तक मांगिकय गुजारा चलबय लगैछ। एहेन मे साक्षरता दर आ ताहू मे कन्याशिक्षाक हिसाब निकालब बहुत मोस्किल लगैछ हमरा। तथापि एकटा बात कहब जे श्रमिक-मजदूरक बेटी सब घरक काज सँ लैत पढ़य-लिखय मे सेहो अत्यन्त कुशाग्र भेल करैत अछि। एहि तरहें तथ्यांक ५०-५० केर हिसाब सँ शिक्षित-अशिक्षित भेटैछ कहब त अतिश्योक्ति नहि होयत।
 
आब १०० प्लस ५० डिवाइड बाय २ कयला सँ सीधा अंक अबैछ ओ भेल ७५% कन्या पूर्ण साक्षर छथि मिथिला मे।
 
रोजी-रोजगार प्रति सेहो हिनका सब मे बड पैघ सचेतनाक प्रसार भ’ रहल अछि। ग्रामीण क्षेत्र मे उत्पादकताक अभाव सँ ई वर्ग बेचैन छथि। तेँ ईहो सब शहर दिश भागय लेल व्याकुल देखल जाइत छथि। जखन कि एहि शहरोन्मुख आबादीक कारण मिथिलाक अर्थव्यवस्था पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ि रहल अछि। मात्र अर्थव्यवस्था टा नहि, सामाजिक व्यवस्था व सभ्यता पर्यन्त बेतरतीब ढंग सँ प्रभावित होइत देखल जा रहल अछि। गाम-घर मे विवाह तक करय लेल तैयार नहि अछि बेसी कन्या। आर, अन्तर्जातीय विवाह, अन्तर्संस्कृति विवाह, बिन ब्याहो कतेको कन्या द्वारा परदेशहि मे जीवनयापनक उदाहरण – ई सब खतरा के सूचकांक नंघबाक संकेत कय रहल अछि।
 
राज्य केर सामाजिक व्यवस्थापन मे छूछ नारा टा देल जाइछ। कथित समाजवाद आ सामाजिक न्याय आदिक मनलुभावन शब्द सभक तानाबाना पब्लिक सभा मे रखैत अछि परचट्ट नेता सब – लेकिन जमीनी हालत व हालात पर कोनो समाजशास्त्रीक दृष्टिपत्रक सन्दर्भ तक लेने बिना भूश्कोल प्रशासक सभक मनगढ़न्त योजना जाहि सँ मोट कमीशन आ बँटेदारक निज स्वार्थक पूर्ति होयत, ताहि पर देशक खजाना लुटैत-लुटबबैत राज्य व्यवस्था बढि रहल अछि।
 
एहि सामाजिक स्खलन केँ रोकबाक लेल मौलिक संस्कार मात्र कारगर होयत। ग्रामीण उत्पादकता आ रोजी-रोजगारक बढ़ोत्तरी आ खासकय केँ महिला रोजगार पर ध्यान देनाय आवश्यक अछि। राज्य द्वारा संचालित अनेकों उपक्रम केँ ईमानदारी सँ लागू करब आवश्यक अछि। स्वरोजगार बढ़ेबाक लेल उद्यमिता विकासक वास्ते जे किछु बजट निर्धारण कयल जाइछ एकरा उचित रूप सँ हरेक वार्ड (पंचायत) सँ ब्लौक (प्रखण्ड) धरि वितरण करबाक जरूरत अछि। लोकचेतना मे राज्य द्वारा लागू कयल अनेकों योजनाक समुचित जानकारी कराबय सँ लोक मे रोजगारमुखी कार्य लेल सचेतनशीलताक प्रसार अत्यावश्यक अछि।
 
एकरा संगहि समाज स्वयं एकजुटता सँ अपन गामक सब व्यवस्था पर नजरि बनाकय, हरेक समस्या लेल बैसिकय समाधान ताकय, से बहुत जरूरी अछि। संस्कारक स्खलन त तुरन्त ध्येय विषय होबक चाही।
 
हरिः हरः!!

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