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प्रवीण नारायण चौधरी

ब्राह्मण समुदाय प्रति विरोधक भावनाक प्रसारः आजुक राजनीतिक हथियार

ब्राह्मण बनि गेल सभक खेलौना राजनीति हो कि समाज, संस्कृति हो या सभ्यता, विद्या हो या कला – हर क्षेत्र मे ‘ब्राह्मण’ समुदाय पर शाब्दिक प्रहार आइ मानू रिबाज बनल जा रहल अछि । पटना मे ७२मा स्थापना दिवस मना चुकल ‘चेतना समिति’ अपन विधान मुताबिक दशकों-दशकों सँ सारगर्भित ढंग सँ संचालन करैत आबि रहल ब्राह्मण समुदाय प्रति विरोधक भावनाक प्रसारः आजुक राजनीतिक हथियार

धर्मशास्त्र – धार्मिक नियम-उपनियम एवं निषेधाज्ञा – स्वतंत्रता बनाम अनुशासन

लेख-विचार स्वतंत्रता बनाम अनुशासन – चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती अपन पुस्तक ‘द वेदाज’ अन्तर्गत ‘वेदक उपांगः धर्मशास्त्र’ नामक अध्याय मे लिखने छथि । एतय हम किछु सामान्य बात सब कहब । कोनो विषयक विश्लेषण कियो कतबो गहींर करय या कियो कतबो विस्तार सँ करबाक प्रयास करय, मुदा जीवन-काल मे जे असंख्य परिस्थिति सभक सामना करय पड़ैत छैक धर्मशास्त्र – धार्मिक नियम-उपनियम एवं निषेधाज्ञा – स्वतंत्रता बनाम अनुशासन

मैथिली आ लिम्बू भाषा केँ कोशी प्रदेशक सरकारी कामकाज भाषा रूप मे मान्यता लेल आन्दोलन

सरकारी कामकाजक भाषा मे मैथिली आ लिम्बू लागू करबाक मांग संग विराटनगरमे जुलूस-प्रदर्शनी विराटनगर, १९ जुलाई २०२५ । नेपाल मे संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र स्थापना आ नव संविधान घोषणा कयल जेबाक लगभग १० वर्ष बीति रहल अछि । संविधान द्वारा निर्देशित भाषा नीति लेल भाषा आयोगक गठन आ ५ वर्षक समयसीमा भीतर सरकारी कामकाज सम्बन्धी सुझाव मैथिली आ लिम्बू भाषा केँ कोशी प्रदेशक सरकारी कामकाज भाषा रूप मे मान्यता लेल आन्दोलन

मजगूत राष्ट्रीय एकता लेल कोन जरूरीः एकल भाषा या बहुभाषा ?

यूरोप मे भाषाई सह-अस्तित्व: एक सँ अधिक आधिकारिक भाषा वला देश (Article is for introspection by the politicians of Nepal not following the constitutional aspiration of Nepal’s new constitution proclaimed in 2015) दुनियाक कतेको देश एक सँ अधिक भाषा केँ ‘आधिकारिक भाषा’ यानि ‘सरकारी कामकाजक भाषा’ रूप मे मान्यता देने अछि । एहि मे अफ्रीका मजगूत राष्ट्रीय एकता लेल कोन जरूरीः एकल भाषा या बहुभाषा ?

कतय जा रहल छी मिथिला मानव ?

जँ बुझि सकितहुँ हम सब….. – लेख-विचारः प्रवीण नारायण चौधरी मानव रूप मे मानवता केँ पूर्ण रूप मे यदि बुझि सकितियैक त ‘दहेज प्रथा’ कुप्रथा नहि बनैत । राजा जनक सँ सीता संग रामक विवाह होइन्ह, ताहि लेल राजा दशरथ कोनो शर्त नहि लगेलखिन । विवाह पूर्व कोनो तरहक मांग केँ वैधानिक तौर पर ‘दहेज’ कतय जा रहल छी मिथिला मानव ?

धर्मशास्त्रः स्मृति आ सहायक ग्रन्थ

स्मृति आ ओकर सहायक ग्रंथ (उपांग: धर्मशास्त्र, चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती द्वारा, जारी….) मनु, पराशर, याज्ञवल्क्य, गौतम, हरित, यम, विष्णु, शंक, लिखित, बृहस्पति, दक्ष, अंगिरस, प्राचेतस, संवर्त, आसन, अत्रि, आपस्तम्ब, शततप – ई १८ महर्षि सब अपन अलौकिक शक्ति सँ समस्त वेदक विषयवस्तु केँ ग्रहण कयलनि तथा हमरा सब केँ धर्मशास्त्र केर रूप मे ओकर संकलन प्रदान धर्मशास्त्रः स्मृति आ सहायक ग्रन्थ

अध्ययन बिना कोनो व्याख्यान या बयान सामान्य रूप सँ अहितकर होइछ

शिक्षण पेशा मे रही । काल्हि बच्चा सब केँ कि पढ़ायब से आइ नीक सँ अपने पढ़य पड़ैत छल । कारण, तेज बच्चा सब, सेहो अंग्रेजी माध्यमक आवासीय विद्यालय केर बच्चा सब मे तेज श्रेणीक बच्चा केँ देखी जे एक-एक टा बात केँ खोंइचा छोड़ाकय बुझबाक यत्न करय आ फाँकी देनिहार मास्टर साहेब सब अगल-बगल अध्ययन बिना कोनो व्याख्यान या बयान सामान्य रूप सँ अहितकर होइछ

वेदक उपांग – धर्मशास्त्र – शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अत्यन्त पठनीय-मननीय लेख

उपांग: धर्मशास्त्र – चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती ‘शंकराचार्य’ – अपन पुस्तक ‘द वेदाज’ मे पौराणिक लक्ष्य प्राप्तिक मार्ग ई देखल गेल अछि जे पुराण केर पात्र हमरा सभक आदर्श व मार्गदर्शक होइत छथि । हुनका लोकनिक कथा सब पढ़िकय हमरा लोकनि हुनक सद्गुण सभक अनुकरण करबाक लेल प्रेरित भेल करैत छी । यद्यपि ई इच्छा उत्पन्न होइत वेदक उपांग – धर्मशास्त्र – शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अत्यन्त पठनीय-मननीय लेख

चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अद्भुत व्याख्या – काव्य (कविता) – अत्यन्त पठनीय व मननीय लेख

काव्य – कविता – चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती “शंकराचार्य” जँ कोनो नीक कार्य पूरा करबाक अछि, तँ ओकरा तीन तरीका सँ व्यवस्थित कयल जा सकैछ । पहिल, सरकार द्वारा कानून बनेबाक जेकाँ आदेश पारित करब होइछ । एकरा “प्रभु सम्मिति” कहल जाइत छैक, एहि मे स्वामी सेवक केँ आदेश दैत छथि । एतय, चाहे ओ पसिन करय चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अद्भुत व्याख्या – काव्य (कविता) – अत्यन्त पठनीय व मननीय लेख

एक परमात्माक अनेक रूपः शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक शानदार विश्लेषण

एक्के भेला अनेक एक्के टा परमात्मा विभिन्न देवताक रूप मे प्रकट होइत छथि । प्रत्येक भक्त ईश्वर केर कोनो विशेष रूप केर प्रति एकटा विशेष आसक्ति विकसित करैत अछि । प्रत्येक भक्त केर एहि आसक्ति केँ आर प्रबल बनेबाक लेल, परमात्मा कोनो समय कोनो विशेष गुण केँ दोसरक तुलना मे गौण कय दैत छथि तथा एक परमात्माक अनेक रूपः शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक शानदार विश्लेषण