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ब्राह्मण समुदाय प्रति विरोधक भावनाक प्रसारः आजुक राजनीतिक हथियार

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ब्राह्मण बनि गेल सभक खेलौना

राजनीति हो कि समाज, संस्कृति हो या सभ्यता, विद्या हो या कला – हर क्षेत्र मे ‘ब्राह्मण’ समुदाय पर शाब्दिक प्रहार आइ मानू रिबाज बनल जा रहल अछि ।
पटना मे ७२मा स्थापना दिवस मना चुकल ‘चेतना समिति’ अपन विधान मुताबिक दशकों-दशकों सँ सारगर्भित ढंग सँ संचालन करैत आबि रहल अछि । हालहि करीब ३००० (तीन हजार) सदस्य सब केँ सुसूचित कय केँ निर्वाचन प्रक्रिया द्वारा नामांकन-मतदान-मतगणना आदि विधिवत् प्रक्रिया तहत नव ‘कार्यकारिणी समिति’ गठन कयलक अछि । भारतवर्षक यथार्थता यैह छैक जे कतहु भाषा, साहित्य, संस्कृति, सभ्यता व बौद्धिक स्तरक आने कोनो कार्य मे किछेक जातिक लोक आगू आबिकय सहभागिता जनबैत अछि । सदस्यता ग्रहण करय सँ लय कय नेतृत्व प्रदान करबाक कार्य तक यथार्थ अबस्था यैह छैक । एहि तरहें नवगठित कार्यसमिति मे १००% एकल जाति-समुदाय जेकरा आलोचक वर्ग द्वारा “झाझा गाड़ी” केर संज्ञा देल गेल अछि, वैह कार्यसमिति बनल । आर, चेतना समितिक विधान, वास्तविकता आ विडम्बना सब विस्तार सँ बुझने बिना कतेको लोक सब एहि पर कठोर-कुत्सित टिप्पणी करय सँ नहि बचैत छथि । हम एकर आत्मीयता सँ प्रतिकार करैत छी आ एहेन लोक सब केँ पहिने वास्तविकता सँ परिचित होयबाक, तदोपरान्त कोनो कुत्सित टिप्पणी लिखबाक आग्रह करैत छियनि ।
संगहि एकटा बात इहो स्पष्ट करय चाहैत छियनि जे भरि संसार मे नजरि दौड़ाकय देखथि जे भाषा-साहित्य, संस्कृति-सभ्यता व बौद्धिक पक्षक पोषण लेल आभिजात्य वर्गक चेतना आ आम जनसमुदायक चेतना व सक्रियता मे कियैक आ केना अन्तर छैक । एलिट्स आ मास बीच कन्फ्लिक्ट उपर सैकड़ों-हजारों विद्वान् विगत कतेको दशक मे अनेकों रिसर्च कयलनि अछि । कनेक ओहि सब ध्यान देथि ।
एखनहिं टका-पैसा आ खरातक जोगाड़ भ’ जाय ‘चेतना समिति’ वा अन्य भाषा-साहित्य, संस्कृति-सभ्यता व बौद्धिक मंच मे, फेर देखू जे कतेक बड़का भीड़ लागि जाइत अछि । जेना पंचायतक चुनाव, विधानसभा-लोकसभा आ विभिन्न तहक राजनीतिक चुनाव – अलेलो-बलेल सब अपना केँ टका आ संख्याबले नेते बुझि चुनाव लड़य आगू आबि जाइछ । नेता लेल कोनो योग्यता संविधानहु द्वारा निर्धारित नहि छैक । काल्हिये धर्मशास्त्र पर शंकराचार्य (चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती) केर व्याख्यान (लेख) पढ़ि रहल छलहुँ जाहि मे ‘प्रजातंत्र’ आ ‘स्वतंत्रता’ जेहेन श्रेष्ठ भावनात्मक आवाज मे बड पैघ खोट ‘बहुलजन बलगर द्वारा अल्पसंख्यक कमजोर पर मनमानीपूर्वक राज करबाक’ निष्कर्ष देने रहथि ।
आइ देखिये रहल छी जे अदौकाल सँ समाज केँ अपन विद्या आ बौद्धिक सामर्थ्य सँ अगुवाई करयवला ब्राह्मण पर कतेक कुत्सित राजनीति भ’ रहल अछि, कतय नहि गाइर-माइर सुनि रहल अछि ब्राह्मण – देखू । चेतना समिति मे सेहो ई दुराबस्था छैक जे इंजीनियर, डाक्टर, प्रोफेसर व अन्य बौद्धिक स्तर पर प्रतिष्ठित लोक सब बेसी सदस्यता लेने छथि । गैर-ब्राह्मण वर्गक अनेकों सशक्त लोक सब केँ बेर-बेर जोड़ल गेलनि जे ओ अपन जाति-वर्गक आर लोक केँ जोड़िकय सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन ‘चेतना समिति’ केँ आर सशक्त बनौता । लेकिन नोट कय केँ राखि लियह, आ नजरि पसारिकय देखू – जिनका अहाँ जोड़लियनि, से एकहु टा केँ नहि जोड़लनि, नहि जोड़ि सकलाह । से कियैक? से एहि द्वारे जे ओ जँ अपनहिं जेकाँ अपन समुदायक आन लोक केँ जोड़ि देथिन त कहीं हुनकर अपन मान-प्रतिष्ठा मे कमी नहि आबि जाइन ।
भ’ सकैत छैक हम गलत होइ, मुदा गलती सिद्ध कयनिहार हमरा ई बतबैथ जे आखिर कि कारण छैक बिलट पासवान विहंगम, जटा शंकर दास, रघुवीर मोची, आदि जेहेन दिग्गज लोकनि चेतना समिति मे रहितो सब जाति-समुदायक आर सशक्त लोक, सदस्यता लेल योग्य लोक केँ नहि जोड़ि सकलथि ? चेतना समितिक लोकतांत्रिक पद्धति मे नेतृत्व करबाक लेल आगू नामांकन तक करय नहि अयलथि ? कि सब दिन तुष्टिकरणक पद्धति पर ब्राह्मण सब हुनका लोकनि केँ ‘मनोनीत’ करनि ? आ तखन ब्राह्मण सब ‘झाझा गाड़ी’ आ मैथिली-मिथिला पर एकछत्र राज – एकाधिकार स्थापित करबाक कलंक झेलथि ?
बिहार हो कि नेपाल – यत्र-तत्र गैर ब्राह्मण बुद्धिजीवी सब एतबे चिन्ता करैत रहैत छथि जे मैथिलीक ह्रास एकल जाति-समुदायक वर्चस्वक कारण भ’ गेलैक । अरे ! मैथिलीक कि ह्रास भेलैक यौ जी ? साहित्य समृद्धिक दिशा मे बढ़िये रहल छैक, बिना कोनो सरकारी कोष वा संरक्षणहु केँ हजारों लेखक-लेखिका सब अपन लेखनकार्य निरन्तरता मे रखनहिये छथि, बेरोकटोक सम्पादन-प्रकाशन कार्य भइये रहल छैक – लिखित मे त जे से, मौखिक मे सेहो कोनो एहेन दिन नहि जे मैथिली केन्द्रित विमर्श कतहु नहि आयोजित हो । आइ बिहार सँ ‘भूराबाल’ साफ भेल, नेपाल सँ ‘मैथिल’ साफ भेल – त बिहारी व मधेशी पहिचान मे गौरवबोध कयनिहार कतेको लोक कतेक बौद्धिक चेतना आ साहित्यिक-सांस्कृतिक किंवा सामाजिक-राजनीतिक विमर्श कय रहल छथि से संख्या (परिमाण) आ स्तरीयता मैथिली-मिथिला-मैथिलक विमर्श संग तुलना करब त अपन टेटर शायद देखय मे आबि जायत । न बिहारी वास्तविक गौरव बनि सकल विगत १०० वर्ष मे, न मधेश-मधेशी गौरवक विषय बनि सकल विगत २-३ दशक केर नव परिवेश मे । तखन ब्राह्मण केँ ‘सौफ्ट टार्गेट’ बनाकय कथी ल’ आर दुःख-कष्ट दय रहल छियैक ?
हमरा नहि लगैत अछि जे कोनो ब्राह्मण आब पुरहिताइ करब पसिन करैछ । आ न ब्राह्मण आब ५ घर भिक्षाटन कय केँ अपन जीवन जिबय वला ब्राह्मण धर्म अपनौने अछि । आब ओकरो घर ‘रात दीया जला के पिया क्या क्या किया’ वला डीजे धून, ब्राह्मणों सभक घर मे तेहेन अबस्था । उपनयन-मुड़न आ कि ब्याहे-दुरागमन मे सबटा अपभ्रंश शैलीक जीवन, शास्त्र आ पुराण सभक आदर्श तेँ आब मुरारी बापू, बागीश्वरधाम महाराज, बोकन महाराज, ढोकन महाराज आ फेसबुक-इन्स्टाग्राम-टिकटक केर रील्स सब मे सीमित अछि । खुलेआम भ्रष्टाचार मे हरेक समाज आकंठ डूबल अछि । सब केँ टका देवतो सँ बड़का आ व्यभिचार-अनाचार धर्मो सँ उपर नजरि आबि रहल छैक । कहिया ‘विनाश’ होयत, कोनो ठेकान नहि । तखन ब्राह्मण पर जातीय टिका-टिप्पणी आ भाषा-साहित्य पर अपन घिनायल मानसिकताक कुठाराघात कय केकर हित करैत छी से अहीं जानब ।
एक-दु गोटे अभियानी (भाषासेवी साहित्यकार) सब केँ सेहो देखैत छी जे मैथिली केँ टूटैत आ कमजोर होइत देखैत छी । प्रेम विदेह ‘ललन’ लिखलनि जे मैथिली टूटि रहल अछि । नेपाल मे मगही मैथिलीक संख्या कमजोर कय रहल अछि । आदि । यौ भाइसाहेब ! एहि सँ मैथिली टूटल या फेर ओ समुदाय जे जाति देखिकय भाषा आवरण ओढ़य चाहि रहल छथि ? एहि सँ मैथिलीक कि अहित भेलैक ? मैथिलीक सृजनकर्म घटि गेल होइ, पाठ्यक्रम पर असर पड़ि गेल होइक, उच्च शिक्षा सँ गायब भ’ गेल होइक, इतिहास खन्डित भ’ गेल होइक, कोनो तरहक ‘यूएसपी’ कमजोर पड़ि गेल होइक – कनेक विमर्श ताहि अनुरूपे सेहो करू । मैथिली अपन समृद्धिक मार्ग पर चौजुगी जिबैत रहत । राजनीतिक नेतागिरी आ वोट नहि लेबाक छैक भाषा-साहित्य केँ जे सब जाति आ धर्म अनुसारे लुल्लू-पुच्चू मे लागत । सावधान, अपन घर जे डाहिकय नव घर उठाकय मगही बनत, घोंघही बनत, से खूब बनय । मैथिली जिन्दाबाद छल, आगुओ रहत । मिथिला युगों-युगों सँ हमरा-अहाँ चलते नहि, अपन कृति अनुसार जिबैत छैक । ब्राह्मणक योगदान केँ सम्मान दियौक । समाज तेना बढ़त । आ गरिया देला सँ ओहिना होयत जेना आइ कतेको दशक सँ ब्राह्मणविहीन समाज डीजे पर दियर सब केँ ढोंढीचटना बनाकय आ रिमोट सँ लहंगा उठा-उठाकय जिबि रहल अछि अस्तु ! विचार करब सब गोटे । ब्राह्मण जे असल होइछ से ध्यान मे लीन अछि । बम बम बू !!
हरिः हरः!!

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