Search

प्रवीण नारायण चौधरी

वेदक उद्देश्य आ तात्पर्य

वेदक उद्देश्य आ तात्पर्य एकटा आरो प्रश्न अछि । जखन वेद ​​अनेकों विषय सबपर विस्तृत रूप सँ चर्चा करैत अछि, तखन हम सब केना कहि सकैत छी जे वेदक मुख्य सन्देश उपनिषद सब मे वर्णित आत्म-साक्षात्कार अछि ? वेद अग्निहोत्र, सोमयज्ञ, सत्रयज्ञ आ इष्टि (समाजक लेल कल्याणकारी कार्य सभक प्रावधान, जेना, आश्रय सभक निर्माण, इनार वेदक उद्देश्य आ तात्पर्य

दस उपनिषद

दस उपनिषद आदि शंकराचार्य दस उपनिषद केर चयन कयलनि, जेकरा दसोपनिषद कहल जाइत अछि तथा ओहि पर भाष्य लिखलनि । ओ ओहि मे प्रतिपादित अद्वैतवादी (अद्वैत) सिद्धान्त पर प्रकाश देलनि । रामानुज आ माधव, जे बाद मे भेलाह, ओहो लोकनि एहि दस उपनिषद पर भाष्य लिखलनि मुदा हुनका लोकनि मे सँ प्रत्येक द्वारा अपन सम्बन्धित दस उपनिषद

कि वेद आ वेदान्त मे टकराव अछि ?

कि वेद आ वेदान्त मे टकराव अछि ? वेदक कर्मकांड या कर्म सम्बन्धित रीति वला भाग मे जे किछु करबाक सलाह देल गेल अछि, तेकरा उपनिषद जे कि ज्ञानकांड केर निर्माण करैछ, से त्याग करय के प्रयत्न लेल कहैत अछि । कर्मकांड मे, वेद मनुष्य केँ देवता सभक पूजा करबाक आदेश दैत अछि आर एहेन कि वेद आ वेदान्त मे टकराव अछि ?

ब्रह्म सूत्र

ब्रह्म सूत्र हम पहिने कहने रही जे हरेक दर्शन सिद्धांत मे तीन गोट संयुक्त तत्त्व (विश्लेषण) होइत छैक, अर्थात् सूत्र, भाष्य आ वार्तिक । अपन देश मे शंकर, रामानुज, माधव, श्रीकांत (शैव सिद्धांत आचार्य) आर अन्य द्वारा प्रतिपादित विभिन्न सिद्धांत सब केँ वेदांत मत या वेदांतिक धर्म केर सामान्य नाम सँ जानल जाइत अछि । ब्रह्म सूत्र

उपनिषद – वेदक अन्तिम फल – सुयोग्य लेल मात्र रहस्योद्घाटन करैछ – वेदान्त बनबैछ

उपनिषद उपनिषद आरण्यक केर अन्त मे अबैत अछि । यदि संहिता केँ एकटा वृक्षक समान मानल जाय, तँ ब्राह्मण ओकर फूल थिक तथा आरण्यक ओकर फल थिक जे अपरिपक्व (बिनु पाकल) अबस्था मे अछि, जखन कि उपनिषद पाकल फल थिक । ज्ञानमार्ग द्वारा परमात्मा आ आत्मा केर अद्वैत (अभेद) केँ प्राप्त करबाक प्रत्यक्ष विधि उपनिषद उपनिषद – वेदक अन्तिम फल – सुयोग्य लेल मात्र रहस्योद्घाटन करैछ – वेदान्त बनबैछ

चारि वेद – अनन्त वेदक मुख्य शाखा एवं उपशाखा पर संछिप्त विश्लेषण

चारि वेद “अनन्तावै वेदाः” – “वेद अनन्त अछि”, लेकिन ऋषिगण हमरा सभक लेल एहि असीम वेद मे सँ मात्र किछुए मंत्र सब संकलन कय (पकड़ि) सकल छथि । ई मंत्र हमरा सब लेल एहि लोक मे सुख आ परलोक मे मोक्षक संग-संग सर्वजन (सम्पूर्ण ब्रह्माण्डक) कल्याण लेल पर्याप्त अछि । यद्यपि हम सब वेद केँ चारि वेद – अनन्त वेदक मुख्य शाखा एवं उपशाखा पर संछिप्त विश्लेषण

यज्ञ – परमात्मा धरि पहुँचबाक समुचित रीति – यज्ञक अनिवार्यता आ औचित्य पर प्रकाश

यज्ञ वेदक अनेकों गुण मध्य सँ ‘यज्ञ’ या वैदिक अनुष्ठान एकर एकटा महत्वपूर्ण पक्ष थिक । यज्ञ मे वेद मंत्र सभक संग अग्निक सहायता सँ निर्धारित अनुष्ठान करब शामिल अछि । यज्ञ मूल शब्द ‘यज’ सँ बनल अछि, जेकर अर्थ अछि पूजा कयनाय – बलिदान कयनाय । परमात्मा आ देवता सभक प्रति समर्पण केर भावना यज्ञ – परमात्मा धरि पहुँचबाक समुचित रीति – यज्ञक अनिवार्यता आ औचित्य पर प्रकाश

वेद अनन्त अछि – ज्ञानक अन्त नहि (अत्यन्त मननीय पाठ)

वेद अनन्त अछि यदि सम्पूर्ण सृष्टि आ सृष्टि सँ पहिने या बाद के जेहो किछु अछि, से सबटा स्पन्दनक जगत मे समाहित अछि, त एकर परिणाम अवश्ये विशाल होयत । अतः, सवाल उठैत अछि जे कि वेद मंत्र सब मे समस्त विविध सार्वभौमिक क्रिया केना समाहित अछि । ई बुझय पड़त जे वेद विशाल अछि वेद अनन्त अछि – ज्ञानक अन्त नहि (अत्यन्त मननीय पाठ)

जप केर त्रुटिरहित विधि – शुद्ध उच्चारण एवं आवाजक सुन्दर महिमाक वर्णन

जप केर त्रुटिरहित विधि  अपन पूर्वज लोकनि वेद मे छोटो टाक त्रुटि सँ परहेज लेल लेखनक सहारा लेनहिये बिना अनेकों उपाय निकालि लेने छलथि । वैदिक मंत्र केर पूर्ण लाभ तखनहि प्राप्त भ’ सकैछ जखन कोनो शब्द मे कोनो तरहक परिवर्तन (हेरफेर) नहि कयल जाय; पाठक समय स्वर (आवाज) मे कोनो प्रकारक अनाधिकृत तर-उपर बहकाव जप केर त्रुटिरहित विधि – शुद्ध उच्चारण एवं आवाजक सुन्दर महिमाक वर्णन

वेद पर शोध – विडम्बना ई जे अधिकतर पश्चिमी देशक विद्वान् वेद पर शोध कयलनि (रोचक तथ्य)

वेद पर शोध ई खेदक विषय थिक जे भारत मे हमरा सब मे सँ बेसीतर लोकक लेल वेदक ज्ञान केर मुख्य स्रोत प्राच्यविद् कहेनिहार विदेशी लोक आर ओकर पदचिन्ह सब पर चलिकय शोध करयवला हमरा लोकनिक विद्वान् सब द्वारा कयल गेल शोध अछि । हम एहि बात सँ सहमत छी जे वेदक ज्ञान केर सम्बन्ध वेद पर शोध – विडम्बना ई जे अधिकतर पश्चिमी देशक विद्वान् वेद पर शोध कयलनि (रोचक तथ्य)