मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू
सम्पादकीय मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू अपन मूल पहिचान सँ दूर होयब आजुक फैशन बनि गेल अछि। स्वयं अपन भाषाक प्रयोग करय मे लज्जाबोध अथवा हीनताबोध अपूर्ण ज्ञान आ जीवन मे भटकल लक्ष्य रखबाक एक तरहक बीमारीक लक्षण होइछ। परञ्च बेसी लोक एहि तरहक नकारात्मकताक शिकार परिवेश आ परिस्थितिक कारण भ’ गेल करैत अछि। … मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू







