कथा
– प्रवीण नारायण चौधरी
पारसमणिएहि संसार मे एकटा चमत्कारी पाथर होइत छैक जेकरा पारसमणि कहल जाइछ। पारसमणि एकटा परिकल्पना सेहो भ’ सकैत छैक, कारण ई वास्तविकता मे मनुष्य केँ कतहु प्राप्त नहि भेल आ अधिकांशतः पौराणिक कथा-गाथा धरि मात्र सीमित रहल। कहबी त ईहो छैक जे टिटही जेहेन चिड़ै अपन अण्डा पारसमणि पाथर सँ फोड़ैत अछि। मुदा ईहो कहबी टा छैक, केकरो कतहु टिटहीक जरिये पारसमणि प्राप्त नहि भेलैक से व्यवहारिक तौर पर सत्य बुझाइछ। कतेको तीर्थस्थान मे शिवलिंग केँ सेहो पारसमणि कहल गेल छन्हि, कारण हुनकर सेवा-पूजा सँ लोक केँ धन-सन्तान व अनेकों मनोभिलाषाक पूर्ति भेल करैत छैक। एहि तरहें पारसमणि काल्पनिक रहितो सत्य आ वास्तविक सेहो छैक। एहि पहेली केँ बुझबाक कोशिश करय जाउ।
हम एकरा एना व्याख्या करैत छी। एक बेर कतहु जाइत रही, अचानक हमरा सोझाँ एकटा चमकैत पाथर आबिकय खसल। हम विस्मित भ’ चारूकात तकलहुँ, बुझय मे नहि आबि सकल जे आखिर ई पाथर कतय सँ आयल, के फेकलक, केना हमरा लग आबिकय खसल। दिमाग तुरन्त कहलक जे ई जरूर कोनो चमत्कार भेलैक। हम ओ पाथर उठाकय जेबी मे भगवानक देल प्रसाद मानिकय राखि लेलहुँ। तहिया सँ आइ धरि हम ओहि पाथर केँ पारसमणि बुझि पूजा करैत आबि रहल छी। हमर अन्तर्मन मे ओ साक्षात् पारसमणि थिकथि। ‘देवाधिदेव महादेव’ कृपालु होइत छथि। केहनो भक्त पर ढरि सकैत छथि। हम महादेवक भजन गाबैत रही। हमरा प्रसाद भेटल। प्रसन्न भेलहुँ। पूजा करैत रहलहुँ। ओ सचमुच पारसमणि थिक से हमरा आइयो विश्वास अछि।
जँ हम लोभी बनी आ ओहि पूजित पाथर केर उपयोग लोहा मे सटाकय जाँच करय धरि जाय त ओ पारसमणि नहि रहि जायत। ओकर सबटा प्रभाव छूमन्तर भ’ जायत। कियैक? कियैक तँ विश्वासक शक्ति आशंका मे परिवर्तित भ’ अपन सारा सार्थक आवेश (Spiritual electric charges created by my confidence will be changed. Or, atomic energies consisted in that very stone piece will get over.) समाप्त भ’ जेतैक।
एक बेर ११-मुखी रुद्राक्ष भेटल। एकादश रुद्र मानि हुनकर पूजा आरम्भ कयल। हमरा सार्थक ऊर्जाक प्राप्ति भेल। ओ हमरा लेल पारसमणि छथि।
तहिना एकटा बाबा बड़ा आवेस सँ हमरा सँ किछु सेवा मंगलनि। यथासम्भव सेवादान कयलहुँ। ओ एकटा रुद्राक्ष दैत कहलाह जे तूँ बीमार बड पड़ैत छह, ई पहिरि लैह, तोहर स्वास्थ्य नीक रहतह। से भेल। बाबाक कृपा भेटल।
अचानक तीर्थक्षेत्र मे एक साधु भेटलाह। नजदीक बजेलाह। एकटा विशेष पाथर (शालीग्राम) दैत कहलनि जे हिनका जल दिहनु आ ऐगला दिन जलग्रहण करिहह। जल लाभकारी लागल। स्वयं केँ नियमित जीवन मे अनबाक सेहो एकटा बेहतरीन टूल भेल। ईहो पारसमणि सिद्ध भेल।
हमर-अहाँक जीवन मे पारसमणिक अम्बार लागल अछि। लेकिन लोभ सँ भरिकय लोहा मे सटा-सटा जाँच करब आ तखन मानब जे ई पारसमणि भेल अथवा नहि, तखन भरि जीवन पारसमणि तकिते रहब आ अन्त मे मरण होयत त आँखि खुजले रहि जायत। माने जे, लोहा केँ सोना बनबय वला सूत्र तकिते रहि जायब। आ जँ विश्वास राखिकय काज करब त निश्चित ओकर आण्विक शक्ति अहाँक भीतर एहेन आत्मशक्ति प्रदान करत जे सोना-सोनामय भेल रहत।
आशा करैत छी जे ई लेख कतेको लोकक जीवन मे परिवर्तन आनि सकत, नहि त कूड़ादानक वस्तु बुझि आगू बढैत चलू सब।
हरिः हरः!!
