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प्रवीण नारायण चौधरी

नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर

लेख – मौलिक इतिहास श्री गणेशाय नमः नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर – हिरालाल कर्ण नेपालमें लिच्छविकाल सौँ परम्परागत रुपमें हिन्दू धर्मशास्त्र, स्मृतिग्रन्थ सभपर आधारित न्यायप्रणाली आ कानुनी व्यवस्था सञ्चालनमें रहल बात इतिहासमें भेटैत अछि । एहि तथ्यके पुष्टि अनन्तलिंगेश्वर महादेव मन्दिरमें रहल मानदेव सम्वत ८० के राजा नरेन्द्रदेवक अभिलेखके अड़तीसम् पंक्तिमें नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड दोसर अध्याय – लंका मे हनुमानजीक रावणक महल मे घुमनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी चन्द्रकवि विरचित मिथिलाभाषा रामयण सुन्दरकाण्ड – दोसर अध्याय सीताक खोज मे निकलल हनुमानजीक लंका मे रावणक महल घुमबाक प्रकरण ।षट्पद। मारुत-नन्दन तखन सूक्ष्म-तन, निशिमे धय कहुँ ॥१॥ लङ्का कयल प्रवेश भ्रमित अतिगुप्त भय कहुँ ॥२॥ सीता तकयित ततय दशानन-मन्दिर गेला ॥३॥ देखि विभव-विन्यास बहुत मन विस्मित भेला ॥४॥ देखल लङ्का मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड दोसर अध्याय – लंका मे हनुमानजीक रावणक महल मे घुमनाय

वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा

वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा वेदक छः अंग मे सँ सब सँ प्रथम (मुख्य) अंग शिक्षा अछि । एकरा वेदक नाक (नासिका) कहल जा सकैत अछि । नासिकाक कार्य केवल गन्ध चिन्हबाक, जे कि एकटा छोट भूमिका थिक, ततबे धरि नहि अछि । बेसी महत्वपूर्ण (भूमिका) श्वास क्रिया सेहो एहि अंग (नासिका) केर वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा

अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

काल्हिक दरभंगा ‘अथक अविराम’ पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम मे प्रवीण बहुत समय बीति गेल छल । अहु बेर परिस्थिति विपरीते छल । तथापि भास्कर भाइक प्रेम, किसलयजीक जिद्द आ मैथिली-मिथिला लेल निजी समर्पण-संकल्प – ई तीनू ततबे जोर कय देलक जे किछु विलम्बे सही मुदा पहुँच गेल रही दरभंगा । सभागार खचाखच भरल छल । गर्मी अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

मिथिलाक आदर्श युवा डा. भास्कर ज्योतिक मैथिली साहित्य केँ ‘प्रथम पुष्प’ – अथक-अविराम लोकार्पित

२२ सितम्बर २०२५, विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद !! काल्हि २१ सितम्बर २०२५ दरभंगा (मिथिला) मे डा. भास्कर ज्योति लिखित पुस्तक ‘अथक अविराम’ केर लोकार्पण समारोहपूर्वक कयल गेल । युवा पुस्ता मे अपन प्रखर बौद्धिकता लेल जानल-मानल व्यक्तित्व, अपन बहुप्रतिभाशाली क्षमता सँ छात्र जीवन सँ लैत हाल बिहार लोक सेवा आयोग (बिपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण कय हाल मिथिलाक आदर्श युवा डा. भास्कर ज्योतिक मैथिली साहित्य केँ ‘प्रथम पुष्प’ – अथक-अविराम लोकार्पित

नेपाल आ भूटान बीच तुलना – अर्थतंत्रक आधार पर

नेपाल मे एखन धरि कतेको रास क्रान्ति भ’ गेल अछि । विकास सभक मुख्य एजेन्डा मे रहैछ । लेकिन पड़ोसहि मे स्थित भूटान जे कि नेपाल सँ काफी छोट रहितो आर्थिक प्रगतिक मामिला मे काफी आगू अछि – से कियैक अछि एहि पर अध्ययन जरूरी छैक । आउ, एक बेर नेपाल आ भुटानक अर्थतंत्र बारे नेपाल आ भूटान बीच तुलना – अर्थतंत्रक आधार पर

वेद शाखा

वेदक शाखा  वेद ‘अनन्त’ अछि – अन्तहीन । वेदान्त केर अर्थ अछि वेदक अन्त । ‘अनन्त वेद केर अन्त’ केर कि अर्थ भेल ? एकरा ‘वेदान्त’ एहि लेल कहल जाइत छैक जे एहि मे विभिन्न आध्यात्मिक सत्य सभक निष्कर्ष निहित छैक, अर्थात् आत्मसाक्षात्कार, जे वेद सभक तात्पर्य छैक । दोसर शब्द मे, ई वेदक खोज वेद शाखा

उपनिषदक सन्देश केर सारांश

उपनिषदक सन्देश केर सार (आत्माक परमात्मा संग) विलय केर ओहि अबस्था धरि पहुँचबाक लेल उपनिषद सब मे निहित शिक्षा सभक सारांश कि अछि ? आधुनिक विज्ञानक मत छैक जे प्रत्यक्ष जगत काल व स्थानक अवधारणा (Time-Space Theory दिक्-काल सिद्धान्त) केर परस्पर क्रियाक परिणामस्वरूप विद्यमान अछि । उपनिषद कहैत अछि जे जखन कियो एहि वैचारिक अबस्था उपनिषदक सन्देश केर सारांश

नेपालक अन्तिम दशा आ भविष्य लेल सवाले-सवाल

कहू त ? कोनो देश मे बदलाव लेल क्रान्ति होइछ । लेकिन क्रान्तिक आड़ मे यदि एक राजनीतिक दलक कार्यकर्ता दोसर राजनीतिक दलक नेता-कार्यकर्ता सँ अपन शत्रुता आ स्वार्थक युद्ध थोपत, आततायी जेकाँ दोसरक घर आ सम्पत्ति केँ आइगक हवाला करत, त फेर ओकरो संग प्रतिशोधक भावना कहियो न कहियो भड़कत या नहि ? नेपाल नेपालक अन्तिम दशा आ भविष्य लेल सवाले-सवाल

नेपालक निकट भविष्य आ आशंकाक अम्बार

नेपाली जनताक आशा-अपेक्षा – एक बेर फेर अन्तरिम सरकार आ नव अपेक्षा आशावादी बननाय स्वास्थ्यक लेल नीक होइत छैक । नेपालक बसोवासी आमजन हमेशा आशा पोसैत अछि, खास कय केँ हरेक क्रान्ति आ समझौता उपरान्त, जे आब जरूर नीक होयत । मुदा किछुए समय मे आशा पर पानि फिरैत सेहो देखल जाइछ । फेर नव नेपालक निकट भविष्य आ आशंकाक अम्बार