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नेपालक निकट भविष्य आ आशंकाक अम्बार

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नेपाली जनताक आशा-अपेक्षा – एक बेर फेर अन्तरिम सरकार आ नव अपेक्षा

आशावादी बननाय स्वास्थ्यक लेल नीक होइत छैक । नेपालक बसोवासी आमजन हमेशा आशा पोसैत अछि, खास कय केँ हरेक क्रान्ति आ समझौता उपरान्त, जे आब जरूर नीक होयत । मुदा किछुए समय मे आशा पर पानि फिरैत सेहो देखल जाइछ । फेर नव क्रान्तिक बिगुल फूकल जाइछ । फेर संक्रमणकालक बात उठैछ । विगत ३५ वर्ष सँ हम प्रत्यक्ष एहिना देखैत रहलहुँ । लगभग १०-२० टा क्रान्ति देखय लेल भेटि गेल एहि दरम्यान ।

पिछला २० वर्षक इतिहास देखू । सैकड़ों छिटफुट आन्दोलन भेल । बन्द आ हड़ताल त एतबा भेल जे मन आजिज भ’ गेल । होइत-होइत संविधानसभा द्वारा ‘नया संविधान’ २०१५ ई. (२०७२ वि.सं. साल) मे घोषणा भेल । विश्वक सर्वश्रेष्ठ संविधान कहल गेल छल तहिया । से सैद्धान्तिक तौर पर रहय, हम आत्मसात करैत छी । लेकिन मुख मे राम बगल मे छुरी – यदि नेतृत्वकर्ता मे छल-प्रपञ्च हावी रहय, सिद्धान्त सँ व्यवहार भिन्न रहय, फेर ओहिना होयत जेना होइत आबि रहल अछि । यानि बेर-बेर क्रान्ति । क्रान्तिक चक्की मे आमजनताक रक्त बहैत आबि रहल अछि एतय । कतेको लोक शहीद भ’ गेल एखन धरि ।

आइ हाल केहेन अछि ?

नया संविधानक घोषणा उपरान्त जे आशा जागल छल सेहो आखिर मे ध्वस्त भ’ गेल । सर्वोत्कृष्ट संविधानक १० वर्ष मे नेतृत्वकर्ताक दुष्चरित्र एवं अहंकार सँ त्रस्त भ’ गेल आमजन । १२ वर्ष सँ २८ वर्षक पुस्ता जेकरा पश्चिमी साहित्य सँ नाम भेटल ‘जेन-जी’ (Gen-Z), ओकरा सभक आक्रोश जे नेपाल भ्रष्टाचार सँ ग्रस्त अछि, एकर अन्त भेल नहि, उपर सँ अभिव्यक्तिक माध्यम ‘सोशल मीडिया’ बन्द करबाक निर्णय – एहि विरूद्ध ८ सितम्बर २०२५ केँ शान्तिपूर्ण प्रदर्शनक बात छल । मुदा ओहि प्रदर्शनकारी युवा सन्तति पर नेपालक सुरक्षाकर्मी द्वारा बेतरतीब गोली चलायल जेबाक कारण दर्जनों लोक मारल गेल । जेकर प्रतिक्रियास्वरूप ९ सितम्बर २०२५ नेपालक राजधानी काठमान्डू सहित सम्पूर्ण देश केर खरबों रुपयाक सम्पत्ति जराकय खाख बना देल गेल । कतिपय धरोहर, सरकारी दस्तावेज आ पुरातात्विक महत्वक सम्पदा – सब किछु खाख कय देल गेल ।

अन्तिम ‘जेन-जी क्रान्ति’क प्रत्युत्पादकता

जेन-जी क्रान्तिक असर ई भेल जे परम्परावादी राजनीतिक शक्ति केँ उखाड़ि देल गेल । नेपालक सेनाक कमान्ड मे ९ सितम्बर २०२५ के राति १० बजे सँ देश मे फेर सँ शान्ति-सुरक्षा बहाल कयल गेल । नहि त ओ जेन-जीक क्रान्ति जाहि मे अनेकों स्वार्थी-अपराधी व देशक अहित चाहनिहार सब घुसपैठ कयने छल, ओ सब ९ सितम्बर राति-राति मे आर कतेको नुक्सान कएने रहैत से अकल्पनीय बुझू ।

अन्तरिम व्यवस्था केहेन कयल गेल अछि ?

आखिरकार १२ सितम्बर २०२५ देश मे फेर सँ २० वर्ष पूर्वहि जेकाँ एकटा ‘अन्तरिम सरकार’ गठन कयल गेल अछि । पहिल बेर नेपाल मे महिला प्रधानमंत्री बनलिह ‘सुशीला कार्की’ । प्रधानमंत्री बनिते ओ अन्तिम जन-निर्वाचित प्रतिनिधिसभाक विघटन केर सिफारिश कयलिह आ राति ११ बजे सँ महामहिम राष्ट्रपतिक आदेश द्वारा संसद विघटन कय देल गेल । संगहि नेपाली जनता केँ आश्वस्त करबाक लेल, संवैधानिक रिक्तता केँ पूर्ति करबाक लेल – आम निर्वाचनक नया तारीख ५ मार्च २०२६ (२१ फागुन २०८२ वृहस्पति दिन) घोषणा कयल गेल अछि ।

अन्तरिम सरकारक गठन मे बहुते रास घमर्थन-समर्थनक स्थिति-परिस्थिति रहितो नेपालक प्रधान सेनापति, राष्ट्रपति, विभिन्न दलक नेतृत्वकर्ता लोकनिक संग नव क्रान्तिक सूत्रधार ‘जेन-जी’ प्रतिनिधि लोकनि संग कानूनविद् लोकनि सेहो नेपालदेशक सर्वोच्च न्यायालयक बहुचर्चित पहिल महिला मुख्य न्यायाधीश श्रीमती सुशीला कार्कीजीक नाम पर मोहर लगौलनि ।

आन्दोलनकारी समूह द्वारा अन्तरिम सरकारक गठन संगहि विगत केर ‘प्रतिनिधिसभा’ विघटन करबाक निर्णय सेहो पारित कराओल गेल – नियमानुसार प्रधानमंत्रीक गठनोपरान्त हुनकहि सिफारिश पर राष्ट्रपति ई निर्णय कय सकैत छलथि से कयलनि तथा राष्ट्रपतिक कार्यालय द्वारा विज्ञप्ति जारी कयल गेल ।

नेपाल आ आन्दोलनक संछिप्त स्वरूप

विभिन्न कालखंड मे अनेकों परिवर्तनकारी आन्दोलनक गजब इतिहास भेटैछ नेपाल मे । नेपालक इतिहास कहैछ जे कहियो एतय सेहो भारतहि जेकाँ अनेकों छोट-छोट राज्य छल, जेकरा बाइसे आ चौबीसे राज आदिक संज्ञा देल गेल छैक ।

गुरु गोरखनाथक शिष्य तथा गोरखा राजाक एक कर्मठ सपूत ‘पृथ्वी नारायण शाह’ द्वारा ओहि सब राज्य केँ एकठाम आनल गेल कहल जाइछ । फेर हुनकहि सन्तति व सैन्यबलक अगुवाई मे नेपालक सीमा-विस्तारक कथा एवं वृहत्तर नेपालक इतिहास सेहो भेटैछ एतय ।

लेकिन इतिहास एहि बातक गबाक अछि जे एतय अनेकों बेर खूनी घटनाक्रम सब भेल अछि । दरबार मे बेर-बेर हत्याकाण्ड सब भेल अछि । जानि कतेको अलग-अलग सरोकारी सभक सरोकार आ दाँव-पेंच मे नेपालक राज्य, राजनीति एवं राजनेता बारम्बार घटना घटेलनि, तेकर पूर्ण गबाह स्वयं देवाधिदेव महादेवक प्रसिद्ध ‘पशुपतिनाथ’ स्वयं टा छथि ।

नव अन्तरिमकाल मे शान्ति-अशान्तिक अबस्था

चूँकि नेपाल मे बहुत पहिनहिं सँ रक्तरंजित क्रान्तिक इतिहास रहल, आगामी किछु समय मे अर्थात् हाल गठित ‘सुशीला कार्की नेतृत्वक अन्तरिम सरकार’ मे ई कम भ’ जायत से सुनिश्चित नहि कहल जा सकैछ ।

नेपालक राजनीतिक दल सभक अपन-अपन स्टैन्ड (अडान) रहल अछि । नेपाली कांग्रेस प्रजातंत्र लागू करबाक संघर्ष कतेको दशक सँ करबाक दावी करैछ । तहिना नेपाल कम्यूनिष्ट पार्टी एमाले, माओवादी आदिक धार सेहो प्रबल संगठन संग विद्यमान अछि नेपाल मे । ओतबे सशक्त राजाक समर्थक राजनीतिक दल राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टीक कतिपय समूह सक्रिय अछि । विगतक किछु वर्ष मे मधेशवादी राजनीतिक शक्ति सशक्त रूप सँ मधेशी उत्पीडन विरूद्ध जनसंघर्षक बल पर अपन मजबूत उपस्थिति दर्ज करौलक । आर सच पुछू त विगत केर किछु दशक मे राजनीतिक संघर्ष लेल आरो कतेको समूह सब आगू आयल । लेकिन सब सँ बाद मे एकटा सब सँ मजबूत राजनीतिक शक्तिक उदय भेल से थिक ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ ‍- एकटा अलग धार, अलग एजेन्डा, अलग आश्वासन आ काज करबाक अलगे जज्बात-जोश सहितक ई दल पिछला आम-निर्वाचन मे सशक्त उपस्थिति विद्यमान चुनाव व्यवस्था तहत दर्ज करौलक । ई सब राजनीतिक धार केँ सम्बोधन करैत अन्तरिम सरकार देश केना व्यवस्थापन करत, एकटा पैघ चुनौती अछि ।

दोसर बात, नेपालक नया संवैधानिक स्वरूप मे ‘तीन तह के संघीयता’क बात अछि । केन्द्र, प्रदेश आ स्थानीय निकाय – तीन ठाम जनप्रतिनिधिक निर्वाचन आ स्वशासनक पद्धति लागू होयबाक स्थितिक नया आदति लागि गेल छैक जनता आ जनप्रतिनिधि दुनू केँ । ताहि मे कोनो तरहक परिवर्तन सँ फेर कतेको तरहक असन्तुष्टिक सम्बोधन केना कयल जा सकत, ई सेहो एकटा पैघ चुनौती अछि ।

तेसर बात, जाहि देश मे हिन्दू धर्मक रक्षक राजा केँ देश निर्माणकर्ता – एकीकरण कर्ता रूप मे देखल जाइछ, ताहि ठाम ‘हिन्दू राष्ट्र’क यूएसपी खारिज कयनाय, ओहि शाहवंशीय राजा केँ तिरस्कृत कय केँ देश मे कोनो तरहक संवैधानिक सम्मान नहि दय पेनाय – ई प्राकृतिक न्यायक विरूद्ध लगैछ । एहि तरहें बेर-बेर राजावादी राजनीति मे असन्तोषक अबस्था बनल रहत । एकर दुष्परिणाम बेर-बेर असन्तोषक उद्वेलन सँ देश भोगिते रहत ।

आबयवला दिन मे एहि बातक डर बनल रहत जे एहि सब आन्तरिक कारण सब केँ नेपालक नव व्यवस्था केना सम्बोधन करत ।

एकर अलावे, नेपालक न्याय व्यवस्था, संचार व्यवस्था, राष्ट्रीयता आ सम्पूर्ण नेपाली जनता केँ राष्ट्रीयता प्रति समान सम्मानक भाव कोना बनल रहत – ई सब चुनौती बनल रहत ।

अन्तिम मे, आम जनताक असन्तोष जेना ‘जेन-जी’ आन्दोलन मे अपनहि सँ अपन घर डाहय जेकाँ प्रतिक्रिया देखेलक, ई बहुतो शक्ति लेल अन्तर्चेतना खोलयबला अछि । ई कियो नहि बिसरब जे क्रान्ति मे विवेकक अन्त भेला सँ ओकर सुखद परिणाम त दूर, दरिद्रता आ अकालक सिवाय आन किछु प्राप्त नहि होयत आ देशहि केर अस्तित्व पर खतरा आबि जायत । तेँ, सब कियो विवेकपूर्ण ढंग सँ सब शक्ति केँ संग लय केँ समाधान निकालैत आगू बढ़ी । वर्तमान संविधान मे जे सब त्रुटि अछि, तेकरा सुधार करैत आमजन केँ भरोसा मे लय केँ आगू बढ़ी । तथास्तु !

हरिः हरः!!

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