
नवरात्रिक शुभारम्भ पर हम प्रवीण नारायण चौधरी अपन पुरखाकृत् दुर्गा मन्दिरक प्रांगण सँ प्रणाम करैत हार्दिक शुभकामना दैत छी । भगवती हमरा सभक कल्याण करथि । हरिः हरः!!
२२ सितम्बर २०२५, विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद !!
काल्हि २१ सितम्बर २०२५ दरभंगा (मिथिला) मे डा. भास्कर ज्योति लिखित पुस्तक ‘अथक अविराम’ केर लोकार्पण समारोहपूर्वक कयल गेल । युवा पुस्ता मे अपन प्रखर बौद्धिकता लेल जानल-मानल व्यक्तित्व, अपन बहुप्रतिभाशाली क्षमता सँ छात्र जीवन सँ लैत हाल बिहार लोक सेवा आयोग (बिपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण कय हाल ‘अवर निबन्धक’ (पदाधिकारी) रूप मे रोसड़ा, समस्तीपुर मे कार्यरत छथि – ओ अपन हाल धरिक जीवन मे कयल गेल महत्वपूर्ण यात्रा सब मे कि देखलनि, कि सिखलनि, तेकर प्रेरणा केहेन भेटलनि आ फेर मानव संसार मे यात्राक आर महत्वपूर्ण पक्ष सभक संग मिथिलाक युवा समुदाय लेल विशेष प्रेरणा ग्रहण करय निमित्त ‘अथक अविराम’ पुस्तकक लेखन सम्पन्न करैत एकर प्रकाशन व विमोचन कार्य समेत सम्पन्न कयलनि अछि ।

डा. भास्कर ज्योतिक लिखल पुस्तक युवा नेता विराटनगरक मेयर रूप मे दुइ-दुइ बेर महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी उमेश यादव जी । हृदय सँ गदगद होइत लेखक केँ विशेष आशीर्वाद दैत देखा रहल छथि । हरिः हरः!!

अथक अविराम – मैथिली पुस्तक, प्रखर लेखक डा. भास्कर ज्योति द्वारा मैथिली साहित्य मे प्रथम पुष्प अर्पित ! विमोचनक विहंगम दृश्य ! हरिः हरः!!
विदित हो जे भास्कर ज्योति अपन नामहि अनुरूप एहेन-एहेन कार्य करैत आबि रहल छथि जाहि सँ हिनकर नाम मिथिला सहित समूचा भारतवर्षक युवा लेल एकटा ‘आदर्श युवा’ होयबाक सौभाग्य प्राप्त भेल छन्हि । निश्चय ओ माता-पिता एवं परिजन सदैव उच्च सम्मान योग्य छथि जे अपन सन्तानक पालन-पोषण आ संस्कार प्रदान करैत ‘भास्कर ज्योति’ जेहेन सपूत मानव समाज केँ सौंपलनि अछि ।
भास्करहि समान छोट बहिन पल्लवी सेहो विदुषी छथि, संगहि भास्करजीक जीवनसंगिनी साक्षी युवातुर मे ओतबे सुसौम्य-सुविज्ञ आ सुसंगी बनिकय प्रखर पिता नृपेश बाबू व माताश्री नमिता झा संग हम प्रत्येक मैथिल परिवार लेल एकटा ‘आदर्श परिवार’क सीमा स्वरूप छथि ।
पूर्णिया जिलाक सुखसेना मूलग्राम छन्हि । एहि गामक नाम सेहो ओतबे सुनाम अछि । प्रत्येक परिवार मे एक-न-एक सुरमाक उत्पत्ति होइत आयल अछि । हमरा हालहि नेपाल-भारत मैत्रीक वर्तमान अबस्था पर राखल एक सेमिनार मे परमविद्वान् व्यक्तित्व रत्नेश्वर मिश्र एवं आयोजक विद्वान् लोकनि सँ ई तथ्य सुनय लेल भेटल ।
लेखक भास्करजी संग हमरा सर्वप्रथम जेएनयू छात्रावास मे भेटबाक सौभाग्य प्राप्त भेल छल । चूँकि भास्करक लेखन सामाजिक संजाल पर अत्यन्त नियंत्रित आ पूर्णताक विन्दु छुबैत रहैत छल, हमरा भीतर रहल स्वाभाविक ‘शिक्षक’ एहेन बच्चा प्रति स्वाभाविक आकर्षित होइत रहल अछि ।
भास्कर सब दिन एकटा जागरुक युवा जेकाँ बुझाइत रहलाह अछि । जेएनयू मिथिला मंचक उपाध्यक्ष रहल छलथि २०१५ मे । २१ नवम्बर २०१५ मे एकटा पैघ विचार-विमर्श मैथिली-मिथिला गतिविधि एवं मैथिल आइडेन्टिटी आदिक सन्दर्भ मे महत्वपूर्ण अग्रज प्राचार्य लोकनिक सान्निध्य मे कएने रहथि, जे अविस्मरणीय अछि ।
हमरा सभक आइडेन्टिटी ‘मैथिल’ केर अछि । आत्मविद्याक आश्रयस्थली मिथिलाक भूप केँ मैथिल कहल जाइन्ह । विदेह मैथिलक सन्तति प्रजा रूप मे हम सब मिथिलावासी मैथिल छी । भौतिक संसार मे रहितो भौतिक उपलब्धि सँ दूर आ आत्माभिराम परमात्मा मे समेबाक लक्ष्य हम मैथिलक रहैत आयल अछि । विद्या हमर आभूषण होइछ । विद्यहु मे परमविद्या – कुल १४ विद्या मध्य सँ सर्वोच्च विद्या ‘आत्मविद्या’ प्रति उन्मुख छी हम सब । ई हमरा सभक जिनियोलौजी मे स्वतः स्पष्ट अछि ।
तेहेन सौष्ठव सहितक युवा सूर्य तहियो हमर खोज छल, आइयो अछि । से भेटलाह आ आइ २०२५ धरिक ‘लौंग कोर्स’ मे अनेकों उपलब्धि हासिल कय चुकल छथि । कियो होइत अछि ‘हाहू-फाफू’ यानि अगबे आवाज करयबला ढोल, कियो होइछ शार्प अन्डर-करेन्ट – उपर सँ समुद्र जेकाँ शान्त, भीतर सँ जिज्ञासा व ज्ञानार्जनक तीव्र प्रवाहमान धारा । सैह छथि भास्कर । अपन जीजिविषा आ अद्भुत कार्यशैली सँ मैथिली-मिथिलाक सेवा कय रहल छथि से बहुत प्रेरणास्पद अछि ।
मैथिली पुस्तक मे बेसीकाल ‘रजनी-सजनी’ आ ‘हम्मा-हम्मा गीत’ पाठक सब केँ अरुचि उत्पन्न करैत रहल । हिन्दी, अंग्रेजी, नेपाली, बंगाली, आदि अन्यान्य भाषा सब व्यवसायिक बनिकय मैथिली पर सबारी कसैत रहल । तखन फेर मैथिली साहित्यक समृद्धिक परिकल्पना कतहु रिक्त नहि रहि जाय – त मोन पड़ैछ – ‘१०० लेखक १०० पुस्तक’ केर गम्भीर आह्वान – २०१४ सँ पटना सँ आरम्भ मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर सुन्दर देन कहल जाय एकरा – मैथिली भाषा-साहित्यक पुनर्उत्थान लेल युवा सहभागिता खुब जोर पकड़लक । आइ नहियो किछु त वर्ष भरि मे १०० सँ अधिक मैथिली पोथी प्रकाशित भ’ रहल अछि । ताहि मे डा. भास्कर ज्योतिक ‘अथक अविराम’ वास्तव मे बिना विरामक जारी रहबाक पुष्टि काल्हिक आयोजन मे भ’ गेल ।
सुन्दर भविष्यक कामना सहित, युवा पुस्ता लेल विशेष लाभदायक पुस्तक ‘अथक अविराम’ केर पाठक बढ़ैत रहय, से शुभकामना दैत छियनि आ एहि लेल हम सेहो अपन स्तर सँ पुस्तकक भीतर रहल उपयोगी सामग्री पर दोबारा लिखब से वचन दैत छी ।
हरिः हरः!!
नोटः प्रस्तुत पोस्टक फोटो सभक कैप्शन फोटो पर क्लिक कय केँ पढ़ी कृपया !! ॐ तत्सत् !!
