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अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

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काल्हिक दरभंगा ‘अथक अविराम’ पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम मे प्रवीण

बहुत समय बीति गेल छल । अहु बेर परिस्थिति विपरीते छल । तथापि भास्कर भाइक प्रेम, किसलयजीक जिद्द आ मैथिली-मिथिला लेल निजी समर्पण-संकल्प – ई तीनू ततबे जोर कय देलक जे किछु विलम्बे सही मुदा पहुँच गेल रही दरभंगा ।

सभागार खचाखच भरल छल । गर्मी चरम पर रहितो सभागारमे कछमछाइत मुदा शान्त भ’ कय बैसल लोक सिद्ध कय रहल छलाह जे मिथिला सब दिन कर्मकांडक संग ज्ञानकांडक मूल स्थल रहल अछि । कर्मकांडक दृश्य एहेन छल जे पाग-दोपटा सँ सब गोटे सजल नजरि आबि रहल छलथि, ज्ञानकांडक दृश्य आर अद्भुत छल जे डा. भीमनाथ झा, डा. नारायण झा, डा. रमाकान्त राय रमा, डा. अशोक मेहता आदिक संग आर कतेको लोक यथा दमन सर, मलय भाइ, अमल भाइ, सुमित सुमन, अमित मिश्र, आर के दीपक, आदि परिचित चेहराक संग हमर अभिन्न भाइ सब सहरसा सँ यथा विक्रमादित्य भाइ, तरुण भाइ, रामकुमार सिंह भाइजी, अमित आनन्दजी – सब एक सँ एक सिद्धयोगी सब – समर्पति जानकीदूत सब – आ स्वयं किसलय कृष्णजी अपन प्रखर बौद्धिकता सँ भरल उद्घोषण कार्य मे व्यस्त रहथि ।

आदरणीया नमिता मैडम, नृपेश बाबू, पल्लवी, साक्षी आ आर कतेको रास माय-बहिन सभक उपस्थिति आर बेसी नीक लागल ।

कारण, मिथिलाक परम्परा रहल जे सभागार मे याज्ञवल्क्य सन महर्षि विद्वान् रहता त ओतय गार्गी समान विदुषी सेहो शास्त्रार्थ लेल उपस्थित रहती । आर त आर, स्वयं याज्ञवल्क्य दुनू नारी ‘कात्यायनी ओ मैत्रेयी’ पर्यन्त अन्तहु-अन्तहु धरि सवाल पुछैत रहथिन । तखन त भेल मिथिला !

आ जँ से नहि, त भ’ गेल बिहार । गर्व से कहो हम बिहारी हैं – आ अपन राज्य मे अपनहि भाषा को दोसर राजभाषा नहि बनाओ, बरु राजनीति करना है आ मुसलमान सभक तुष्टिकरण लेल ओ सब जे बुझितो-पढ़ितो नहि अछि से ‘उर्दू’ केँ बनाउ राजभाषा । वोट खरीदकर अपना आप को बड़का गरीबक मसीहा त बाबन-तिरपन-चौबन का सरदार आदि ‘बिहारी राजा’ सिद्ध करना है से करैत रहू – सभा मे अगबे मरदबा सभक भीड़ जुटेने रहू ।

आब त देखिते छी जे बिहारक मिथिलहुक गाम सब मे ‘आर्केस्ट्रा मे कतबा मरदबा सब नाचैत रहय हय’, आ बेचारी गोटेक तवका के माइयो-बहिन आर नाचैये मे भलाइ बुझय हय । कि करब ? जोर स’ कहू ‘जय बिहार’ । एम्हर नेपाल मे कहू ‘जय मधेश’ आ खेसारीलाल संगे नाचू ।

काल्हिक सजल मंचक हिरो भास्कर ज्योति आ प्रकाशक किशुन संकल्पलोकक मालिक आ स्वयं एक कुशल-सुयोग्य साहित्यकार वक्ता आदरणीय केदार कानन भाइजी, भास्करजीक कतिपय सरकारी पदाधिकारी मित्र सब जाहि मे एसडीएम, रजिस्ट्रार, व अन्यान्य पदाधिकारी लोकनिक हुजुम उमड़ल छल – से संकेत कय रहल छल जे मैथिलीक ओ पुरनका दिन गेल ।

आजुक कारपोरेट जगत मे मैथिली अपन नीक आ उत्कृष्ट बाजार सेहो ठाढ़ करत आ पाठक केँ पठनीय सामग्री देतनि जे जीवन बनि जेतनि । व्यक्तित्वक विकासक संगहि प्रतियोगी परीक्षा सब मे केना उतरब आ सफल बनब से लुइर-बुद्धि हेतनि ।

एहि बेर सुनैत छी जे गोटेक गाम बिहार सँ फेर मिथिला बनबाक निर्णय कयलक अछि । से दुर्गा पूजा मे जखन ग्रामीण जागरण यात्रा सब पर निकलब त रिपोर्ट देब । ॐ तत्सत् – हरिर्हरिः!! भाषण दयकालक फोटो नीक लागय त आशीर्वादक दुइ शब्द लिखब । बम बम महादेव !!

हरिः हरः!!

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