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प्रवीण नारायण चौधरी

आत्मशान्ति – कियैक आ केना ?

अत्यन्त मननीय लेख आत्मशान्ति – कियैक आ केना ? हरेक मानव केँ आत्मशान्तिक अभिलाषा रहैत छैक । ओना त आत्मशान्ति आत्माक स्वभावहि मे निहित छैक, मुदा जाहि तरहें स्वयं केर नाभि मे रहल कस्तुरी सँ हिरण अनभिज्ञ रहैत अछि, तहिना अन्तरंगक आत्मशान्तिक हम सब अनुभव नहि कय पबैत छी । समुद्रक मध्यबिन्दु मे लहरक उथल-पुथल आत्मशान्ति – कियैक आ केना ?

मिथिलाभाषा रामायणः लङ्काकाण्ड तेसर अध्याय – विभीषणक रामक शरण मे आयब आ अभिषेक पायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड तेसर अध्याय विभीषणक रामक शरण मे आयब आ अभिषेक पायब ।हरिपद छन्द। नाम विभीषण जन कहइत छथि, दशमुख-सोदर-भाय ॥१॥ चरण-शरण मे राखु दयानिधि, अयलहुँ विकल पड़ाय ॥२॥ बहुत कहल हम नीति सभा मे, नहि मानल दशभाल ॥३॥ मेघनाद रावण-सुत मन्त्री, रावण-मत वाचाल ॥४॥ विश्वजननि वैदेही मिथिलाभाषा रामायणः लङ्काकाण्ड तेसर अध्याय – विभीषणक रामक शरण मे आयब आ अभिषेक पायब

नेपाल मे नव संविधान जारी करबाक ९म् वर्षगांठ

संविधान दिवस नेपाल आइ ‘संविधान दिवस’ थिक । समस्त नेपाली मे प्रवीणक शुभकामना !! आइ सँ 9 साल पूर्व आजुक दिवस नेपालदेशक नव संविधान घोषित भेल छल । विभिन्न विरोध आ असंतोष केर बीच नव संविधान नेपाल केँ संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र रूप मे घोषित कयलक । समावेशीकरण केर नीक परिकल्पना राखल गेल हमरा बुझने, तथापि नेपाल मे नव संविधान जारी करबाक ९म् वर्षगांठ

संस्मरण संग सन्ततिप्रति सन्देश

लेख-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी पिता सँ पुत्र धरि आइ ‘काका’ (पिताजी) केँ फेर सँ मोन पाड़ि रहल छियनि । पितृपक्ष मे पितर प्रति सम्मोहन कोनो नव बात नहि छैक, लेकिन ताहू मे कारण जँ आध्यात्मिक उन्नति सँ जुड़ल हो त अपने आप विशेष भ’ जाइत छैक । पिताक तिथि त ओना सप्तमी दिन पड़ैत संस्मरण संग सन्ततिप्रति सन्देश

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दोसर अध्यायः रावण केर हितैषी सब संग विचार-विमर्श, विभीषणक चेतावनी

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – दोसर अध्याय रावण केर हितैषी सब संग विचार-विमर्श, विभीषणक चेतावनी ।चौपाइ। रावण मन मन कर अनुमान । लङ्का डाहि गेल हनुमान ॥१॥ बड़ आश्चर्य कहू की आन । अक्षयकुमार लेलक प्राण ॥२॥ सभा कयल निज लोक हकारि । रावण-वचन देथि के टारि ॥३॥ तखन मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दोसर अध्यायः रावण केर हितैषी सब संग विचार-विमर्श, विभीषणक चेतावनी

जितिया जमघट – विराटनगर महिला समूह केर भव्य आयोजनक चहुंदिश चर्चा

सोनी कर्ण, विराटनगर । १८ सितम्बर २०२४, मैथिली जिन्दाबाद !! भादव ३१ गते, २०८१ तदनुसार १६ सितम्बर, २०२४ ई. (सोमदिन) विराटनगर (नेपाल) स्थित कञ्चनजंगा पार्टी पैलेस मे श्रीमती वन्दना चौधरीक अध्यक्षता मे जितिया पाबनि समारोह आयोजित भेल । ई समारोह ६५ – ७० महिला सभक गरिमापूर्ण उपस्थिति एवं सहभागिताक संग नीक जेकाँ सम्पन्न भेल। मिथिलाक जितिया जमघट – विराटनगर महिला समूह केर भव्य आयोजनक चहुंदिश चर्चा

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड प्रथम अध्याय: राम केर सेनाक तैयारी एवं लंका प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी स्वाध्यायक क्रम मे कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण केर सुन्दरकाण्ड धरिक सम्पूर्ण पाठ पूर्ण भेल । ओ सब स्वयं टंकण करैत मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशित कय चुकल छी । अलग-अलग अध्यायक जनतब मुताबिक अलग-अलग पृष्ठ मे ओकरा सब केँ समेटल । आब आइ लंकाकाण्ड प्रारम्भ भेल अछि । कविचन्द्र विरचित मिथिला मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड प्रथम अध्याय: राम केर सेनाक तैयारी एवं लंका प्रस्थान

मोहनाक भाग्योदय – किशोरावस्था आ युवावस्थाक मैथिल लेल सन्देश

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मोहनाक भाग्योदय मोहना किशोरावस्था सँ अति-कुशाग्र आ तीक्ष्ण बुद्धिक प्रदर्शन लेल चारूकात जानल जाय लागल छल । पूर्व-वर्णित कथा जाहि मे शहरी बच्चा सँ प्रतिस्पर्धा करैत ओ रैपिडेक्स इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स पढ़ि अंग्रेजियो बजबाक आ सामान्य ज्ञान सँ सतरंज खेल धरि मे पारंगत भ’ गेल छल, ठीक तहिना मैट्रिक परीक्षा मोहनाक भाग्योदय – किशोरावस्था आ युवावस्थाक मैथिल लेल सन्देश

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड चारिम अध्याय: रावण-हनुमान संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण सुन्दरकाण्ड – चारिम अध्याय रावणक दरबार मे हनुमानजी संग संवाद ।चौपाइ। बाँधल काँ पुरजन मिलि मार । कौतुक पहुँचल दशमुख-द्वार ॥१॥ त्रास-हीन हर्षित हनुमान । केवल कौशलेश-पद ध्यान ॥२॥ मारि गारि सबहिक सहि लेथि । पामर काँ नहि उत्तर देथि ॥३॥ मेघनाद कहलनि शुनु मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड चारिम अध्याय: रावण-हनुमान संवाद

चिन्ता आ चिन्तनक एक पुष्प ‘हिन्दी’ मेः हाल-ए-मिथिला अब ऐसा है

लेख-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी हाल-ए-मिथिला अब ऐसा है यूँ कहें कि मिथिलाकी हाल अब ऐसा ही है । तो है कैसा ? है ऐसा कि हमारे मिथिला का ५ हिस्सों में से ४ हिस्सा हिन्दुस्तान में और १ हिस्सा नेपाल में पड़ने से बड़े हिस्से के लोग हिन्दी बोलने/समझने/लिखने में सहुलियत मानते हैं, छोटे चिन्ता आ चिन्तनक एक पुष्प ‘हिन्दी’ मेः हाल-ए-मिथिला अब ऐसा है