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प्रवीण नारायण चौधरी

अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

काल्हिक दरभंगा ‘अथक अविराम’ पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम मे प्रवीण बहुत समय बीति गेल छल । अहु बेर परिस्थिति विपरीते छल । तथापि भास्कर भाइक प्रेम, किसलयजीक जिद्द आ मैथिली-मिथिला लेल निजी समर्पण-संकल्प – ई तीनू ततबे जोर कय देलक जे किछु विलम्बे सही मुदा पहुँच गेल रही दरभंगा । सभागार खचाखच भरल छल । गर्मी अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

मिथिलाक आदर्श युवा डा. भास्कर ज्योतिक मैथिली साहित्य केँ ‘प्रथम पुष्प’ – अथक-अविराम लोकार्पित

२२ सितम्बर २०२५, विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद !! काल्हि २१ सितम्बर २०२५ दरभंगा (मिथिला) मे डा. भास्कर ज्योति लिखित पुस्तक ‘अथक अविराम’ केर लोकार्पण समारोहपूर्वक कयल गेल । युवा पुस्ता मे अपन प्रखर बौद्धिकता लेल जानल-मानल व्यक्तित्व, अपन बहुप्रतिभाशाली क्षमता सँ छात्र जीवन सँ लैत हाल बिहार लोक सेवा आयोग (बिपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण कय हाल मिथिलाक आदर्श युवा डा. भास्कर ज्योतिक मैथिली साहित्य केँ ‘प्रथम पुष्प’ – अथक-अविराम लोकार्पित

नेपाल आ भूटान बीच तुलना – अर्थतंत्रक आधार पर

नेपाल मे एखन धरि कतेको रास क्रान्ति भ’ गेल अछि । विकास सभक मुख्य एजेन्डा मे रहैछ । लेकिन पड़ोसहि मे स्थित भूटान जे कि नेपाल सँ काफी छोट रहितो आर्थिक प्रगतिक मामिला मे काफी आगू अछि – से कियैक अछि एहि पर अध्ययन जरूरी छैक । आउ, एक बेर नेपाल आ भुटानक अर्थतंत्र बारे नेपाल आ भूटान बीच तुलना – अर्थतंत्रक आधार पर

वेद शाखा

वेदक शाखा  वेद ‘अनन्त’ अछि – अन्तहीन । वेदान्त केर अर्थ अछि वेदक अन्त । ‘अनन्त वेद केर अन्त’ केर कि अर्थ भेल ? एकरा ‘वेदान्त’ एहि लेल कहल जाइत छैक जे एहि मे विभिन्न आध्यात्मिक सत्य सभक निष्कर्ष निहित छैक, अर्थात् आत्मसाक्षात्कार, जे वेद सभक तात्पर्य छैक । दोसर शब्द मे, ई वेदक खोज वेद शाखा

उपनिषदक सन्देश केर सारांश

उपनिषदक सन्देश केर सार (आत्माक परमात्मा संग) विलय केर ओहि अबस्था धरि पहुँचबाक लेल उपनिषद सब मे निहित शिक्षा सभक सारांश कि अछि ? आधुनिक विज्ञानक मत छैक जे प्रत्यक्ष जगत काल व स्थानक अवधारणा (Time-Space Theory दिक्-काल सिद्धान्त) केर परस्पर क्रियाक परिणामस्वरूप विद्यमान अछि । उपनिषद कहैत अछि जे जखन कियो एहि वैचारिक अबस्था उपनिषदक सन्देश केर सारांश

नेपालक अन्तिम दशा आ भविष्य लेल सवाले-सवाल

कहू त ? कोनो देश मे बदलाव लेल क्रान्ति होइछ । लेकिन क्रान्तिक आड़ मे यदि एक राजनीतिक दलक कार्यकर्ता दोसर राजनीतिक दलक नेता-कार्यकर्ता सँ अपन शत्रुता आ स्वार्थक युद्ध थोपत, आततायी जेकाँ दोसरक घर आ सम्पत्ति केँ आइगक हवाला करत, त फेर ओकरो संग प्रतिशोधक भावना कहियो न कहियो भड़कत या नहि ? नेपाल नेपालक अन्तिम दशा आ भविष्य लेल सवाले-सवाल

नेपालक निकट भविष्य आ आशंकाक अम्बार

नेपाली जनताक आशा-अपेक्षा – एक बेर फेर अन्तरिम सरकार आ नव अपेक्षा आशावादी बननाय स्वास्थ्यक लेल नीक होइत छैक । नेपालक बसोवासी आमजन हमेशा आशा पोसैत अछि, खास कय केँ हरेक क्रान्ति आ समझौता उपरान्त, जे आब जरूर नीक होयत । मुदा किछुए समय मे आशा पर पानि फिरैत सेहो देखल जाइछ । फेर नव नेपालक निकट भविष्य आ आशंकाक अम्बार

वेदक उद्देश्य आ तात्पर्य

वेदक उद्देश्य आ तात्पर्य एकटा आरो प्रश्न अछि । जखन वेद ​​अनेकों विषय सबपर विस्तृत रूप सँ चर्चा करैत अछि, तखन हम सब केना कहि सकैत छी जे वेदक मुख्य सन्देश उपनिषद सब मे वर्णित आत्म-साक्षात्कार अछि ? वेद अग्निहोत्र, सोमयज्ञ, सत्रयज्ञ आ इष्टि (समाजक लेल कल्याणकारी कार्य सभक प्रावधान, जेना, आश्रय सभक निर्माण, इनार वेदक उद्देश्य आ तात्पर्य

दस उपनिषद

दस उपनिषद आदि शंकराचार्य दस उपनिषद केर चयन कयलनि, जेकरा दसोपनिषद कहल जाइत अछि तथा ओहि पर भाष्य लिखलनि । ओ ओहि मे प्रतिपादित अद्वैतवादी (अद्वैत) सिद्धान्त पर प्रकाश देलनि । रामानुज आ माधव, जे बाद मे भेलाह, ओहो लोकनि एहि दस उपनिषद पर भाष्य लिखलनि मुदा हुनका लोकनि मे सँ प्रत्येक द्वारा अपन सम्बन्धित दस उपनिषद

कि वेद आ वेदान्त मे टकराव अछि ?

कि वेद आ वेदान्त मे टकराव अछि ? वेदक कर्मकांड या कर्म सम्बन्धित रीति वला भाग मे जे किछु करबाक सलाह देल गेल अछि, तेकरा उपनिषद जे कि ज्ञानकांड केर निर्माण करैछ, से त्याग करय के प्रयत्न लेल कहैत अछि । कर्मकांड मे, वेद मनुष्य केँ देवता सभक पूजा करबाक आदेश दैत अछि आर एहेन कि वेद आ वेदान्त मे टकराव अछि ?