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प्रवीण नारायण चौधरी

विराटनगर मे बहुभाषिक कवि सम्मेलन – विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् व मैथिली साहित्य अभियानक प्रयास

विराटनगर, ३ मार्च २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हिक कवि सम्मेलन विराटनगर मे काल्हि विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् व मैथिली साहित्य अभियानक संयुक्त तत्त्वावधान मे बहुभाषिक कवि सम्मेलनक आयोजन कयल गेल। श्री डोमी कामत केर अध्यक्षता तथा श्री कर्ण संजय केर संचालन मे दर्जनाधिक कवि लोकनि अपन कविताक वाचन कयलनि। प्रमुख अतिथिक रूप मे डा. एस. विराटनगर मे बहुभाषिक कवि सम्मेलन – विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् व मैथिली साहित्य अभियानक प्रयास

वाजसनेयिनां विवाहपद्धतिः – मैथिल ब्राह्मण व अन्य समुदाय मे वैवाहिक रीतिक शास्त्रीय विधान

महामत्तक-ठक्कुर-दत्तरामविरचिता वाजसनेयिनां विवाहपद्धतिः इन्दुमती टीका टिप्पणीभ्यां विभूषिता सम्पादकः श्री रामचन्द्र झा, व्याकरणाचार्यः आत्म निवेदन कन्यादान वस्तुतः कन्यादानक अर्थ विवाह संस्कार थिक। १६ संस्कारान्तर्गत विवाहसंस्कार प्रमुख मानल गेल अछि। कन्याक हेतु ई संस्कार उपनयनस्थानीये थिक। तंदाह मनुः – “वैवाहिको विधिः स्त्रीणामौपनायनकः स्मृतः” – अर्थात् स्त्रीक विवाहे स्त्रीक उपनयन संस्कार कहल गेल अछि। जेना उपनयनसंस्कारोत्तर कुमार ब्राह्मण वाजसनेयिनां विवाहपद्धतिः – मैथिल ब्राह्मण व अन्य समुदाय मे वैवाहिक रीतिक शास्त्रीय विधान

वाजसनेयिनाम्-एकोद्दिष्टपद्धतिः (मिथिला मे प्रचलित बरखीक पद्धति)

अथ वाजसनेयिनाम् एकोद्दिष्टपद्धतिः ‘इन्दुमती’ मैथिली-भाषाटीकाटिप्पणीभ्यां विभूषिता पृष्ठ १ – वाजसनेयिनाम्-एकोद्दिष्टपद्धतिः एकोद्दिष्टक सामग्री अच्छिञ्जल, गङ्गाजल, गङ्गौट, पिड़ी बनेबाक हेतु बालु, रक्षोघ्नदीप, उत्सर्गदीप, कुश, तिल, जौ, धूप, अक्षत, सालिग्राम, तेकुशा – ६, मोड़ा – ६, औंठी – १, वीरनी – १, छिन्नमूल कुश – १, सपवित्र कुश – १, पैता – २, पूड़ा – ९ (कटहर या वाजसनेयिनाम्-एकोद्दिष्टपद्धतिः (मिथिला मे प्रचलित बरखीक पद्धति)

शाश्वत मिथिला अहमदाबादक मिथिला भवन

यात्रा संस्मरण मिथिला भवन शाश्वत मिथिला अहमदाबाद द्वारा निर्माणाधीन ‘मिथिला भवन’ डाभोरा (गांधीनगर, अहमदाबाद) आर ई शेल्फी आदरणीय राजकिशोर बाबू संग – हृदय मे एतबा हर्ष समाहित अछि जेकर वर्णन नहि कय सकैत छी। बहुत कम लोक मे एहेन दूरदृष्टि देखि पबैत छी हम। कोनो लायलपट आ बात घुमघुमउआ नहि, सीधा लक्ष्य पर दृष्टि आ शाश्वत मिथिला अहमदाबादक मिथिला भवन

मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्ड तेसर अध्याय – राम केँ वनवासक आज्ञा

कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड – तेसर अध्याय राम केँ वनवासक आज्ञा  ॥अध्याय ३॥ ।चौपाइ। ।मिथिला संगीतानुसारेण श्रीमालव छन्द। काज मन्त्रि केँ कहि नृप देल । अपनैँ अन्तष्पुर मे गेल ॥१॥ नृपति न देखल केकयि आँखि । की वृत्तान्त उठल नृप भाखि ॥२॥ अबइत हसइत नित जे आब । केकयि काँ छल सिद्ध स्वभाव ॥३॥ मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्ड तेसर अध्याय – राम केँ वनवासक आज्ञा

वडोदरा गुजरात मे मैथिली साहित्य सम्मेलन मे विमर्श-विमर्शकार

वडोदरा गुजरात मे वैदेही मिथिलाधाम द्वारा आयोजित मैथिली साहित्य सम्मेलन मे लगभग 20 विषय पर महत्वपूर्ण व्यक्तित्व सभकेँ विमर्शकार रूप मे आमंत्रित कय उच्चकोटि के विमर्श आ कवि सम्मेलन संग सांस्कृतिक आयोजन व नाटक मंचन सेहो राखल गेल अछि। एखन धरिक प्रस्ताव पारित भेल अनुसार निम्न विवरण के आयोजन होबय जा रहल अछि। 17 आ वडोदरा गुजरात मे मैथिली साहित्य सम्मेलन मे विमर्श-विमर्शकार

‘अर्चनाकृत रामायण’ केर विमोचन विमलेन्द्र निधि द्वारा कयल गेल

ललितपुर, १४ फरवरी २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद!! नेपाल मे पहिल बेर गद्य शैली मे लिखल गेल मैथिली रामायण जेकरा लेखिका अर्चना झा लिखलनि आ नामकरण सेहो ‘अर्चनाकृत् रामायण’ करैत काल्हि सरस्वती पूजाक सुअवसर पर नेपालक पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेन्द्र निधि द्वारा विमोचन करौलनि अछि। विमोचन कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि पूर्व उपप्रधानमन्त्री तथा गृहमन्त्री विमलेन्द्र निधि ‘अर्चनाकृत रामायण’क ‘अर्चनाकृत रामायण’ केर विमोचन विमलेन्द्र निधि द्वारा कयल गेल

मैथिली भाषा-साहित्यक विकास आ संरक्षण मे प्रवासी मैथिल संस्थाक योगदान

विशेष सम्पादकीय मैथिलीभाषी समाज केँ आदत देखैत आयल छी ‘बारीक पटुआ तीत’ वला, यानि अपन भाषाक बहुत बेसी महत्व अपने सँ नहि दयवला। ‘दूरक ढोल सोहाओन’ कहावत केँ चरितार्थ करैत मैथिलीभाषाक मिठास आ महत्ता सँ दूर भोजपुरी, हिन्दी आ नेपाली मे खूब रमैत अछि एतुका लोक। परञ्च बौद्धिक समाज केँ खूब नीक सँ पता छैक मैथिली भाषा-साहित्यक विकास आ संरक्षण मे प्रवासी मैथिल संस्थाक योगदान

अर्चनाकृत् रामायण (मैथिलीभाषा) केर विमोचन कार्यक्रम काल्हि

ललितपुर, १३ जनवरी २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषामे “अर्चनाकृत रामायण” केर विमोचन होयत नेपालमे पहिल बेर मैथिली भाषामे रामायण पढ़बाक लेल भेटत आब। ‘वाल्मीकि रामायण’ आर ‘रामचरितमानस’ रामायणक आधार पर अर्चना झाद्वारा लिखल गेल रामायण थिक ई । ई मैथिली गद्यात्मक ‘अर्चनाकृत रामायण’ मे करीब ६४ हजार शब्द समाहित अछि। एहिमे हिन्दु धर्मक देवता अर्चनाकृत् रामायण (मैथिलीभाषा) केर विमोचन कार्यक्रम काल्हि

मिथिला आ विद्वान – व्यंग्य प्रसंगक एक प्रासंगिक पत्र

आदरणीय विद्वान् जी! ई पत्र जरूरत मे लिखि रहल छी। एकर उत्तर अपनेक व्यवहार मे आबयवला दिन मे देखायत से अपेक्षा राखि पत्र लिखि रहल छी। महोदय! अपन मिथिलाक माटि, पानि, हवा, आइग आ आकाश – ई सबटा दिव्य छैक। दिव्यताक प्रभाव हर सन्तान पर, खेत-पथार पर, आवोहवा पर, प्रत्येक निर्माण आ सृजन पर – मिथिला आ विद्वान – व्यंग्य प्रसंगक एक प्रासंगिक पत्र