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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड चारिम अध्याय – सीताक खोजय लेल दूत पठेबाक प्रसंग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्डः चारिम अध्याय सुग्रीव द्वारा सीताक खोज-खबरि लेल दूत पठायब ।रूपक चौपाइ। योगारूढ समाधि विराम । सय्यँमशील निरन्तर राम ॥१॥ लक्ष्मण पूछल पूजा – रीति । कहल राम बुझि अनुज सप्रीति ॥२॥ वेद तन्त्र पूजाक प्रकार । संक्षिप्ताक्षर विधि विस्तार ॥३॥ पुन प्राकृत बनि मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड चारिम अध्याय – सीताक खोजय लेल दूत पठेबाक प्रसंग

गम्भीर चिन्तनक विषयः विवाहरूपी संस्कार केर बदहाली

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी गम्भीर चिन्तनक विषयः विवाहरूपी संस्कार केर बदहाली   (मैथिल-मैथिल परिवार बीच बढ़ैत दूरी मैथिलक विवाह मे भारी समस्याक कारक तत्त्व!)   मिथिलाक लोकसंस्कार मे सामुहिकता आ एकजुटता सँ पाबनि-तिहार मनबैत ‘आनन्द’ प्राप्तिक सूत्र निहित छैक । मुदा, दिनानुदिन ई सामुहिकता आ एकजुटताक सर्वनाश होइत जा रहल अछि कहब अतिश्योक्ति नहि गम्भीर चिन्तनक विषयः विवाहरूपी संस्कार केर बदहाली

मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड तेसर अध्याय – ताराक विलाप, राम द्वारा उपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – तेसर अध्याय ताराक विलाप, राम द्वारा उपदेश ।दोबय छन्दः। वानरवृन्द बालि-वध देखल विकल कहल शुनु रानी ॥१॥ रामक बाण बिधुन्तुद विघसित बालि पूर्ण विधु जानी ॥२॥ कोट-कपाट द्वार ठिक ठोकब वानर रोकब बाटे ॥३॥ वानरेन्द्र अङ्गदकाँ मानब सुग्रीवक कुल काँटे ॥४॥ सचिव सकल सह मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड तेसर अध्याय – ताराक विलाप, राम द्वारा उपदेश

चुरा दही आम के भोज पर मिथिला टाइम्स प्रकाशन पर चर्चा

विराटनगर, 16 जुलाई 2025 । चुरा दही आम केर भोज आइ दिनांक 16 जुलाई यानी सावन मास के 1 गते, आदरणीय अग्रज-मार्गदर्शक श्री राम रिझन यादव जी द्वारा हमरा सहित दर्जनों सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियानी सब केँ अपन बारीक आम खेबाक वास्ते आमंत्रित कयलनि। अपराह्न 2 बजे सँ 4 बजे केर आमक भोज बहुत नीक सँ पूर्ण चुरा दही आम के भोज पर मिथिला टाइम्स प्रकाशन पर चर्चा

संस्था आ सत्प्रयास के विलक्षण उदाहरण

अपन ब्राह्मण समाज विराटनगर (संस्था आ सत्प्रयास के सुन्दर उदाहरण) परसू शनि दिन ‘अपन ब्राह्मण समाज विराटनगर’ केर एक सुन्दर सत्प्रयास रूपी उपक्रम ‘माँ काली ब्राह्मण कल्याण बचत कोष’ केर वार्षिकोत्सव मे गेल रही। बहुत सुन्दर विचार सब भेल, भोज सेहो भेल। बहुत आनन्द आयल। तुरन्त फोटो सार्वजनिक एहि लेल नहि कयलहुँ जे देख पड़ोसिया संस्था आ सत्प्रयास के विलक्षण उदाहरण

मिथिलाक्षेत्रक कन्याशिक्षा आ तत्सम्बन्धी सामाजिक विमर्श

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाक्षेत्रक कन्याशिक्षा आ तत्सम्बन्धी सामाजिक विमर्श   अपन मिथिला मे कन्या शिक्षाक प्रयास बहुतो दशक सँ होइत आबि रहल अछि। लेकिन उल्लेखनीय सफलता १९८० केर दशक बादे भेटब शुरू भेल कहि सकैत छी। महिला साक्षरताक तथ्यांक अपन-अपन स्थानक देखब त ओहि सँ ई स्पष्ट भ’ जायत। आइ २०२४ ई. धरि मिथिलाक्षेत्रक कन्याशिक्षा आ तत्सम्बन्धी सामाजिक विमर्श

मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड दोसर अध्याय – बालि-सुग्रीव युद्ध एवं बालि वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – दोसर अध्याय बालि-सुग्रीव युद्ध एवं बालि वध ।चौपाइ। कहलनि रघुवर शुनु कपिनाथ । बालिक वध अछि हमरा हाथ ॥१॥ माया – मय थिक ई संसार । अति अगम्य विधि ज्ञान – विचार ॥२॥ ठामहि ठाम बालि जौँ रहत । हमर अकीर्ति विश्व भरि कहत मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड दोसर अध्याय – बालि-सुग्रीव युद्ध एवं बालि वध

अर्धनारीश्वर भगवान् – सृष्टिक अवधारणाक मुख्य प्रेरणादाता

आध्यात्मिक चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी स्वाध्याय सँ भेटल ‘अर्धनारीश्वर’ प्रति ई वाक्यांश ब्रह्माजी सृष्टि निर्माण कयलनि, परञ्च सृजित जीव केर आयु समाप्ति पछाति बेर-बेर हमरे सृजन करय पड़त से सोचि सोचमग्न भ’ गेलाह। कतबो विचार कयलनि कोनो बाट नहि सुझेलनि। तखन ओ महादेवक आराधना कय एहि ओझरायल गुत्थी केँ सोझरेबाक यत्न कयलनि। ताहि समय अर्धनारीश्वर भगवान् – सृष्टिक अवधारणाक मुख्य प्रेरणादाता

महान बनबाक लेल अनासक्त बनहे टा पड़त

अनासक्तिः महानताक महासूत्र बेलायत मे वकालतक पढ़ाई करबाक समय मोहनदास करमचन्द गाँधी केँ सेहो केश सीटय के आ टाइ-नौट सरियाबय मे आईनाक आगू ठाढ़ हेबाक, फेर हैट सेहो सरियेबाक लेल आईनाक आगू ठाढ़ हेबाक, सूट-बूट मे सजबाक-धजबाक आदति लागि गेल रहनि। मुदा एहि चक्कर मे कय बेर अदालत पहुँचय मे देरी भेलनि आ न्यायाधीश सँ महान बनबाक लेल अनासक्त बनहे टा पड़त

संजीत यादवक एक गजल – हमरे टा याद कय केँ कि हेतय

कविता – संजीत यादव, शिक्षाविद् सह मैथिली रेडियो कार्यक्रम संचालक, बि. एफएम. विराटनगर हमरे टा याद कय केँ कि हेतय जँ अहीं माया मारबय तँ! हमर माया अहाँक दया कि हेतय जँ माया बिनाक दया हेतय तँ! मन्दिर-मन्दिर जाकय कि हेतय जँ भगवानो दुःख नै बुझतय तँ! छाती भीतर कुण्ठा सँ कि हेतय जँ हमरे संजीत यादवक एक गजल – हमरे टा याद कय केँ कि हेतय