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प्रवीण नारायण चौधरी

सोशल मीडिया पर मैथिलीक पढाइ लेल आतुर गुरुजन

सोशल मीडिया पर मैथिलीक पढ़ाइ विद्यालय मे मैथिली भाषा-साहित्यक पढाइ बालकक्षा सँ उच्चकक्षा धरि – विभिन्न शोध व उपाधि हासिल करबाक धरि मौजूद अछि । मुदा पढ़निहार मे रुचि विभिन्न कारण सँ कम अछि, दिनानुदिन कम भेल जा रहल अछि । राज्य एहि लेल कोनो चिन्ता नहि करैछ, सामाजिक सरोकार रखनिहार सेहो गुम्मी लदने देखाइछ सोशल मीडिया पर मैथिलीक पढाइ लेल आतुर गुरुजन

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड पहिल अध्याय – हनुमानजीक लंका पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण अथ सुन्दरकाण्ड पहिल अध्याय हनुमानजीक लंका पहुँचब; सुरसा, सिंहिका व लंकिनी सँ सामना ।द्रुतविलम्बित छन्दः। धुतनगेऽम्बरगे परमोत्सवे, चकितभानुगणे जितमन्मथे ॥१॥ जनकजाधिविनाशिमनोगतौ, प्रणतिरस्तु हनूमति मारुतौ ॥२॥ भावार्थः पहाड़ केँ हिलबयवला, आकाश मे उड़यवला, परम उत्साह भरल, सूर्य-चन्द्रादि केँ चकित करयवला, कामदेव केँ जितयवला, जानकी व्यथा मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड पहिल अध्याय – हनुमानजीक लंका पहुँचब

मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड नवम अध्याय – हनुमानजी केँ लंका विदाह करब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – नवम अध्याय हनुमानजी केँ लंका विदाह करब ।चौपाइ। सम्पातिक सभ जनमल पाँखि । सभ जन वानर देखल आँखि ॥१॥ ओ खग मुदित गगन – पथ गेल । वानर सभ मन हर्षित भेल ॥२॥ दुर्ग्ग जलधि सन्तरण विचार । अछि अगम्य के जायत पार मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड नवम अध्याय – हनुमानजी केँ लंका विदाह करब

स्वाभिमान आ अभिमान मे कि अन्तर होइछ

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी स्वाभिमानक अर्थ भेल अपन गरिमा – अपन स्वत्व (प्रतिष्ठा) प्रति साकांक्ष होयब । एहि मे दोसर हमरा मान दियए तेकर अपेक्षा नहि छैक । बल्कि अपन मान केर रक्षा हो से सतर्कता छैक । ‘हमरा कियो मान दियए तेकर हमरा कोनो आवश्यकता नहि अछि, मुदा हमर कियो अपमान नहि करय स्वाभिमान आ अभिमान मे कि अन्तर होइछ

तुलसी – वैज्ञानिक एवं धार्मिक महत्व संग मिथिलाक व्यवहार मे तुलसी

लेख – रेखा झा, पटना   तुलसी हमर सबहक घरक सबसँ अभिन्न अंग होइत अछि तुलसी गाछ । तुलसी गाछ पवित्र आ मुख्य औषधि दुनू रूप मे जीवन केँ आनन्द प्रदान करैत अछि । तुलसीक पात, डांट आ मंजरी तीनूक प्रयोग कैल जाइत अछि । वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ पहिने देखी त तुलसीक गाछ सँ प्रचूर तुलसी – वैज्ञानिक एवं धार्मिक महत्व संग मिथिलाक व्यवहार मे तुलसी

मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड आठम अध्याय – सम्पाति केर आत्मकथा एवं आध्यात्मिक उपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – आठम अध्याय सम्पाति केर आत्मकथा एवं आध्यात्मिक उपदेश ॥अथ अष्टमोऽध्यायः॥ ।चौपाइ। उड़लहुँ हम जटायु दुहु भाय । रवि-रथ रोकब सत्वर जाय ॥१॥ भ्राता युगल अतुल बल मानि । तरुण अवस्था गुणल न हानि ॥२॥ घुरला बन्धु असह्य विचारि । हम नहि मानल मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड आठम अध्याय – सम्पाति केर आत्मकथा एवं आध्यात्मिक उपदेश

कालकूट विषः अमृत मन्थन आ १४ रत्नक वर्णन सहितक शिव-चर्चा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी आइ शिव-चर्चा करैत छी स्वाध्यायक बेर मे शिवचर्चा करबाक इच्छा भेल । सोम दिन, सावन मास – दिवस विशेष अनुसार जीवन जिबक संकल्प पर अग्रसर हम सब ई पुण्य कमा ली । सब सँ पहिने समुद्र मन्थन आ ताहि सँ प्राप्त कुल १४ रत्न पर चर्चा राजा बलिक राज मे कालकूट विषः अमृत मन्थन आ १४ रत्नक वर्णन सहितक शिव-चर्चा

मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड सातम अध्याय – अंगद केँ हनुमानजीक उपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – सातम अध्याय घबरायल अंगद केँ हनुमानक उपदेश, सम्पाति सँ भेंट आ लंकाक पता लागब ।सोरठा। चिन्ता – दुर्ब्बल देह, सीतान्वेषण मे भ्रमित ॥१॥ छूटल निज निज गेह, वन-तरु-शाखा-स्थित सकल ॥२॥ भावार्थः सीताक खोज मे भटकैत-भटकैत सभक शरीर दुब्बर भ’ गेलनि । सभक मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड सातम अध्याय – अंगद केँ हनुमानजीक उपदेश

मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड छठम अध्याय – सुग्रीव द्वारा अपन सेनाक परिचय एवं प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – छठम अध्याय सुग्रीव द्वारा अपन सेनाक श्री रामजी सँ परिचय तथा सेनाक प्रस्थान ।रूपक घनाक्षरी। ।तीरभुक्तिसङ्गीतरीत्या कानरा-राजविजय छन्दः। अजिन-वसन शुचि नवघन-सम रुचि, कमल-नयन हसयित मुख परसन ॥१॥ रघुवर गिरिगुहा पुर थित छला भन, वैदेही-विरह-जर जनु जरजर सन ॥२॥ लक्ष्मण कपिवर चरण प्रणति मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड छठम अध्याय – सुग्रीव द्वारा अपन सेनाक परिचय एवं प्रस्थान

मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड पाँचम अध्याय – रामजीक किष्किन्धा मे चतुर्मास एवं विरह-वर्णन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – पाँचम अध्याय रामजीक किष्किन्धा मे चतुर्मास एवं विरह-वर्णन ।चौपाइ। एक समय तहि गिरिमणि-सानु । विरही राम चरण-गिरि भानु ॥१॥ असह विरह लक्ष्मण काँ कहल । सीता हरलक राक्षस रहल ॥२॥ छथि वा नहि जिबयित के जान । हृदय हमर थिक कुलिश समान मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड पाँचम अध्याय – रामजीक किष्किन्धा मे चतुर्मास एवं विरह-वर्णन