रामचरिमानस मोतीः श्री रामायणजीक आरती
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्रीरामायणजीक आरती आरती श्रीरामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥ गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद॥ सुक सनकादि सेष अरु सारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥ गावत बेद पुरान अष्टदस। छओ सास्त्र सब ग्रंथन को रस॥ मुनि जन धन संतन को सरबस। सार अंस संमत सबही की॥ … रामचरिमानस मोतीः श्री रामायणजीक आरती


