गोपाल मोहन मिश्र केर दुइ गोट लघुकथा
*एक निश्चय-ठोस परिणाम* एक लड़का एक दिन बहुत धनी आदमी के देखलक। ओहि धनी आदमीक ठाठ-बाठ देखि कs लड़का के दिमाग में आयल कि वाह ! ज़िंदगी एहने हेबाक चाही आ फेर ओ सोचि लेलक कि आब ओकरो धनवान बनबाक अछि। ओ कतेक दिन तक एकरा बारे में सोचलक आ फेर एकटा बिजनेस शुरू … गोपाल मोहन मिश्र केर दुइ गोट लघुकथा








