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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः ब्राह्मण एवं संत केर वन्दना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती तुलसीकृत् रामचरितमानस केर स्वाध्याय सँ प्राप्त महत्वपूर्ण शिक्षा केँ साररूप मे मैथिली भाषा मे राखि रहल छी। क्रमवद्ध ढंग सँ अलग-अलग शीर्षक अन्तर्गत एकरा सुविधा लेल राखि रहल छी। बाद मे समग्र रूप केर एक पुस्तक केर रूप मे प्रकाशित करबाक नियार अछि। बाकी कोनो बात केवल आ रामचरितमानस मोतीः ब्राह्मण एवं संत केर वन्दना

रामचरितमानस मोतीः प्रथम सोपान – बालकाण्ड मंगलाचरण एवं गुरुक महत्व

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती बालकाण्ड मंगलाचरण एवं गुरुक महत्व अपन स्वाध्याय केर क्रम मे तुलसीकृत रामचरितमानस रूपी सागर सँ हमरा जे सब मोती रूप मे प्राप्त भेल से विभिन्न शीर्षक मे बांटिकय अपने सभक बीच राखि रहल छी। आशा करैत छी जे मैथिली मे ई निचोड़ अहाँ सब केँ सेहो पसीन पड़त रामचरितमानस मोतीः प्रथम सोपान – बालकाण्ड मंगलाचरण एवं गुरुक महत्व

एक पढ़ल-लिखल परिवारक वास्तविकताक खिस्साः सभक लेल मननीय

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी एहेन शिक्षा?   बड पैघ खानदान, कुलीनता, शिक्षा, संस्कार आ हर मामिला मे प्रतिष्ठित कहेनिहार मनोहर बाबूक चारि पुत्र आ दुइ पुत्री – छबो सन्तान केँ शिक्षा प्राप्ति लेल पूर्ण सहयोग देलनि। जेठ बेटा सुबोध त पढाई मे एतबे मेधावी भेला जे ताहि समयक पढाई केर लब्धप्रतिष्ठित पटना साइंस कालेज एक पढ़ल-लिखल परिवारक वास्तविकताक खिस्साः सभक लेल मननीय

गाम गाम लगाउ दहेज मुक्त मिथिला के बैनर आ दहेज मुक्त विवाह केँ बढावा दियौक

१९ मार्च २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! सामाजिक संजाल सँ संचालित अभियान दहेज मुक्त मिथिला द्वारा प्रत्येक सदस्य सँ अपन-अपन गाम मे एकटा बैनर लगबेबाक आग्रह कयल गेल अछि। एहि बैनर मे बैनर प्रायोजक अपन फोटो आ व्हाट्सअप नम्बर देथि, ताहि नम्बर मार्फत दहेज मुक्त विवाह केर प्रस्ताव (वैवाहिक परिचय, फोटो, आदि सहित) प्राप्त करथि आ गाम गाम लगाउ दहेज मुक्त मिथिला के बैनर आ दहेज मुक्त विवाह केँ बढावा दियौक

होली पर आधारित एक रचनाः होली साखी

साहित्य – प्रवीण नारायण चौधरी होली साखी   मन उदास आ खिन्न अवस्था होली खूब मनेलहुँ, मिलिजुलि साथी-संगत सब तैर गीतो खूब जे गेलहुँ!   सोचैत रहलहुँ मनहि मन कि होली के यैह थिक रीत, भाँग-गाँजा आ दारू पीबि कय गायब अनढन गीत!   बच्चे सँ जे देखलहुँ-सीखलहुँ यैह बनल अछि आदैत, नीक-निकुत खूब खाउ होली पर आधारित एक रचनाः होली साखी

युवा आ दहेज मुक्त मिथिला

युवा   ओना त युवा केँ परिभाषित करबाक पहिल आधार उमेर मात्र होइत छैक, मुदा उमेरक अधिकतम सीमा सेहो भिन्न‍-भिन्न हेबाक कारण युवा कहेबाक दोसर आ ठोस आधार हेबाक चाही एना हमरा लगैत अछि। हमरा बुझने –   क) बाल्यावस्था आ किशोरावस्था उपरान्तक अवस्था केँ ता धरि युवावस्था मनबाक चाही जा धरि कोनो काज करबाक युवा आ दहेज मुक्त मिथिला

अपन ब्राह्मण समाज विराटनगर द्वारा मेयर व वार्ड अध्यक्षक सम्मान संग होली मिलन

विराटनगर, १५ मार्च २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! विराटनगर आ आसपास के ब्राह्मण समुदाय सँ सादर अपील जे तिथि २0७८/१२/२ गते बुधदिन दुपहर के २:३० बजे सँ आयोजन होमएवाला “होरीक रंग ब्राह्मण समाजक सँग” कार्यक्रम मे अधिकाधिक संख्या मे उपस्थिति दर्ज कराबी। एहि कार्यक्रम मे स्वजन मिलन के सुअवसरक अतिरिक्त फगुआ के मधुर सांगीतिक कार्यक्रम आ अपन ब्राह्मण समाज विराटनगर द्वारा मेयर व वार्ड अध्यक्षक सम्मान संग होली मिलन

फगुआ (होली) – दहेज मुक्त मिथिला ‘लेखनीक धार’ अन्तर्गतक पुरस्कृत लेख

लेख – आभा झा फगुआ (होली) होली पर्व हिंदू पंचांगक अनुसार फागुन मासक पूर्णिमा क’ मनाओल जाइत छैक। होली रंगक संग हँसी-खुशी के पाबैन अछि। अपन मिथिला तथा नेपाल में ई प्रमुखता सँ मनाओल जाइत छैक। होली सँ एक दिन पहिने “सम्मत” जराओल जाइत छैक, जकरा “होलिका दहन” कहैत छी। दोसर दिन, जकरा प्रमुखतः धुरखेल फगुआ (होली) – दहेज मुक्त मिथिला ‘लेखनीक धार’ अन्तर्गतक पुरस्कृत लेख

फगुआ – दहेज मुक्त मिथिला ‘लेखनीक धार’ अन्तर्गतक लेख

लेख – विवेकी झा #लेखनी_के_धार #दहेज_मुक्त_मिथिला फगुआ फगुआ अहि शब्द के तात्पर्य फागुन सँ अइछ । अंग्रेजी कैलेंडरक हिसाब सँ ई मार्च के महीना मे मनायल जायत अइछ । अपना सबहक हिसाब सँ कहल जाय त फाल्गुन के महीना भेलै फागुन। अहि महीना मे मनायल जाय बाला त्योहार अइछ होली । अपना ओइठाम बसंत पंचमी फगुआ – दहेज मुक्त मिथिला ‘लेखनीक धार’ अन्तर्गतक लेख

फगुआ – दहेज मुक्त मिथिला लेखनीक धार अन्तर्गत पुरस्कृत लेख

लेख – कीर्ति नारायण झा #दहेज_मुक्त_मिथिला #लेखनी_के_धार फगुआ मिथिला मे राम खेलथि होली मिथिला मे…… मिथिलाक ई प्रसिद्ध फगुआ गीत मिथिलाक गली-गली गुंजैत अछि फगुआ के समय मे। मिथिला जनकनन्दनी जानकी के गाम होयबाक कारणे भगवान राम के संग जानकी के होली खेलेबाक परिकल्पना करैत अछि। रंग अबीर के स्नेह आ सम्बन्ध के प्रतीक होली फगुआ – दहेज मुक्त मिथिला लेखनीक धार अन्तर्गत पुरस्कृत लेख